पार्वती प्रोजेक्ट टनल लीकेज 10 साल बाद बंद, बिजली उत्पादन बंद होने से NHPC को हर दिन एक करोड़ का हुआ नुकसान
पार्वती जल विद्युत परियोजना से चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बिजली की आपूर्ति.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : April 25, 2026 at 10:31 AM IST
|Updated : April 25, 2026 at 2:50 PM IST
कुल्लू: ऊर्जा उत्पादन की बढ़ोतरी में मील का पत्थर साबित हुई जिला कुल्लू की पार्वती जल विद्युत परियोजना टनल में हो रहे लीकेज पर एनएचपीसी ने 10 साल बाद सफलता हासिल की है. करीब सात किलोमीटर लंबी इस अंडरग्राउंड टनल में दक्षिण भारत की कंपनी ने टनल की लीकेज की खोज शुरू की. तीन महीने बाद ही प्रोजेक्ट में पॉन्ड लाइंस वॉटर प्रूफ जिओ मेंबरन तकनीक से लीकेज की समस्या ढूंढ कर अब खत्म कर दिया है. एनएचपीसी द्वारा किए गए इस प्रयास से जहां प्रबंधन में खुशी की लहर है. वहीं, टनल में लीकेज बंद होने के बाद अब प्रोजेक्ट में ऊर्जा उत्पादन भी शुरू हो गया है.
10 साल बाद पार्वती प्रोजेक्ट टनल लीकेज बंद
करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से जहां चेन्नई की कंपनी ने टनल में आई लीकेज को खत्म करने के लिए दिन रात काम किया और अब कंपनी ने पिछले एक दशक से आ रही लीकेज की समस्या का स्थाई समाधान भी ढूंढ लिया है. प्रोजेक्ट की टनल में लीकेज को रोकने के लिए परियोजना प्रबंधन ने कई बार करोड़ों रुपए खर्च किए. लेकिन, हर बार टनल की लीकेज परियोजना के लिए आफत बनी रही.

देश की कई कंपनियों ने की लीकेज बंद करने की कोशिश
देश की कई नामी गिरामी कंपनियों ने लीकेज को रोकने के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन, हर बार असफलता मिली. ऐसे में इस बार दक्षिण भारत की कंपनी ने लीकेज रोकने को हाथ आजमाए और कंपनी ने विदेशी इंजीनियरों के साथ अंधेरी टनल में तकनीकी फॉल्ट ढूंढने में सफल रही. सैकड़ों मजदूरों की मौजूदगी में इंजीनियरों का दल बाधा से निपटने के लिए बारीकी से अध्ययन करता रहा.
पार्वती पावर स्टेशन से 520 मेगावाट बिजली उत्पादन
प्रबंधन के अनुसार, पार्वती पावर स्टेशन में अप्रैल 2014 से 520 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है. टनल की लीकेज को रोकने के लिए प्रबंधन ने तीन माह के लिए शट डाउन लिया है और NHPC को रोजाना एक करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा है. वहीं, प्रदेश सरकार को भी मिलने वाले 12 फीसदी राजस्व पर भी विराम लग गया था. यह परियोजना चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश को बिजली की आपूर्ति करके उनकी कमी को पूरा कर रही हैं.
लीकेज बंद करने में 20 करोड़ का खर्चा
इससे पहले प्रोजेक्ट प्रबंधन के द्वारा टनल की लीकेज रोकने के लिए चार बार प्रयास किए गए और करीब 10 करोड रुपए की राशि खर्च की गई. लेकिन, हर बार प्रोजेक्ट प्रबंधन को असफलता ही हाथ मिला. वहीं, टनल में लीकेज के चलते इस सपंगानी की पहाड़ी से पानी की धारा जगह-जगह फूट रही थी और इससे सड़क से गुजरने वाले वाहनों के लिए भी खतरा बना हुआ था. लेकिन, अब प्रोजेक्ट प्रबंधन की मेहनत से लीकेज पर काबू पा लिया गया है.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी आधारशीला
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 12 दिसंबर 1999 को इसकी आधारशिला रखी थी और निर्माण कार्य 2001 में शुरू हुआ था. शुरुआत में एनएचपीसी ने 2007 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन निर्माण के दौरान कई समस्याओं के कारण यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका. निर्माण कार्य में देरी के कारण लागत में भी वृद्धि हुई और साल 2025 में इसका कार्य पूरा हुआ. वर्तमान में परियोजना स्थल पर बिजली उत्पादन के परीक्षण चल रहे हैं. जहां 200 मेगावाट क्षमता के चार टर्बाइन स्थापित किए गए हैं, जिन्हें बारी-बारी से चलाया जा रहा है.
पार्वती पावर स्टेशन में ऊर्जा उत्पादन शुरू
प्रोजेक्ट की हेड रेस टनल और अन्य साइट्स के निर्माण कार्यों में संतोष जनक परिणाम आए हैं. प्रोजेक्ट में चुनौती बनी हेड रेस टनल में लीकेज की समस्या को नई तकनीक के साथ गंभीरता से मरम्मत किया और सकारात्मक परिणाम आते ही पावर हाउस में ऊर्जा उत्पादन शुरू कर दिया है. -सुधीर कुमार नेगी, महाप्रबंधक प्रभारी, पार्वती पावर स्टेशन
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