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लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री संकट: एशिया के सबसे पुराने प्लांट में ताला, यह बताया जा रहा है कारण...कांग्रेस-भाजपा ने खोला मोर्चा

​एशिया की सबसे पुरानी लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री में दो महीने से उत्पादन बंद होने से हजारों परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट मंडरा रहा है.

लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री में प्रोडक्शन बंद
लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री में प्रोडक्शन बंद (फोटो ईटीवी भारत कोटा)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 29, 2026 at 7:45 AM IST

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Updated : May 29, 2026 at 11:04 AM IST

11 Min Read
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कोटा/बूंदी : ​राजस्थान के बूंदी जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा 'लाखेरी' आज अपनी पहचान और वजूद की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है. एशिया की सबसे पहली सीमेंट फैक्ट्री, जिसने साल 1912-13 में अपनी नींव रखी थी और जहां 1917 से देश के निर्माण के लिए सीमेंट का उत्पादन शुरू हुआ था, आज पूरी तरह खामोश हो चुकी है. बीते दो महीनों से इस फैक्ट्री में उत्पादन (Production) पूरी तरह से बंद है.

करीब 113 साल के गौरवशाली इतिहास को समेटे इस प्लांट के बंद होने से न केवल लाखेरी बल्कि पूरे बूंदी जिले में हड़कंप मच गया है. जो फैक्ट्री कभी एसोसिएट सीमेंट कंपनी (ACC) के अधीन देश की धड़कन हुआ करती थी, उसका करीब 4 साल पहले अडानी ग्रुप ने टेकओवर किया था. टेकओवर के बाद उत्पादन जारी था, लेकिन अचानक दो महीने पहले इसके पहिये थम गए. अब स्थिति यह है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस फैक्ट्री पर निर्भर करीब 20,000 लोगों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है.

ठप हुई कस्बे की अर्थव्यवस्था, कांग्रेस- भाजपा नेताओं ने शुरू किया आंदोलन (वीडियो ईटीवी भारत कोटा)

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करीब 100 साल से भी ज्यादा समय से उत्पादन कर रही फैक्ट्री से प्रोडक्शन बंद होने पर हड़कंप मच गया है. फैक्ट्री प्रबंधन सीधे तौर पर कुछ भी नहीं कर रहा है, हालांकि प्रोडक्शन बंद होने की बात स्वीकार रहे हैं. दूसरी तरफ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं. फैक्ट्री में काम कर रहे करीब 1 हजार के आसपास कार्मिक और मजदूरों में रोजगार का संकट छा गया है. इस सीमेंट फैक्ट्री से करीब 3000 के आसपास परिवारों का रोजगार चल रहा था. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20000 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं. दूसरी तरफ लाखेरी कस्बे की पूरी अर्थव्यवस्था इसी फैक्ट्री के दम पर चल रही है. 100 साल पुरानी इस धरोहर और रोजगार के साधन को छिनता देख बूंदी जिले की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल मैदान में उतर आए हैं और एक-दूसरे के साथ-साथ फैक्ट्री प्रबंधन को भी आड़े हाथों ले रहे हैं.

लोगों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट
लोगों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट (फोटो ईटीवी भारत कोटा)

सीमेंट कंपनी लाखेरी के एचआर मैनेजर अनिल दुबे का कहना है कि वह फैक्ट्री के संबंध में ज्यादा बात नहीं कर सकते हैं. क्योंकि वह अधिकृत भी नहीं है, लेकिन फैक्ट्री में प्रोडक्शन 2 महीने से बंद होने की बात उन्होंने स्वीकारी है. इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी भी पीछे नहीं है. केशोरायपाटन की पूर्व भाजपा विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने बीते दिनों इस तालाबंदी के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया और उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा. अभिभाषक परिषद लाखेरी ने भी स्थानीय प्रशासन को चेताया है.

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​इधर, बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने इस फैक्ट्री को चालू रखने की मांग की है, उनका कहना है की फैक्ट्री बूंदी जिले की शान रही है. इसे बंद होने के चलते पूरे जिले की छवि खराब होगी, यहां तक की रोजगार का भी संकट लोगों पर हो जाएगा. वहीं केशोरायपाटन से कांग्रेस विधायक और बूंदी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सीएल प्रेमी ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि 1 जून से कलेक्ट्रेट पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा. इस आंदोलन में उनके साथ पूर्व मंत्री व हिंडोली विधायक अशोक चांदना और बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा भी शामिल रहेंगे. सीएल प्रेमी ने लोकसभा अध्यक्ष और स्थानीय सांसद ओम बिरला से भी इस गंभीर मामले में सकारात्मक रुख अपनाते हुए तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है.

