उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले BJP में अपने ही नेता बन रहे सिरदर्द, त्रिवेंद्र बोले- अनुशासन की कमी
अरविंद पांडे प्रकरण हो या उमेश शर्मा काऊ मारपीट या फिर प्रणव चैंपियन का हालिया वीडियो, बीजेपी हो रही असहज, त्रिवेंद्र ने कही ये बात

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 23, 2026 at 6:54 PM IST
किरनकांत शर्मा
देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी पारा चढ़ने लगा है. एक ओर कांग्रेस कानून व्यवस्था, बेरोजगारी और सरकार की कार्यशैली को लेकर लगातार हमलावर है तो दूसरी ओर बीजेपी को सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से कम और अपने ही नेताओं से ज्यादा मिलती दिखाई दे रही है. सत्ता में लंबे समय से रहने का असर हो या संगठनात्मक अनुशासन की ढील, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने बीजेपी को बैकफुट पर ला दिया है. कांग्रेस इन घटनाओं को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने में जुटी है और सवाल उठा रही है कि क्या बीजेपी अपने ही नेताओं पर नियंत्रण रखने में सक्षम है?
अरविंद पांडे प्रकरण पर बयानबाजी से बढ़ी असहजता: पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे पिछले दिनों लगातार अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे. उधम सिंह नगर की घटनाओं को लेकर उन्होंने जिस तरह पुलिस और प्रशासन पर निशाना साधा, उसने पार्टी के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी. यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ नेता मदन कौशिक और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को उनके आवास पहुंचने तक की नौबत आ गई थी.
प्रशासन की ओर से अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किए जाने के बाद भी अरविंद पांडे के तेवर नरम नहीं पड़े. उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से खुली जांच की मांग तक कर दी और जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान के खिलाफ आवाज बुलंद की. कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को हाथों हाथ लिया और बीजेपी सरकार को घेरते हुए इसे अंदरूनी कलह व प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बताया. हालांकि, बाद में पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप कर उन्हें संयम बरतने की अपील करनी पड़ी.
कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का वीडियो भी आया सामने: खानपुर से जुड़े बीजेपी नेता और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन एक बार फिर विवादों में आ गए. एक शादी समारोह से जुड़ा उनका एक वीडियो सामने आया तो कांग्रेस ने बीजेपी के अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए. हालांकि, वीडियो ने तूल पकड़ा तो मामले में प्रणव चैंपियन सफाई देते हुए भी नजर आए.
उधर, विपक्ष का कहना है कि बार-बार विवादों में रहने वाले नेताओं पर अगर कार्रवाई नहीं होती तो यह संगठन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. हालांकि, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है, लेकिन राजनीतिक नुकसान से पार्टी इनकार नहीं कर सकती.
उमेश शर्मा काऊ विवाद, शिक्षा निदेशक से मारपीट ने बढ़ाई सियासी तपिश: सबसे गंभीर मामला रायपुर से विधायक उमेश शर्मा से जुड़ा सामने आया. जहां शिक्षा निदेशालय में हंगामे और मारपीट की घटना ने प्रदेश की राजनीति में फिर से घमासान मचा दिया. आरोप है कि विधायक अपने समर्थकों के साथ कार्यालय पहुंचे और विवाद इतना बढ़ गया कि बात मारपीट तक आ गई. जिसमें शिक्षा निदेशक को चोट तक लग गई.
पुलिस ने विधायक और कुछ समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. जिसके बाद शिक्षक संगठनों और कर्मचारी संघों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. राज्य में लाखों की संख्या में सरकारी कर्मचारी और शिक्षक जुड़े हुए हैं. ऐसे में यदि यह वर्ग नाराज होता है तो इसका असर सीधे चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है. बोर्ड परीक्षाओं के दौरान उठे इस विवाद ने सरकार की छवि पर भी असर डाला है.

विशेषज्ञों की राय, सत्ता का नशा या संगठनात्मक ढील: वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी का मानना है कि सत्ता में रहने के दौरान इस तरह की घटनाएं नई नहीं है. कई बार जनप्रतिनिधि यह मान लेते हैं कि सरकार उनकी है, इसलिए वे प्रशासनिक अधिकारियों से मनमाना व्यवहार कर सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों का खामियाजा अंतत: पार्टी को भुगतना पड़ता है. खासतौर पर उमेश शर्मा प्रकरण जैसे मामलों में यदि कर्मचारी वर्ग बीजेपी से दूरी बनाता है तो चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं.
"अभी चुनावी समय है और प्रत्याशियों का चयन अंतिम परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा, लेकिन मौजूदा घटनाएं यह संकेत जरूर दे रही हैं कि पार्टी को अंदरूनी अनुशासन पर सख्ती दिखानी होगी."- आदेश त्यागी, वरिष्ठ पत्रकार
संगठन का पक्ष माफी संयम और संतुलन की अपील: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उमेश शर्मा काऊ प्रकरण पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उमेश शर्मा काऊ ने मामले में माफी मांग ली है. सरकारी कर्मचारियों को भी अपने व्यवहार पर संतुलन रखने की जरूरत है.
"उमेश शर्मा काऊ ने संगठन कार्यालय पहुंचकर माफी मांगी है और घटना की निंदा की है. सरकारी कर्मचारियों को भी जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार में संतुलन रखना चाहिए और अनावश्यक विरोध से बचना चाहिए."- महेंद्र भट्ट, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड
कांग्रेस नेताओं के घेरा: महेंद्र भट्ट ने कहा कि जो लोग बीजेपी के नेताओं को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं, वो ये देखें कि जब वो सत्ता में थे तो उनके विधायक-मंत्री किस तरह से राज्य में हंगामा करते थे. पार्टी भी खामोश रहती थी. विधायक और मंत्री भी खामोश रहते थे. लिहाजा, विपक्ष हमें ना बताएं कि हमें कैसे काम करना है.

त्रिवेंद्र रावत बोले- अनुशासन की कमी: ऐसा नहीं है कि जानकार और कांग्रेस ही बीजेपी के नेताओं पर सवाल खड़े कर रही है. उधर, बीजेपी से सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी इस तरह की घटनाओं को अनुशासन की कमी बताया है.
"जनप्रतिनिधियों को मर्यादित आचरण रखना चाहिए. सरकारी कर्मचारी सरकार के हाथ होते हैं. ऐसे में टकराव की स्थिति से बचना जरूरी है. संगठन के स्तर पर भी अनुशासन को लेकर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है."- त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
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