जिस अशोकधाम में मची भगदड़, वहां गिल्ली-डंडा खेलते वक्त मिला था शिवलिंग.. जानिए इंद्रदमेश्वर महादेव की कहानी
लखीसराय के अशोक धाम में क्यों लगता है आस्था का जन सैलाब, जानिए इंद्रदमेश्वर महादेव की पूरी कहानी. रिपोर्ट-रंजीत पाठक

Published : August 17, 2026 at 11:35 AM IST
लखीसराय: बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व माना जाता है. सावन महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए उमड़ती है. यह पहला मौका नहीं है जब मंदिर में हादसा हुआ है इससे पहले भी मंदिर में हादसे हुए हैं और जान माल की क्षति हुई है.
शिवलिंग के प्रति लोगों की है आस्था: प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर को इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर भी कहा जाता है. विशाल शिवलिंग की पूजा के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. महीना अगर सावन का हो तो लोगों की आस्था और भी अधिक बढ़ जाती है. सावन के तीसरे सोमवार को मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से कई श्रद्धालुओं की मौत हुई और दर्जन भर लोग घायल हुए है और अब तक सात लोगों के मौत की खबर है.

पाल वंश के समय अस्तित्व में आया अशोक धाम मंदिर: प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक अशोक धाम मंदिर करीब 8वीं शताब्दी से शिव उपासना का केंद्र माना जाता रहा है. पाल वंश के शासक नारायण पाल के द्वारा यहां शिव पूजा शुरू होने की बात कही जाती है. बाद में 12वीं शताब्दी में राजा इंद्रद्युम्न द्वारा यहां मंदिर बनवाए जाने की बात कही जाती है. हलाकि इन प्राचीन दावों की स्वतंत्र पुरातात्विक पुष्टि सीमित है.
क्या है अशोक धाम की खासियत: अशोक धाम की सबसे बड़ी पहचान यहां का विशाल शिवलिंग है. बिहार पर्यटन और लखीसराय जिला प्रशासन विभाग द्वारा उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 7 अप्रैल 1977 को गिल्ली-डंडा खेलते समय अशोक नाम के एक युवक ने जमीन के अंदर विशाल शिवलिंग देखा था. शिवलिंग को निकालने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं हिला, इस घटना के बाद उसी स्थान पर मंदिर का विकास हुआ और इसका नाम अशोक धाम मंदिर रखा गया.

जलाभिषेक से मनोकामनाएं होती है पूरी: बात के दिनों में मंदिर का आधुनिकीकरण भी किया गया और 11 फरवरी 1993 को जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन किया था. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मुंडन संस्कार भी कराया जाता है. लोगों में मान्यता है कि यहां जलाभिषेक करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
बार-बार क्यों बेकाबू होती है भीड़: अशोक धाम में भीड़ का दबाव अचानक बढ़ने की समस्या नई नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह है सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या में जमावड़ा लगता है. आसपास के कई जिलों से लोग पूजा अर्चना के लिए आते हैं. दूसरे राज्यों के लोग भी शिव की पूजा करने अशोक धाम पहुंचते हैं. सोमवारी के दिन भीड़ अत्यधिक होने के चलते भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है.

पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा: अशोक धाम में भगदड़ का यह पहला मामला नहीं है, 12 अगस्त 2019 को सावन के आखिरी सोमवार पर भी मंदिर में भगदड़ हुई थी. उस हादसे में एक श्रद्धालु की मौत और कम से कम 8 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी. उस समय भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और बैरिकेडिंग टूटने को हादसे की प्रमुख वजह मानी गई थी.

क्या भीड़ प्रबंधन में कमी है?: लखीसराय के स्थानीय संजीव सिंह कहते हैं कि सावन की सोमवारी को हर साल लोगों की भीड़ बढ़ती है और यह जानकारी प्रशासन को होती है. अगर समय रहते प्रशासनिक स्तर पर इंतजाम को पुख्ता कर लिया जाता तो ऐसी घटनाएं टाली जा सकती थी.
"शिवलिंग को लेकर लोगों में गहरी आस्था है और सावन में जलाभिषेक कर लोग भगवान शिव की पूरे मन से आराधना करते हैं. धीरे-धीरे लोगों में आस्था और बढ़ रही है और इससे भीड़ में भी बढ़ोतरी हो रही है."-संजीव सिंह, स्थानीय
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