लाखेरी के उपखंड अधिकारी सुरेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि आजादी से पहले की सीमेंट फैक्ट्री है. प्रशासन से उन्होंने कारण जानने की कोशिश की थी, यहां पर ज्यादातर एम्पलाई है, जो प्लांट के निदेशक लोकेश श्रीमाली उनका भी स्थानांतरण कहीं और कर दिया. शुरुआती तौर पर कारण उन्हें यही बताए गए हैं कि इस प्लांट में ईंधन (Fuel) के रूप में जिस कोयले (Coal) का इस्तेमाल किया जाता था. ईरान अमेरिका युद्ध की वजह से जहाजों (Cargo) के जरिए आने वाला कोयला (Coal) महंगा पड़ रहा है. दूसरी तरफ किशनगढ़ मार्बल के जरिए भी कुछ कच्चा माल आता था, वह भी दूरी ज्यादा होने से महंगा पड़ रहा है. अन्य कच्चा माल की लागत भी बढ़ गई है. प्लांट के पुराने होने के चलते कॉस्टिंग ज्यादा आ रही है. अन्य जगहों पर प्लांट में सीमेंट की लागत कम है. इसलिए प्लांट से प्रॉफिट नहीं हो रहा है, हालांकि यहां पर सब एम्पलाई है, प्लांट के संबंध में निर्णय लेने वाले अधिकारी बाहर बैठते हैं. प्लांट में एम्पलाई की संख्या कम की गई थी, वर्तमान में 200 के आसपास स्थाई कार्मिक और 800 के आसपास अस्थाई मजदूर है.

एशिया की सबसे पहले लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री में प्रोडक्शन बंद
एशिया की सबसे पहले लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री में प्रोडक्शन बंद (फोटो ईटीवी भारत कोटा)

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लागत और खनन को बात रहे कारण : सीमेंट फैक्ट्री के कामगार संघ के अध्यक्ष कुमार आशुतोष का कहना है कि कॉस्टिंग और खान के चालू नहीं होने का हवाला देकर उत्पादन बंद किया हुआ है. करीब 125 के आसपास स्थाई कार्मिक है, वही 750 मजदूर भी फैक्ट्री में काम करते हैं. इसके चलते करीब 10000 से ज्यादा लोगों इस पर निर्भर है, क्योंकि इस फैक्ट्री से करीब 2000 के आसपास परिवारों का रोजी रोटी चलता है. कार्मिकों के अलावा, सप्लायर और अन्य सभी लोग भी इससे जुड़े हुए हैं. लाखेरी कस्बे की पूरी अर्थव्यवस्था इसी फैक्ट्री के चलते ठप है. ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े वाहन चालकों, लोडिंग-अनलोडिंग मजदूरों, होटल ढाबा संचालकों और छोटे दुकानदारों के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

फैक्ट्री और खान को EC नहीं मिलना झूठ- विधायक शर्मा : बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा का कहना है कि बूंदी जिले के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्ट्री को बंद किया जा रहा है. अप्रैल माह से ही प्रोडक्शन बंद है, झूठे बहाने बनाए जा रहे हैं. विधायक हरिमोहन शर्मा ने फैक्ट्री बंद होने के पीछे के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि यह कहना कि फैक्ट्री और उससे जुड़ी खदान को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी या पर्यावरण स्वीकृति (EC) नहीं मिली है, पूरी तरह से असत्य, तर्कहीन और विवेकहीन है. यह सिर्फ फैक्ट्री बंद करने का एक बहाना है. इस फैक्ट्री ने लाखेरी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी. यहां की सड़कें, स्कूल, अस्पताल और सर्किट हाउस सब इसी उद्योग की देन हैं. इसे किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने दिया जाएगा.

कार्मिक और मजदूरों में रोजगार का संकट
कार्मिक और मजदूरों में रोजगार का संकट (फोटो ईटीवी भारत कोटा)

स्पीकर ओम बिरला करें हस्तक्षेप : सीएल प्रेमी का कहना है कि एशिया की सबसे पुरानी फैक्ट्री है. हम बूंदी जिले के तीनों कांग्रेस विधायक विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार हो गए हैं. जिनमें हरिमोहन शर्मा और अशोक चांदना भी शामिल है. कांग्रेस एक जून को इसका विरोध प्रदर्शन कलेक्ट्रेट पर करेंगे. बूंदी जिले के लोगों को शामिल होना चाहिए. प्रेमी का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी इस संबंध में पूरे मामले को पोजिटिव लेते हुए हस्तक्षेप करना चाहिए और फैक्ट्री को चालू करवाना चाहिए.

