हरियालो राजस्थान : कदंब और अर्जुन से सजेगा ब्रज क्षेत्र, वन विभाग तैयार कर रहा 16.90 लाख पौधे
इन पौधों का वितरण 'हरियालो राजस्थान' अभियान के अंतर्गत 1 जुलाई से आमजन और किसानों को किया जाएगा.

Published : March 11, 2026 at 5:05 PM IST
|Updated : March 11, 2026 at 5:32 PM IST
भरतपुर : ब्रज क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के लिए वन विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. कदंब और अर्जुन जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों को केंद्र में रखकर भरतपुर और डीग जिले में करीब 16 लाख 90 हजार पौधे तैयार किए जा रहे हैं. राज्य सरकार की पंच गौरव योजना और वन डिस्ट्रिक्ट-वन स्पीशीज अभियान के तहत तैयार किए जा रहे इन पौधों का वितरण 'हरियालो राजस्थान' अभियान के अंतर्गत 1 जुलाई से आमजन और किसानों को किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी.
भरतपुर के डीएफओ प्रमोद कुमार धाकड़ ने बताया कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन स्पीशीज योजना के अंतर्गत भरतपुर जिले में 60 हजार 'कदंब' के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जबकि डीग जिले में 30 हजार 'अर्जुन' के पौधे विकसित किए जा रहे हैं. इन पौधों को तैयार करने का कार्य तेजी से प्रगति पर है और इन्हें आगामी पौधारोपण अभियान के दौरान आमजन, किसानों और संस्थाओं को वितरित किया जाएगा. इन पौधों की जानकारी और वितरण से संबंधित विवरण एफएमडीएस पोर्टल पर भी समय-समय पर अपलोड किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे और इच्छुक लोग आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें.
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अलग-अलग ऊंचाई के पौधों की तय दरें : वन विभाग की ओर से पौधों की ऊंचाई और आयु के अनुसार उनकी कीमतें निर्धारित की गई हैं ताकि अधिक से अधिक लोग पौधे खरीदकर पौधारोपण कर सकें.
- कांटेदार प्रजातियों के पौधे: 5 रुपए प्रति पौधा
- 2 फीट तक के छायादार और चौड़ी पत्ती वाले पौधे: 6 रुपए
- 2 से 3 फीट ऊंचाई के पौधे: 10 रुपए
- 1 से 2 वर्ष पुराने (3 से 5 फीट ऊंचाई): 15 रुपए
- 5 से 8 फीट ऊंचाई के पौधे: 25 रुपए
- 8 से 10 फीट ऊंचाई के पौधे: 50 रुपए
- 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाले पौधे: 75 रुपए प्रति पौधा
किसानों के लिए लाभकारी प्रजातियों पर जोर : डीएफओ प्रमोद ने बताया कि वन विभाग की ओर से तैयार किए जा रहे पौधों में ऐसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो किसानों के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हों. इनमें बेर, शहतूत, पाखर, पीपल, बरगद, अर्जुन, शीशम और महोगनी जैसे महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं. इसके अलावा फलदार पौधों में अमरूद और नींबू जैसी प्रजातियों का भी वितरण किया जाएगा, जिससे किसानों को भविष्य में अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें. शीशम और महोगनी जैसे वृक्ष इमारती लकड़ी के लिए भी उपयोगी माने जाते हैं.

अर्जुन पौधे का औषधीय महत्व : डीग जिले में विशेष रूप से तैयार किया जा रहा अर्जुन का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. आयुर्वेद में इसकी छाल का उपयोग हृदय रोगों के उपचार में किया जाता है. यही कारण है कि वन विभाग ने इसे इस जिले की प्रमुख प्रजाति के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है. डीएफओ प्रमोद ने बताया कि वन विभाग इन योजनाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी कर रहा है. इसके लिए नुक्कड़ नाटक, होर्डिंग और बैनर और वन मेलों में स्टॉल लगाए गए. हाल ही में 28 फरवरी को आयोजित संभागीय स्तरीय वन मेले में भी इन योजनाओं के बारे में लोगों को विस्तार से जानकारी दी गई थी. वन विभाग का मानना है कि इन अभियानों के जरिए लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और भरतपुर-डीग क्षेत्र में हरियाली का दायरा तेजी से बढ़ेगा.



