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2026 में कोटा को मिलेंगी सौगातें : दिल्ली-मुंबई का एक्सप्रेसवे से सीधा सफर, ट्रेन से 160 की स्पीड...सबसे लंबा ब्रिज व रिंग रोड भी

कोटा के लिए भी कई माइनो में खास रहने वाला है साल 2026. सड़क और रेल स्पीड के मामले में नई गति मिलने वाली है.

Eight Lane Tunnel
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बन रही आठ लेन की टनल (Source : NHAI)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 31, 2025 at 4:56 PM IST

8 Min Read
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कोटा: देशभर में नए साल के जश्न मनाया जा रहे हैं और साल 2026 कोटा के लिए भी कई माइनो में खास रहने वाला है. कोटा को सड़क और रेल स्पीड के मामले में एक नई गति मिलने वाली है. जिनमें दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे भी पूरी तरह से कंप्लीट साल 2026 में हो जाएगा. वहीं, दिल्ली मुंबई रेल लाइन की स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से बढ़कर 160 हो जाएगी. यह काम भी साल 2026 में ही पूरा होगा. इसके अलावा कोटा में कई ऐसे मंडी विस्तार का काम शुरू होगा, तो व्यापार को गति मिलेगी. वहीं, नॉर्दर्न बाइपास का निर्माण पूरा होने पर रिंग रोड मिल जाएगा. यहां तक चंबल नदी पर राजस्थान का सबसे बड़ा पुल बनने वाला है. इन सभी प्रोजेक्ट के लिए कोटा साल 2026 में काफी आगे रहने वाला है. पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

इस साल बन जाएगी दरा की टनल : साल 2026 में दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के लिए मुकुंदरा हिल्स टाइगर में बन रही 4.9 किलोमीटर लंबी 8 लेन की टनल कंप्लीट हो जाएगी. यह टनल का काम साल 2020 में शुरू हुआ था, लेकिन वन विभाग की अनुमति और टनल निर्माण में तकनीकी कारणों की वजह से देरी हो गई है. अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके निर्माण के लिए अंतिम समय सीमा मार्च 2026 रखी है. हालांकि, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर बना रही टनल का निर्माण जून 2026 तक हो पाएगा. ऐसे में उम्मीद है. यहां से ट्रैफिक जुलाई या अगस्त तक निकल पाएगा.

Delhi Mumbai Expressway
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (ETV Bharat Kota)

160 से दौड़ेगी 100 से ज्यादा ट्रेन : दिल्ली मुंबई रेलवे ट्रैक को भी मिशन रफ्तार में शामिल किया हुआ है. कोटा रेल मंडल में आने वाले 549 किलोमीटर ट्रैक को 130 से 160 की स्पीड में बदला जा रहा है. यह काम लंबे समय से चल रहा था. इसकी समय सीमा दो से तीन बार बदली जा चुकी है, लेकिन अब वर्तमान में 90 फीसदी काम हो गया है, उम्मीद है कि साल 2026 में यह काम पूरा हो जाएगा. कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन का कहना है कि इसके टाइमलाइन मार्च 2026 तक बढ़ाई गई है.

मार्च तक हमें पूरी उम्मीद है कि यह पूरा रेलवे ट्रैक कोटा रेल मंडल का 160 की स्पीड में तब्दील हो जाएगा. इसको लेकर सिग्नलिंग, इलेक्ट्रिक और सिविल के कार्य करवाए गए हैं. यहां तक कि पटरी को सीधा भी किया गया है. इसके अलावा ट्रैक को पूरी तरह से फैन्स किया गया है, ताकि मवेशी व वन्यजीव जनित हादसे नहीं हो. यह सभी काम लगभग समाप्ति की ओर है. ऐसे में साल 2026 में दिल्ली मुंबई रेलवे ट्रैक पर 160 की स्पीड पर सीआरएस निरीक्षण के बाद ट्रेन दौड़ सकेगी. इसमें कोटा से गुजने वाली प्रीमियम ट्रेन से साथ लम्बी दूरी की सैंकड़ो ट्रेन हैं.

