केंद्रीय मंत्री मेघवाल बोले- 21वीं सदी भारत की, साइबर अपराधों पर लगाम लगाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा देश
विधि मंत्री ने कहा कि नई तकनीक से जहां सुविधाओं में बढ़ोतरी की है. वहीं, इससे जुड़े अपराध भी बढ़े हैं.

Published : February 22, 2026 at 4:16 PM IST
|Updated : February 22, 2026 at 4:24 PM IST
जयपुर: केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि 21वीं सदी एशिया की होगी. जिसका नेतृत्व भारत करेगा. साइबर अपराध हो या किसी प्रकार के अन्य अपराध. उन पर लगाम लगाने में भारत अग्रणी भूमिका निभाएगा. उन्होंने जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा सेमिनार के समापन समारोह में शिरकत की. इस मौके पर उन्होंने यह बात कही. इससे पहले साइबर सुरक्षा सेमिनार में तीन दिन तक साइबर अपराध के विभिन्न आयामों को लेकर मंथन किया गया. समापन समारोह में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और हाईकोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी भी मौजूद रहे.
अपनी तरह का देश का पहला आयोजन राजस्थान में: मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा यह अपनी तरह का देश का पहला आयोजन है, जो राजस्थान में हुआ है. यह प्रयास सराहनीय है. यह कार्यक्रम देशभर में चर्चा का केंद्र बन रहा है. वे बोले, तकनीक का विकास एक सतत प्रक्रिया है. जब भी नए अविष्कार हुए, शुरू में विरोध हुआ लेकिन अब वे हमारी अहम जरूरत बन गए हैं. अब एआई के रूप में इंडस्ट्री 4.0 आया है. आज हम एआई और रोबोटिक्स के युग में प्रवेश कर रहे हैं. इसी से ही जुड़ा साइबर क्राइम है.
पढ़ें: सीजेआई ने जताई पीड़ा, 'मेरे नाम से बन रही फर्जी साइट्स, फोटो भी कर दिए अपलोड'
सीनियर ऑफिसर को भी साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग: उन्होंने कहा, नई तकनीक से जहां सुविधाओं में बढ़ोतरी की है. वहीं, इससे जुड़े अपराध भी बढ़े हैं. साइबर अपराध को लेकर राजस्थान में यह पहल हुई है. अब यह संदेश देशभर में जाएगा. साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता की जरूरत है. कोई अनजान कॉल आए तो डरने के बजाए हिम्मत दिखाएं. कांस्टेबल के साथ ही सीनियर पुलिस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग देनी चाहिए. साइबर अपराध की समस्या पर लगाम लगाने में भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा.

पढ़ें: विधानसभा सत्र 2026: शून्यकाल में साइबर ठगी, तालाबों पर अतिक्रमण और बढ़ते नशाखोरी के मुद्दे उठे
एआई की मदद से ज्यादातर साइबर अपराध: राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा, मंथन में यह सामने आया है कि ज्यादातर साइबर अपराध एआई की मदद से हो रहे हैं. आज आंखों देखी पर विश्वास करना भी मुश्किल हो गया है. इस कॉन्फ्रेंस में साइबर अपराध के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई है. राजस्थान में साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. नए आपराधिक कानूनों में भी साइबर अपराधियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कठोर प्रावधान किए गए हैं.

साइबर अपराध को लेकर राजस्थान ने की अनूठी पहल: उन्होंने कहा कि राजस्थान में साइबर अपराध के अनुसंधान के लिए अलग से पुलिस स्टेशन हैं. अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अलग से साइबर अपराध के लिए कोर्ट खोलने की भी घोषणा की है. यह पहल करने वाला राजस्थान पहला प्रदेश होगा. उन्होंने कहा कि इस सेमिनार में विषय विशेषज्ञों ने जो सुझाव दिए हैं. उनमें एक बात कॉमन है कि जागरूकता से ही साइबर अपराध से बचा जा सकता है. सेमिनार में आए सुझावों को संकलित कर सुप्रीम कोर्ट तक भेजा जाएगा. जिससे इस विषय पर अधिक मजबूत कानून बनाने में मदद मिलेगी.

न्याय पालिका पर आमजन का भरोसा: जज पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा, तकनीक की एक बड़ी समस्या है. जिसका मिलकर समाधान निकालना होगा. आम आदमी का न्याय पालिका में अपार भरोसा है. जब आदमी का जीवन, संपत्ति खतरे में है तो हमें आगे आना होगा. उन्होंने कहा तीन दिवसीय सेमिनार में जो मंथन हुआ है. वह साइबर अपराध की चुनौती से निपटने के लिए एक रोडमैप है. जयपुर में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से साइबर सुरक्षा सेमिनार का आगाज 20 फरवरी को हुआ था. आज इसका समापन हुआ है. इस कार्यक्रम में साइबर अपराध और इससे बचाव के बिंदुओं पर विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी.

