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ड्राई स्पेल में खेती की चुनौती, मौसम की मार से बचाएंगे ये उपाय

गेहूं, आलू और सब्जियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक ने सलाह दी.

Tips for farming during dry spell
ड्राई स्पेल में खेती करने को लेकर वैज्ञानिकों ने दिए उपाय (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 21, 2025 at 12:15 PM IST

4 Min Read
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सिरमौर: हिमाचल प्रदेश सहित जिला सिरमौर में ड्राई स्पैल दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है. इंद्रदेव की मेहरबानी न होने से किसान भी आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं. बारिश न होने से फसलों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है. लिहाजा इस ड्राई स्पैल में खेती किसानों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और उन्नत कृषि विधियों को अपनाकर किसान मौसम की इस मार से अपनी फसलों की सुरक्षा कर सकते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर (धौलाकुआं) ने दिसंबर माह के इस पखवाड़े के लिए कृषि कार्यों को लेकर किसानों का मार्गदर्शन किया है.

अपनाएं ये उन्नत कृषि विधियां

कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर (धौलाकुआं) के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि इस मौसम में उन्नत कृषि विधियों को अपनाने से किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है.

  • प्रदेश के निचले क्षेत्रों में जहां पर गेहूं की बुआई नवम्बर माह में की गई हो और खरपतवारों में 2-3 पत्तियां आ गई हों, तो खरपतवार नियंत्रण के लिए वेस्टा (मेटसल्फयूरॉन मिथाइल 20 डब्ल्यूपी क्लोडिनाफॉप प्रोपार्जिल 15 डब्ल्यूपी) 16 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी या क्लोडिनाफॉप की 24 ग्राम (10 डब्ल्यूपी) या 16 ग्राम (15 डब्ल्यूपी) व 2, 4-डी की 50 ग्राम मात्रा 30 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
  • 2, 4-डी का छिड़काव, क्लोडिनाफॉप के छिड़काव के 2-3 दिन के बाद करें.
  • अगर गेहूं के साथ चौड़ी पत्ती वाली फसल की खेती की गई हो तो 2, 4-डी रसायन का प्रयोग न करें.
  • इसके अलावा दलहनी एवं तिलहनी फसलों में अगर खरपतवार नियंत्रण के लिए रसायन का प्रयोग न किया गया हो, तो यह समय इन फसलों में निराई-गुड़ाई करने का है.
Tips for farming during dry spell
फसलों की देखभाल को लेकर विज्ञानिकों ने दी सलाह (ETV Bharat)

आलू की इन किस्मों का करें चयन

डॉ. मित्तल ने बताया कि आलू की किन किस्मों की चयन करें.

  • मध्यवर्ती क्षेत्रों में आलू की बुआई के लिए उन्नत किस्मों जैसे कुफरी ज्योति, कुफरी गिरीराज, कुफरी चन्द्रमुखी इत्यादि का चयन करें.
  • बुआई के लिए स्वस्थ, रोग रहित, साबुत या कटे हुए कंद, वजन लगभग 30 ग्राम, जिनमें कम से कम 2-3 आंखें हों का प्रयोग करें.
  • बुआई से पहले कंदों को डाइथेन एम-45 (25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी) के घोल में 20 मिनट तक उपचारित करें.
  • कंद को छाया में सुखाने के बाद अच्छी तरह से तैयार खेत में 45-60 सेंटीमीटर पंक्तियों की दूरी एवं 15-20 सेंटीमीटर के अंतर पर बुआई करें.
  • आलू में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राटाफ 60 ग्राम या एरेलान ध्यामिलोन 70 ग्राम या गोल 40 मिलीलीटर को 30 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है.

प्याज की ऐसे करें रोपाई? इन सब्जियों की निराई-गुड़ाई

डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि प्रदेश की निचले एवं मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में प्याज की तैयार पौध की रोपाई 15-20 सेंटीमीटर पंक्तियों और 5-7 सेंटीमीटर पौधे से पौधे की दूरी पर करें. रोपाई के उपरांत खेतों में हल्की सिंचाई करें. इसके अलावा खेतों में लगी हुई सभी प्रकार की सब्जियों जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, गांठ गोभी, ब्रोकली, चाइनीज बंद गोभी, पालक, मेथी, मटर व लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई करें.

Tips for farming during dry spell
मौसम की मार से फसलों को कैसे बचाएं ? (ETV Bharat)

ऐसे किया जा सकता है फसलों का संरक्षण

उन्होंने बताया कि सरसों वर्गीय तिलहनी फसलों अथवा गोभी वर्गीय सब्जियों में तेले या एफिड के नियंत्रण के लिए मैलाथियान 50 ईसी 30 मिलीलीटर/30 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. गोभी वर्गीय सब्जी फसल में एफिड एवं कैटरपिलर के नियंत्रण के लिए मैलाथियान 50 ईसी की 30 मिलीलीटर रसायन को 30 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इससे फसलों का संरक्षण किया जा सकता है.

सुंडी के प्रकोप से रहें सावधान

डॉ. मित्तल ने बताया कि किसान चने की फसल में फली छेदक सुंडी के प्रकोप के प्रति सावधान रहें. हरे रंग की सुंडियां फसल पर प्रकट होते ही साइपरमेथ्रिन 1 मिलीलीटर पानी का छिड़काव करें और चने की सुंडी के लिए फेरोमोन ट्रैप के 25 ट्रैप/हेक्टेयर लगाएं. अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग या फिर कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया जा सकता है.

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