25000 की आबादी, 15 पंचायतें और सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे ये सरकारी अस्पताल, इलाज के लिए भटक रहे हजारों लोग
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में अस्पताल खुद बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 26, 2026 at 5:36 PM IST
कुल्लू: कुल्लू जिले की सैंज घाटी में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ गई हैं. क्षेत्र के एकमात्र सैंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी के कारण 15 पंचायतों की करीब 25 हजार आबादी रामभरोसे है. अस्पताल में शाम 4 बजे के बाद ताला लटक जाता है, जिससे मरीजों को रात के समय आपातकालीन इलाज नहीं मिल पाता है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर रात के समय किसी मरीज की तबीयत खराब हो जाए तो उन्हें करीब 50 किलोमीटर दूर कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल ढालपुर जाना पड़ता है. ऐसे में पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए समय पर इलाज मिलना बड़ी चुनौती बन गया है.
एक डॉक्टर के सहारे चल रहा अस्पताल
सैंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टरों की तैनाती की गई है, लेकिन वर्तमान में दोनों डॉक्टर छुट्टी पर चल रहे हैं. इसके चलते अस्पताल की जिम्मेदारी फिलहाल डेपुटेशन पर आए एक डॉक्टर के सहारे चल रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में डॉक्टर के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी बनी हुई है. कई बार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद कुल्लू रेफर कर दिया जाता है. इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं.
2022 में मिला था सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा
सैंज अस्पताल पहले एक डिस्पेंसरी के रूप में संचालित होता था. वर्ष 2022 में इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया था. इसके साथ ही यहां 50 बिस्तरों वाला अस्पताल बनाने और करीब 25 पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की घोषणा की गई थी. हालांकि घोषणा के बाद भी अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई. डॉक्टरों की नियुक्ति को लेकर आदेश तो जारी होते रहे, लेकिन अन्य जरूरी पद अब भी खाली पड़े हैं. रात्रिकालीन स्वास्थ्य सेवा भी अभी तक शुरू नहीं हो पाई है.
ग्रामीणों ने उठाई स्टाफ बढ़ाने की मांग
सैंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष झाबे राम ने कहा कि क्षेत्र की हजारों आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन वर्तमान में अस्पताल खुद सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है. उन्होंने कहा कि अगर रात के समय कोई आपात स्थिति आती है तो लोगों को लंबा सफर तय कर कुल्लू जाना पड़ता है. उन्होंने सरकार से मांग की कि सैंज अस्पताल में जल्द डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए और रात्रिकालीन सेवाएं शुरू की जाएं.
देवगढ़ गोही पंचायत के प्रधान दीवान नेगी ने कहा कि अस्पताल में एक ही डॉक्टर होने के कारण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल का दर्जा बढ़ाया गया है तो उसी हिसाब से सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जानी चाहिए. उन्होंने पैरामेडिकल स्टाफ के खाली पदों को जल्द भरने की मांग की, ताकि लोगों को इलाज के लिए कुल्लू का रुख न करना पड़े. वहीं दुशाहड़ पंचायत के प्रधान सुखदयाल राणा ने कहा कि सैंज घाटी में कई बड़े बिजली प्रोजेक्ट संचालित हैं. उन्होंने मांग की कि सीएसआर और लाडा फंड के माध्यम से भी अस्पताल की सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए.
स्वास्थ्य विभाग ने जल्द सुधार का दिया भरोसा
कुल्लू के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रंजीत ठाकुर ने बताया कि सैंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में दो डॉक्टरों की तैनाती की गई है और जल्द ही अन्य सुविधाओं को भी बेहतर करने के प्रयास किए जाएंगे.
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