छलड़ी के साथ कुमाऊंनी होली का भव्य समापन, होल्यारों ने जमाया रंग, रंगीन हुआ माहौल
होल्यारों ने शास्त्रीय रागों पर आधारित कुमाऊंनी होली गाकर माहौल को भक्तिमय और रंगीन बना दिया

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : March 4, 2026 at 5:19 PM IST
रामनगर: पहाड़ों की समृद्ध संस्कृति और लोकपरंपरा का सबसे जीवंत पर्व होली आज रामनगर में पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया. यहां होली का रंग कुछ अलग ही नजर आया. रामनगर में आज ‘छलड़ी’ के साथ पारंपरिक कुमाऊंनी होली का विधिवत समापन हुआ. सुबह से ही होल्यारों की टोलियां ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की मधुर धुन पर घर-घर पहुंचीं. लोगों को रंग व अबीर-गुलाल से सराबोर कर दिया.
दरअसल, कुमाऊं क्षेत्र में होली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि करीब तीन महीनों तक चलने वाला सांस्कृतिक उत्सव है. पौष माह के पहले रविवार से इसकी शुरुआत होती है. इसके बाद बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली जैसे विभिन्न रंगों से गुजरते हुए यह पर्व छलड़ी के दिन अपने चरम पर पहुंचता है. रामनगर के पहाड़ी प्रवासी मोहल्लों में इस परंपरा को बेहद जीवंत रूप में देखा गया.
यहां रहने वाले प्रवासी परिवारों ने गांव की विरासत को आगे बढ़ाने की जो ललक दिखाई, वह खास रही। बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए. होल्यारों ने शास्त्रीय रागों पर आधारित कुमाऊंनी होली गाकर माहौल को भक्तिमय और रंगीन बना दिया. कहीं भक्ति रस की होली गूंजती रही तो कहीं श्रृंगार रस के गीतों ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया.
जगह-जगह लोगों ने होल्यारों की टोलियों का स्वागत किया. एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं. इस दौरान आपसी भाईचारा और सामूहिक सहभागिता साफ दिखाई दी. होल्यारों का कहना है कि यह पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, प्रेम और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का अवसर भी है. आयोजकों ने बताया पिछले तीन महीनों से लगातार होली गायन के कार्यक्रम चल रहे थे. आज छलड़ी के साथ इसका समापन किया गया. रामनगर में मनाई गई यह पारंपरिक होली इस बात का प्रमाण है कि चाहे लोग पहाड़ से दूर क्यों न हों, अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से उनका जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है.
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