एक ही पत्थर से बना है हिमाचल का ये अद्भुत शिव मंदिर, पांडवों से जुड़ा इतिहास, जानें पुरातत्व विभाग क्यों करता है निगरानी?
नागर शैली में बनाया गया ये अद्भुत मंदिर, अपनी पत्थर की नक्काशी और चमत्कारिक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है. बालकृष्ण शर्मा की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 15, 2026 at 7:32 PM IST
|Updated : August 15, 2026 at 7:42 PM IST
कुल्लू: श्रावण मास के अवसर पर देश भर के शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है. भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों द्वारा भगवान का विशेष पूजन अर्चन किया जा रहा है. वहीं, हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा शिव मंदिर है, जो इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का विशेष केंद्र बना हुआ है. कुल्लू जिले के बजौरा में आठवीं शताब्दी में बने भगवान शिव के मंदिर में श्रावण मास पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. धार्मिक मान्यता है कि पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान सिर्फ एक पत्थर को काटकर इस पूरे मंदिर को बनाया गया है. यहां श्रावण मास में रोजाना सुबह और शाम को श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं.
विश्वेश्वर महादेव मंदिर की धार्मिक मान्यता
ये पौराणिक शिव मंदिर जिला कुल्लू के बजौर में स्थित है. जिसे विश्वेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर सूरत ठाकुर ने बताया कि धार्मिक मान्यता के मुताबिक अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने विश्वेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया था. यह पूरा मंदिर एक पत्थर से ही बना हुआ है. भगवान शिव के इस मंदिर में उकेरी गई नक्काशी आज भी उत्कृष्ट कलाकारी को दर्शाती है. यह मंदिर अब भारतीय सर्वेक्षण एवं पुरातत्व विभाग के अधीन है. यह मंदिर इस क्षेत्र की आस्था का केंद्र है. हर साल यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं. विश्वेश्वर महादेव मंदिर कुल्लू जिले के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है. यह धार्मिक स्थल अपनी पत्थर की नक्काशी, चमत्कारिक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है.
"यह मंदिर काफी प्राचीन है. यहां सावन माह और शिवरात्रि के दिन श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर का निर्माण नागर शैली में हुआ है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि पांडव जब अज्ञातवास पर हिमालय की यात्रा कर रहे थे, उस दौरान पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण किया है. वहीं, आसपास के इलाके में खुदाई करने पर भी यहां पर बड़ी-बड़ी शिलाएं मिली हैं. जिन्हें पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित कर लिया गया है." - लक्ष्मी चंद ठाकुर, श्रद्धालु, पांगी

पुरातत्व विभाग का स्पष्टीकरण
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर सूरत ठाकुर ने बताया कि 'बजौरा का विश्वेश्वर महादेव मंदिर काफी प्राचीन है. मान्यता के अनुसार इस पांडवों के द्वारा अज्ञातवास में बनाया गया है, लेकिन जब पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर के आसपास की खुदाई की गई थी, तो उस दौरान भी कई पुरानी मूर्तियां और पत्थर यहां पर मिले थे. ऐसे में पुरातत्व विभाग द्वारा ये साफ किया गया है कि यह मंदिर आठवीं शताब्दी में बना हुआ है, क्योंकि मंदिर को नागर शैली में बनाया गया है और आठवीं शताब्दी में ही राजा महाराजाओं द्वारा इस तरह की शैली का उपयोग किया जाता था. ऐसे में इस मंदिर को अब पुरातत्व विभाग द्वारा सुरक्षित किया गया है. हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शनों के लिए यहां पर आते हैं.'

मंदिर में स्थित हैं कई अन्य छोटे-छोटे मंदिर
विश्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी स्थित हैं, जो विभिन्न देवताओं को समर्पित हैं. यहां हिंदू देवता भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, स्त्री शक्ति की अवतार माता दुर्गा और भगवान गणेश की लघु मूर्तियों के भी दर्शन होते हैं. यहां पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. खासकर महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि जो भी श्रद्धालु भगवान शिव के दरबार में सच्चे मन से दर्शन करने के लिए आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