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लाखेरी के लिए यह फैक्ट्री मां समान है : पूर्व विधायक और भाजपा नेता चंद्रकांता मेघवाल का कहना है कि मैनेजमेंट की बहुत बड़ी खामी रही है, इसके चलते 2 महीने से उत्पादन सीमेंट फैक्ट्री में बंद है.​चंद्रकांता मेघवाल ने सीधे तौर पर ग्रुप के स्थानीय मैनेजमेंट की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा यह फैक्ट्री प्रबंधन की बहुत बड़ी प्रशासनिक खामी और हठधर्मिता है. यह उनका कोई निजी खिलौना नहीं है जिसे जब चाहे शुरू कर दें और जब चाहे बंद कर दें. लाखेरी के लोगों का इस फैक्ट्री के साथ मां-बेटे का रिश्ता है. यह यहां की जीवनदायिनी है. पिछले 50 सालों में इसी प्लांट ने कंपनी को अरबों रुपये का मुनाफा कमा कर दिया है, आज अगर थोड़ा नफा-नुकसान हो भी रहा है, तो इस तरह अचानक ताला नहीं जड़ा जा सकता. ​मेघवाल ने फैक्ट्री प्रबंधन को नसीहत दी है कि वे अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत जनप्रतिनिधियों के साथ टेबल पर बैठें, संवाद करें और जो भी तकनीकी या वित्तीय समस्या है, उसे राज्य और केंद्र सरकार के सामने रखें ताकि इसका कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके.

लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री में उत्पादन ठप
लाखेरी सीमेंट फैक्ट्री में उत्पादन ठप (फोटो ईटीवी भारत कोटा)

ट्रांसपोर्टेशन से लेकर मजदूर तक प्रभावित : दो माह से ज्यादा समय से उत्पादन बंद होने के बाद अब क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक संकट गहराने लगा है. फैक्ट्री बंद होने से सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों, ठेका श्रमिकों, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है. मजदूरों के सामने परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, वहीं कई श्रमिक रोजगार की तलाश में लाखेरी छोड़कर दूसरे शहरों न की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं. अब इस मामले में फैक्ट्री में उत्पादन दोबारा शुरू करने की मांग तेज हो गई है.

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अब मजदूरों की हालत देखकर रोना आ रहा : कामगार यूनियन अध्यक्ष कुमार आशुतोष ने बताया कि कि फैक्ट्री प्रबंधन और सरकार की ओर से उत्पादन शुरू करने को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा, जिससे हजारों परिवारों में चिंता और बढ़ गई है. उन्होंने बताया कि अब तक हम चुप थे, लेकिन अब मजदूरों की हालत देखकर रोना आ रहा है. हजारों लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने बताया कि हम इस मुद्दे को लेकर मुंबई में फैक्ट्री के उच्च अधिकारियों की बैठक में भी गए थे. हमने उनके सामने हाथ जोड़े, मिन्नतें की कि हजारों परिवारों के चूल्हे इस फैक्ट्री से जलते हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.

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फैक्ट्री बंद होने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बिगड़ गई : ​मजदूर महासभा के जिलाध्यक्ष अब्दुल गफूर ने बताया कि इस फैक्ट्री के बंद होने का असर केवल इसके कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि समूचे लाखेरी कस्बे पर पड़ा है. यह कस्बा इस फैक्ट्री की बदौलत ही जिंदा था. आज स्थिति यह है कि ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े सैकड़ों वाहन चालक, लोडिंग-अनलोडिंग करने वाले पल्लेदार, ढाबा-होटल संचालक, किराना व्यापारी और छोटे-मोटे रेहड़ी-पटरी वालों का धंधा पूरी तरह ठप हो चुका है. लोग अब पलायन करने को मजबूर हैं. इस विषय में सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए, नहीं तो हजारों मजदूर परिवारों के आगे बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है. क्षेत्र के सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और मजदूर हितैषी लोगों ने अब सरकार और प्रशासन से हस्तक्षेप कर फैक्ट्री में उत्पादन शुरू कराने की मांग तेज कर दी है.

Last Updated : May 29, 2026 at 11:04 AM IST