कुरुक्षेत्र में किसानों का एलान-ए-जंग, भ्रष्टाचार के खिलाफ भाकियू चढूनी का शक्ति प्रदर्शन, सरकार को दी चेतावनी
कुरुक्षेत्र में भाकियू चढूनी ने भ्रष्टाचार के विरोध में प्रदर्शन कर सरकार को चेतावनी दी.

Published : January 10, 2026 at 3:54 PM IST
कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र की जाट धर्मशाला में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी ग्रुप) के किसानों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. भाकियू चढूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए जाट धर्मशाला से लघु सचिवालय तक मार्च निकाला. इस दौरान किसानों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा.
प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान: इस दौरान गुरनाम सिंह चढूनी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, " भारतीय किसान यूनियन प्रदेश में फैले महाभ्रष्टाचार के खिलाफ एक संगठित आंदोलन चला रही है. सरकार की नीतियों के चलते धान घोटाला, स्कूलों की लूट, अस्पतालों में भ्रष्टाचार, आयात कर, बिजली बिल और बीज बिल जैसे गंभीर मुद्दे लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इन्हीं विषयों को लेकर प्रदेश के हर जिले में प्रदर्शन किए जा रहे हैं."

आंदोलन का अगला कार्यक्रम घोषित: चढूनी ने आंदोलन की आगामी रणनीति की जानकारी देते हुए बताया कि, "16 जनवरी को यमुनानगर और 20 जनवरी को कैथल में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होंगे. इसके अलावा शहीद भगत सिंह की जयंती पर 23 मार्च को पिपली में एक विशाल किसान रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेशभर के किसान शामिल होकर निर्णायक लड़ाई का ऐलान करेंगे."
5 हजार करोड़ के धान घोटाले का आरोप: गुरनाम सिंह चढूनी ने प्रदेश में करीब 5 हजार करोड़ रुपये के कथित धान घोटाले का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि, "मंडियों में किसानों को सरेआम लूटा गया और अधिकारियों व कारोबारियों की मिलीभगत से यह घोटाला किया गया." उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके.
उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों पर सवाल: चढूनी ने सवाल उठाते हुए कहा कि, "जब प्रदेश में केवल 40 लाख टन धान का उत्पादन हुआ, तो फिर 62 लाख टन धान की बिक्री कैसे दिखाई गई. यह आंकड़े अपने आप में बड़े घोटाले की ओर इशारा करते हैं और इसमें शामिल लोगों ने मोटी रिश्वत ली है."
किसानों के साथ अन्याय का आरोप: चढूनी ने आगे कहा कि, "सरकार बड़े पूंजीपतियों के कर्ज माफ कर रही है, जबकि छोटे और गरीब किसानों को नजरअंदाज किया जा रहा है. आज प्रदेश में बड़ी कंपनियों का राज है और कृषि के साथ-साथ शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है."
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