बिहार में बदला दाखिल खारिज का नियम, एक क्लिक में पूरा काम होगा
बिहार में जमीन का दाखिल खारिज करने के नियम बदल गए हैं. अब आवेदन को कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा.

Published : December 27, 2025 at 8:56 PM IST
पटना: बिहार में जमीन का दाखिल खारिज को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है. 27 दिसंबर से नया नियम लागू हो गया है. अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. बिहारभूमि पोर्टल पर एक ही आवेदन में पूरे परिवार का दाखिल खारिज हो सकेगा.
बंटवारे की प्रक्रिया को सरल: पारिवारिक भूमि बंटवारे की प्रक्रिया को सरल, आसान और विवाद मुक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है. नई व्यवस्था राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के बिहारभूमि पोर्टल पर लागू कर दी गई है. एक आवेदन के माध्यम से परिवार के सभी हिस्सेदारों के नाम उनके हिस्से की भूमि पर जमाबंदी कायम हो सकेगी.
एक ही आवेदन में होगा पूरे परिवार की जमीन का दाखिल–खारिज : विजय कुमार सिन्हा
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प्रत्येक रिश्तेदार को मिलेगा हिस्सा: इसकी घोषणा डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में की. विजय सिन्हा ने बताया कि पूर्व की व्यवस्था में पारिवारिक बंटवारे के बाद प्रत्येक हिस्सेदार को अपने हिस्से की जमीन के लिए अलग-अलग दाखिल–खारिज कराना पड़ता था, जिससे लोगों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. इसलिए इसमें सुधार किया गया है.
"निर्देशों के आलोक में प्रधान सचिव सीके अनिल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने अल्प समय में नई व्यवस्था विकसित की, जिसे अब बिहारभूमि पोर्टल की दाखिल-खारिज सेवा के अंतर्गत लागू कर दिया गया है. इससे आम रैयतों को काफी सहूलियत मिलेगी." -विजय सिन्हा, डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री
'अपने हिस्से की जमाबंदी डिजिटल कराएं': उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि 'अपने पूर्वजों की भूमि का विधिवत बंटवारा कर सकते हैं. डिजिटल माध्यम से अपने हिस्से की जमीन की जमाबंदी अपने नाम से अवश्य कराएं.' विशेष रूप से उन लोगों से आग्रह किया जिनके यहां अब तक मौखिक बंटवारा के आधार पर जमीन पर कब्जा और उपयोग हो रहा है.
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- यहां करें आवेदन: biharbhumi.bihar.gov
मौखिक बंटवार विवाद का कारण: डिप्टी सीएम ने कहा कि इस नई सुविधा का लाभ उठाकर मौखिक बंटवारे को अपने सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कराएं. मौखिक बंटवारा आगे चलकर पारिवारिक भूमि विवाद का कारण बनता है. ऐसे मामलों में लोग कई सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं.
पूर्वज की मृत्यु के बाद भी व्यवस्था: विजय सिन्हा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत उत्तराधिकार-सह-बंटवारा की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसके अंतर्गत पूर्वज की मृत्यु के बाद उनकी भूमि का बंटवारा करते हुए सभी उत्तराधिकारियों के नाम उनके हिस्से की जमीन पर अलग-अलग जमाबंदी एक साथ की जा सकेगी.
पंचायतों में ही शिविर लगेगा: इसी वर्ष अगस्त-सितंबर में चलाए गए राजस्व महा-अभियान के दौरान 46 लाख से अधिक आवेदन मिले हैं, उनमें से 40 लाख से अधिक आवेदन बंटवारा एवं उत्तराधिकार नामांतरण के अधिक थे. इन आवेदनों को 31 दिसंबर तक अपलोड कर लिया जाएगा. जनवरी से मार्च के बीच पुनः पंचायतों में ही शिविर लगाकर सभी आवेदनों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा.
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संवाद की शुरुआत: लोगों को भूमि से संबंधित परेशानियों से निजात दिलाने के उद्देश्य से ही भूमि सुधार जनकल्याण संवाद की शुरुआत की गई है. इस संवाद के माध्यम आमलोगों की परेशानियों को जिलों में जाकर समझने और समय सीमा में लोगों की समस्या का समाधान करना उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि यह पहल भूमि प्रशासन को पारदर्शी, सरल और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
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