हाई वोल्टेज ड्रामा! व्हाट्सऐप पर भेजा नोटिस, फिर बागवानों से जमीन खाली कराने पहुंची वन विभाग की टीम
बागवानों ने सवाल उठाया कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं था कि किस कानून के तहत यह कार्रवाई की जा रही है.

By ANI
Published : February 22, 2026 at 4:42 PM IST
शिमला: शिमला जिले के जुब्बल उपमंडल में शनिवार को जमीन खाली कराने की कोशिश को लेकर विवाद खड़ा हो गया. सेब बागवानों और स्थानीय ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का जोरदार विरोध किया, जिसके बाद अधिकारियों को मौके से वापस लौटना पड़ा. यह मामला जाखोड़ गांव और रामनगर चक क्षेत्र का है, जहां वन और राजस्व विभाग की टीम पहुंची थी. दरअसल, अधिकारी जमीन खाली कराने के उद्देश्य से गांव में पहुंचे थे. जैसे ही इसकी सूचना ग्रामीणों और बागवानों को मिली, वे बड़ी संख्या में वहां एकत्र हो गए. इस दौरान हिमाचल सेब उत्पादक संघ के पदाधिकारी और सदस्य भी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पर आपत्ति जताई. बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन और पुलिस बल को वहां से वापस लौटने पड़ा.
नोटिस पर उठे सवाल
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें 18 फरवरी की तारीख वाला नोटिस केवल व्हाट्सऐप (WhatsApp) के जरिए मिला था. उनका आरोप है कि तीन दिन बाद ही 21 फरवरी को जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं था कि किस कानून के तहत यह कार्रवाई की जा रही है. जब उन्होंने अधिकारियों से जानकारी मांगी, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. बागवानों ने यह भी कहा कि प्रशासन वन अधिकार कानून के प्रावधानों को नजरअंदाज कर रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
वहीं, सेब उत्पादक संघ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार को किसानों के लिए उचित नीति बनाने के निर्देश दिए थे. संघ का आरोप है कि जब तक स्पष्ट नीति तैयार नहीं होती, तब तक इस तरह की कार्रवाई करना उचित नहीं है. प्रशासन को पहले कानूनी प्रक्रिया और नीति स्पष्ट करनी चाहिए थी. संघ ने इस कार्रवाई को “अनुचित और समय से पहले” बताया. प्रदर्शन के दौरान संघ के प्रतिनिधियों ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की प्रतियां अधिकारियों को दिखाईं.
24 फरवरी को सम्मेलन
सेब बागवानों ने 24 फरवरी को हाटकोटी में एक बैठक बुलाने की घोषणा की है. इस बैठक में किसान अपनी जमीन के अधिकारों की रक्षा और स्पष्ट नीति की मांग को लेकर आगे की रणनीति तय करेंगे. संघ ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है.
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