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कुशीनगर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 'गौ हत्यारों का पैसा और वोट गौ सेवकों के साथ नहीं चल सकता'

कुशीनगर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 'गविष्टि यात्रा' का स्वागत किया गया. इस प्रोग्राम में सपा नेता सक्रिय दिखे.

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गौ रक्षा के मुद्दे पर शंकराचार्य का सत्ता पर तंज, बोले- सत्ता में आने के बाद भूल गए गौ सेवा. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 4, 2026 at 5:10 PM IST

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कुशीनगर: कुशीनगर में सोमवार को ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा शुरू की गई ‘गविष्टि यात्रा’ का जोरदार स्वागत हुआ. यात्रा के स्वागत के दौरान स्वामी जी ने गौ संरक्षण पर अपने विचार साझा किए और उपस्थित जनसमूह को गौ रक्षा की शपथ भी दिलाई. हाटा विधानसभा के कप्तानगंज चौराहे पर यात्रा का स्वागत किया गया.

वहां पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह ने अपने समर्थकों के साथ शंकराचार्य पर पुष्प वर्षा की. इस कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भागीदारी और भाजपा की दूरी ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 'गविष्टि यात्रा' का स्वागत. (Video Credit: ETV Bharat)

गौ रक्षा के मुद्दे पर शंकराचार्य का सत्ता पर तंज: शंकराचार्य ने गौ संरक्षण के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग गौ रक्षा के नाम पर सत्ता में आए, आज वही गौ हत्यारों से चंदा और वोट ले रहे हैं. उन्होंने बिना किसी दल का नाम लिए सीधा निशाना साधा और आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद गौ संरक्षण के मूल मुद्दों पर समझौता किया जा रहा है. शंकराचार्य ने गौशालाओं की दयनीय स्थिति पर भी सवाल उठाए और शासन-प्रशासन में पारदर्शिता की भारी कमी का आरोप लगाया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि गौ हत्यारों का पैसा और वोट गौ सेवकों के साथ कभी नहीं चल सकता है.

सपा नेता सक्रिय दिखे: पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह ने सनातन समाज की भावनाओं का समर्थन करते हुए राजनीति से ऊपर उठकर गौ माता को राष्ट्र पशु घोषित करने की पुरजोर मांग की. कार्यक्रम में सपा से जुड़े कई प्रमुख चेहरों की मौजूदगी और स्वागत में उनकी सक्रियता ने इस धार्मिक यात्रा को एक राजनीतिक रंग दे दिया है. यद्यपि शंकराचार्य ने समाजवादी पार्टी द्वारा गौ संरक्षण पर कोई ठोस घोषणा न करने की बात भी कही, लेकिन कुंभ विवाद के समय समर्थन देने के लिए उन्होंने सपा का धन्यवाद भी किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में सपा की रणनीति और धार्मिक मुद्दों पर उसके रुख को लेकर कई सवाल खड़े कर सकता है.

गौ माता को राष्ट्र पशु घोषित करने की मांग: भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई यह यात्रा जिले के अन्य क्षेत्रों की ओर रवाना हो गई है. कार्यक्रम के दौरान एक बार बारिश ने व्यवधान जरूर डाला, लेकिन इसने यात्रा के महत्व को कम नहीं किया. कुशीनगर में यात्रा का यह पड़ाव धार्मिक मर्यादाओं के साथ-साथ एक बड़ा सियासी संदेश देने वाला साबित हुआ है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शंकराचार्य के इन तीखे बयानों का भविष्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है.

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