यशपाल आर्य ने विधानसभा बजट सत्र को लेकर धामी सरकार पर किया हमला, कहा- जनता से जुड़े मुद्दे उठाएगी कांग्रेस
भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा बजट सत्र को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने की तैयारी कर ली है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 27, 2026 at 9:03 AM IST
देहरादून: उत्तराखंड में ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में 9 मार्च से पांचवा विधानसभा का बजट सत्र आहूत होने जा रहा है. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी सोमवार को राज्यपाल का अभिभाषण प्रस्तावित है, जबकि परंपरागत रूप से सोमवार का दिन मुख्यमंत्री के प्रश्न काल के लिए राज्य में निर्धारित माना जाता रहा है. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का कहना है कि हर विधानसभा सत्र की तरह इस बार भी मुख्यमंत्री धामी ने अपने 5 वर्षों के कार्यकाल में एक भी सोमवार को प्रश्नकाल का प्रत्यक्ष रूप से सामना नहीं किया है.
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि इस सत्र में भी सरकार ने पहले की तरह विपक्ष के प्रश्नों से बचने की तैयारी कर ली है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक विधानसभा सभा के बत्तीस कार्य दिवस हुए हैं, यह स्पष्ट करता है कि भारतीय जनता पार्टी का मकसद क्या है. आर्य ने कहा कि इस बार भी सरकार हर बार की तरह जनता के सवालों से बचना चाहती है. उन्होंने कहा कि सोमवार का दिन मुख्यमंत्री के प्रश्न काल के लिए निर्धारित होता है आया है, यह सोमवार का दिन कार्य दिवस के रूप में क्यों नहीं आता है.
यशपाल आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के अधीन 40 महत्वपूर्ण विभाग हैं, ऐसे मे क्या विपक्ष को उन विभागों से जुड़े सवालों के जवाब नहीं मांगने चाहिए. लेकिन विपक्ष सवालों से बचने के लिए सरकार ने खामोशी अख्तियार की हुई है. उन्होंने कहा कि विपक्ष के सवालों के जवाब दरअसल मुख्यमंत्री धामी के पास नहीं है. उन्होंने कहा कि 9 मार्च सोमवार को गैरसैंण मे राज्यपाल का अभिभाषण प्रस्तावित है, मुख्यमंत्री वित्त मंत्री भी हैं, इसलिए बजट सत्र में चर्चा के लिए चार दिन का समय भी होना चाहिए.
विभागवार चर्चा के लिए भी कम से कम चार दिन मिलने चाहिए. लेकिन सरकार ने बजट सत्र को विपक्ष के सवालों से बचने के लिए सीमित कर दिया है. उन्होंने सत्र को कम से कम 21 दिन आयोजित किए जाने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि इस बार सत्र में विपक्ष विद्यालय विहीन शिक्षकों, विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, आपदा प्रभावितों को राहत दिए जाने, राज्य में अवरुद्ध विकास, किसान आत्महत्या प्रकरण, किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने, महिलाओं पर उत्पीड़न की घटनाओं, कमजोर,अल्पसंख्यक और दलित तबकों पर अत्याचार, राज्य की बिगड़ी कानून व्यवस्था जैसे तमाम मुद्दों पर सरकार से सवाल करेगी. विपक्ष का कहना है कि सरकार हर बार की तरह इस बार भी विपक्ष के सवालों का जवाब देने को तैयार नहीं है, क्योंकि सत्ता पक्ष के पास विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं है.

