लालू यादव के साले सुभाष यादव को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत, FIR रद्द.. जानिए पूरा मामला
सुभाष यादव को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने बिहटा थाने में दर्ज केस को रद्द करने का आदेश दिया है. पढ़ें

Published : July 8, 2026 at 12:36 PM IST
पटना: पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई और आरजेडी के पूर्व सांसद सुभाष प्रसाद यादव को जमीन से जुड़े विवाद और धोखाधड़ी मामले में पटना हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. अदालत ने सुभाष यादव को बड़ी राहत देते हुए बिहटा थाना में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर दिया हैं. अदालत ने मामले में तत्कालीन एसएसपी, दानापुर डीएसपी और बिहटा थानाध्यक्ष पर 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया है.
सुभाष प्रसाद यादव को बड़ी राहत: आरजेडी के पूर्व सांसद सुभाष प्रसाद यादव ने मामले को रद्द करने के लिए पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में ही सुभाष यादव के खिलाफ दर्ज कराए गए प्राथमिक को निरस्त कर दिया था. मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और वहां से वापस पटना हाई कोर्ट में आया था.

पुलिस अधिकारियों पर जुर्माना: पटना हाइकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में भ्रामक तथ्यों के प्रस्तुतीकरण को काफी गंभीर माना. हाई कोर्ट ने इस मामले का अंतिम निस्तारण करते हुए पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक समेत दानापुर के डीएसपी और बिहटा थाना के थानाध्यक्ष पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है.
क्या है पूरा मामला?: यह मामला बिहटा थाना कांड संख्या 425/2023 से संबंधित है. जस्टिस विवेक चौधरी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साले और पूर्व सांसद सुभाष यादव द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
बिहटा थाने में रंगदारी का केस दर्ज: मामले में शिकायतकर्ता पटना जिले के नेउरा के बेला निवासी भीम वर्मा ने सुभाष यादव पर जमीन के बदले पैसा नहीं देने का आरोप लगाया था. जिसके बाद बिहटा थाने में जमीन की हेराफेरी और रंगदारी का केस दर्ज कराया था. मामले में भीम वर्मा का आरोप था कि 96 लाख की जमीन 60 लाख में रजिस्ट्री कराई गई और बाकी का पैसा मांगने पर दी गई रकम भी वापस ले ली गई.
फरारी के बाद घर पर चिपका इश्तेहार: मामले में जनवरी 2024 को पटना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कोर्ट के आदेश पर सुभाष यादव के राजा बाजार स्थित घर पर इश्तेहार चिपकाया. जिसमें कहां गया कि 30 दिनों के अंदर अगर सरेंडर नहीं करते हैं तो घर की कुर्की जब्ती होगी.

कोर्ट में सुभाष यादव का सरेंडर: 13 फरवरी 2024 को राजा बाजार स्थित सुभाष यादव के आवास पर पुलिस बुडोजर लेकर पहुंच गई. लेकिन पुलिस की कार्रवाई से पहले सुभाष यादव ने पटना सिविल कोर्ट स्थित एमपी एमएलए कोर्ट में सरेंडर कर दिया.
2024 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: इसके पहले हाई कोर्ट ने 15 मार्च, 2024 को इस आपराधिक रिट याचिका को निष्पादित कर दिया था. हाई कोर्ट से इस आपराधिक रिट याचिका के निष्पादित हो जाने के बाद राज्य सरकार समेत सूचक ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर कहा था कि इस मामलें का निष्पादन उन्हें नोटिस दिए बिना कर दिया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट जाइये: इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए पटना हाईकोर्ट वापस भेज दिया था. पुनः सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मूल न्यायिक अभिलेखों का परीक्षण किया. इस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 15 मार्च, 2024 की सुनवाई के दिन राज्य की ओर से अधिवक्ता हाई कोर्ट में उपस्थित थे तथा निजी प्रतिवादी भी पहले ही वकालतनामा दाखिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके थे.
बिना नोटिस दिए मामले का निष्पादित कैसे?: कोर्ट ने यह भी माना कि आदेश में निजी प्रतिवादी के अधिवक्ता का नाम दर्ज नहीं होना केवल कार्यालय की लिपिकीय त्रुटि थी, इससे उनकी अनुपस्थिति साबित नहीं होती. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह पाया कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह कहा गया कि बिना नोटिस दिए मामले का निष्पादित कर दिया गया था, जबकि न्यायिक अभिलेख इसके विपरीत थे.
सर्वोच्च न्यायालय में गलत तथ्य प्रस्तुत किए: सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि प्रतिवादी संख्या 3 से 5 द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए है. इसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला मानते हुए हाई कोर्ट ने इन तीनों पुलिस पदाधिकारियों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया.
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