"मैंने इस मंदिर के बारे में काफी सुना था और आज मैं अपने दोस्तों के साथ इस मंदिर में भगवान शिव का दर्शन करने के आई हूं. मंदिर में असीम शांति का एहसास हो रहा है. भगवान शिव से प्रार्थना करती हूं कि मेरे परिवार के साथ-साथ सभी लोगों को सुख शांति प्रदान करें." - शिवांगी, श्रद्धालु

'मंदिर में मिलती है असीम शांति'
कुल्लू से आई महिला श्रद्धालु स्नेह लता का कहना है कि वह हर साल इस मंदिर में दर्शनों के लिए आती हैं. इस मंदिर की नक्काशी काफी अच्छी है और मंदिर में आकर उन्हें काफी शांति मिलती है. वह श्रावण मास के साथ-साथ शिवरात्रि के अवसर पर भी यहां भगवान शिव के दर्शनों के लिए पहुंचती है. इसके अलावा जिला कुल्लू के साथ-साथ अन्य इलाकों से भी भारी संख्या में लोग यहां भगवान शिव के दर्शनों के लिए आते हैं. महिला श्रद्धालु विमला ठाकुर का कहना है कि वह भी श्रावण मास के चलते भगवान शिव के दर्शनों के लिए आई है. इससे पहले उन्होंने बिजली महादेव का आशीर्वाद लिया और बजौरा में विश्वेश्वर महादेव महादेव के बारे में भी उन्होंने काफी लोगों से सुना था. ऐसे में आज उन्होंने यहां पर भगवान शिव का पूजन अर्चन किया है. कुल्लू से आए श्रद्धालु प्रदीप मोदगिल ने बताया कि मान्यता है कि यह मंदिर पांडवों द्वारा तैयार किया गया है. ऐसे में आज भी लोगों की इस मंदिर के प्रति काफी श्रद्धा है. इस मंदिर की देखरेख पुरातत्व विभाग द्वारा की जाती है.

14 दिन में पूरी की हरिद्वार से बजौरा कांवड़ यात्रा
विश्वेश्वर महादेव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक श्रद्धालु द्वारा हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया. जिला कुल्लू भुंतर तहसील के तहत आने वाले तेगुबेहड़ गांव के निवासी विनोद कुमार ने हरिद्वार से 14 दिन में 440 किलोमीटर पैदल कांवड़ यात्रा पूरी की. इस दौरान शिव भक्त विनोद का बजौरा के प्राचीन शिव मंदिर विश्वेश्वर महादेव में अन्य भक्तों के द्वारा स्वागत किया गया. विनोद कुमार ने परिवार सहित पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का पवित्र गंगा जल से जलाभिषेक भी किया.

बजौरा शिव मंदिर में पहली बार पहुंचा कांवड़ यात्री
पहली बार हरिद्वार में कांवड़ लेने गए श्रद्धालु विनोद कुमार ने कहा कि वो 28 जुलाई को बस पकड़ कर सीधे हरिद्वार पहुंचे थे और 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन गंगा से जल भरकर अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की थी. 14 दिन बाद वो बजौरा विश्वेश्वर महादेव के मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने परिवार के साथ महादेव का गंगा जल के साथ जलाभिषेक भी किया. विनोद कुमार ने बताया कि कांवड़ यात्रा के लिए 2 साल पहले मन बनाया था, लेकिन वो उस दौरान नहीं जा पाए थे, लेकिन इस बार भगवान भोले के बुलावे पर उन्होंने कांवड़ यात्रा पूरी की है. उन्होंने बताया कि इससे पहले उनके क्षेत्र से किसी ने कांवड़ यात्रा नहीं की है. इस यात्रा का उद्देश्य था कि भगवान शिव हिमाचल को इस साल आपदा से होने वाले नुकसान से बचाएं.
"इतिहास में पहली बार हरिद्वार से बजौरा विश्वेश्वर महादेव में कांवड़ यात्री पहुंचा है. जिसने 14 दिन की पैदल कांवड़ यात्रा के बाद मंदिर में पवित्र गंगा जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया. विश्वेश्वर शिव मंदिर बजौरा का निर्माण पांडवों ने एक ही रात में किया था. इस प्राचीन शिव मंदिर के प्रति लोगों में गहरी आस्था है." - राम शर्मा, पुजारी, विश्वेश्वर महादेव मंदिर बजौरा

