कौन है अशोक धाम भगदड़ का गुनहगार ? जल्द होगा बड़ा खुलासा
अशोक-धाम भगदड़ मामले की जांच के लिए बिहार न्यास बोर्ड की तीन सदस्यीय टीम लखीसराय पहुंची. ADM को भी रिपोर्ट सौंपनी है. रिपोर्ट- गोपाल आर्य

Published : August 19, 2026 at 3:46 PM IST
लखीसराय: बिहार के भव्य अशोक धाम में 17 अगस्त ( सावन की तीसरी सोमवारी) को अचानक भगदड़ मचने से कई श्रद्धालुओं की असामयिक मौत हो गई. इस बेहद दर्दनाक हादसे में बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इसके बाद अब सबसे बड़ा गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि इस भयावह घटना की असल जिम्मेदारी किस पर है. प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौतरफा तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं.
प्रशासनिक चूक पर सवाल : इस भीषण और दुखद हादसे के तुरंत बाद स्थानीय जिला प्रशासन की घोर लापरवाही पूरी तरह उजागर हुई है. मौके पर भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम न होने को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. यहां तक कि कई प्रमुख स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने भी प्रशासनिक तैयारियों में रही बड़ी कमियों को उजागर करते हुए कड़े सवाल किए हैं.
बिहार न्यास बोर्ड कर रही जांच : बुधवार को अशोक धाम के प्रांगण में दो सदस्यों की बिहार संयुक्त सचिव के द्वारा प्रतिनियुक्ति टीम अपने दल बल के साथ पहुंची है, जहां लखीसराय के अनुमंडल पदाधिकारी प्रभाकर कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शिवम कुमार, मंदिर ट्रस्ट के लोगो में डॉ प्रवीन कुमार सिन्हा, राजेंद्र सिंघानिया सहित अन्य लोग मौजूद थे. बिहार न्यास बोर्ड के तीन सदस्यों की टीम मामले की जांच कर रही है. इस टीम में अशोक कुमार, हिमराज और राजेंद्र कुमार शामिल हैं.
"सोमवार के दिन देवघर के समान यहां भीड़ लगती है. दुखद घटना है, जांच हो रही है. सरकार ने त्वरित मुआवजा दिया है. आगे भी प्रावधानों के अनुसार काम होगा. जांच के बाद घटना का कारण पता चलेगा और आगे ऐसी घटना न हो इसकी कोशिश होगी."- राजेंद्र कुमार, बिहार न्यास बोर्ड के सदस्य
"जांच के दौरान हमने पाया कि अफवाह के कारण घटना घटी है. प्रशासनिक पदाधिकारियों के द्वारा इसपर काबू पाया गया. घटना के बाद भी सारी औपचारिकताएं पूरी की गई कोई देरी नहीं हुई. लोगों को ससमय अस्पताल पहुंचाया गया है. अगले सोमवारी को लेकर पूरी तैयारी है. लोगों को परेशानी न हो इसका ध्यान रखा जाएगा."- प्रेमरंजन पटेल, पूर्व विधायक
ADM को भी जांच की जिम्मेदारी : हादसे की वास्तविक और सटीक वजह जानने के लिए एडीएम नीरज कुमार को भी जांच की जिम्मेदारी दी गई है. अब सभी लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. जांच प्रक्रिया के दौरान घटना से पहले के इंतजामों, मौके की सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण के उपायों और भगदड़ के समय पैदा हुई परिस्थितियों की गहन पड़ताल की जाएगी. जांच के लिए ADM की अध्यक्षता में टीम गठित कर कर दी गई है, जो 24 घंटे के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे.
जांच रिपोर्ट का इंतजार : इस विस्तृत और महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट के आधिकारिक रूप से सबके सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. तभी सही मायने में पता चलेगा कि यह भीषण हादसा किन विपरीत परिस्थितियों में हुआ और कहां चूक हुई थी. इसके बाद ही विभिन्न स्तरों पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी.

प्रत्यक्षदर्शी का बयान : एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार मंदिर परिसर के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी. उसी दौरान अचानक वहां एक बड़ा बिजली का पोल गिर गया. इसके बाद पूरी भीड़ में करंट फैलने की आशंका और भयानक अफवाह बेहद तेजी से फैल गई. इसी डर से वहां अचानक भारी अफरा-तफरी मची, बैरिकेडिंग टूट गई और लोग असंतुलित होकर एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे.
बीजेपी जिलाध्यक्ष का आरोप : हादसे के बाद बीजेपी के लखीसराय जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बिजली विभाग की लचर कार्यप्रणाली, मौके पर तैनात मजिस्ट्रेटों की घोर लापरवाही और सदर अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए. उन्होंने इस पूरे संवेदनशील मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराकर कड़ी जिम्मेदारी तय करने की मांग की है.
"हादसे की पूरी परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. साथ ही जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए."- दीपक सिंह, लखीसराय जिलाध्यक्ष, बीजेपी
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