Delhi Mumbai Expressway
दिल्ली व मुंबई का एक्सप्रेसवे से सीधा सफर (ETV Bharat Kota)

पढ़ें : दरा घाटी में अंडरपास का निर्माण, रेलवे ने बनाना शुरू किया नया रास्ता

दिल्ली की दूरी जनवरी या फरवरी में तो मुंबई अगस्त सितंबर तक होगी कम : केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार की महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे कोटा जिले में होकर गुजर रहा है. इसमें सवाई माधोपुर और बूंदी जिले के बॉर्डर पर रणथंभौर टाइगर रिजर्व के नजदीक और कोटा जिले में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एरिया में निर्माण कार्य काफी देरी से चल रहे हैं. अब दोनों जगह ही निर्माण लगभग पूरा होने वाला है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के दौसा पीआईयू के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भरत सिंह जोइया का कहना है कि जनवरी-फरवरी 2026 में ही इस प्रोजेक्ट को पूरा करना है.

हम पहले से काफी लेट हो चुके हैं. वर्तमान 94 फीसदी काम पैकेज 10 का हो चुका है. संवेदक को भी हम इस संबंध में निर्देशित कर चुके हैं. हमें जनवरी और फरवरी महीने में ही इस ऑपरेशन में लेकर आना है, ताकि ट्रैफिक यहां से निकलना शुरू हो जाए. कोटा से सीधा मुंबई तक का ट्रैफिक शुरू हो जाएगा. दूसरी तरफ टनल निर्माण जून महीने में होगा. ऐसे में अगस्त सितंबर 2026 में कोटा से मुंबई की तरफ का सफर भी सीधा शुरू हो जाएगा.

Delhi Mumbai Expressway
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण अधीन हिस्सा (ETV Bharat Kota)

जून 2026 में बन जाएगा प्रदेश का सबसे लम्बा ब्रिज : चंबल नदी पर कोटा जिले के खातौली में झरेल के बालाजी के नजदीक हाई लेवल ब्रिज बनाया जा रहा है. कोटा और सवाई माधोपुर जिले की सीमा पर बना रहे इस ब्रिज की लंबाई 1880 मीटर है. बनने के बाद यह ब्रिज राजस्थान का सबसे लंबा ब्रिज बन जाएगा और इसका निर्माण करीब 70 फीसदी हो चुका है. सार्वजनिक निर्माण विभाग कोटा के अधीक्षण अभियंता जगदीश प्रसाद गुप्ता का कहना है कि दिसंबर 2023 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था और सितंबर 2025 में से पूरा होना था. हालांकि, समय सीमा बढ़ा दी गई है. यह निर्माण कार्य जून 2026 में पूरा हो जाएगा. संवेदक को इस संबंध में हमने टाइमलाइन दे दी है.

आखिर 10 साल बाद मिलेगा नॉर्दर्न बाइपास, बन जाएगा रिंग रोड : कोटा में नॉर्दर्न बाइपास का निर्माण साल 2015 में कोटा विकास प्राधिकरण (तत्कालीन नगर विकास न्यास) ने शुरू करवाया था और यह निर्माण कार्य 2 साल में पूरा होना था, लेकिन भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया न्यायालय में चली जाने के चलते ही, यह लंबित हो गया था. आखिर यह प्रक्रिया पूरी की गई और अब नॉर्दर्न बाइपास का काम अंतिम चरण पर है. रेलवे की कोटा बीना रेल लाइन पर एक फ्लाईओवर में अंतिम गर्डर इंस्टॉलेशन का कार्य किया जाना है. इस पुल के बन जाने के बाद यह नॉर्दर्न बाइपास का फेज वन पूरा हो जाएगा. जबकि फेज टू का काम सार्वजनिक निर्माण विभाग के नेशनल हाईवे खंड कोटा के द्वारा करवाया जा रहा है.

Chambal River Bridge Kota
चंबल नदी पर बन रहा प्रदेश का सबसे लम्बा झरेल के बालाजी ब्रिज (सोर्स : उमेश गौतम, इटावा)

पढ़ें : एक्सप्रेसवे से कोटा से दिल्ली का सफर दिवाली बाद होगा शुरू, मुंबई के लिए करना होगा इंतजार

एनएच खंड कोटा के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर अजय चौधरी का कहना है कि निर्माण फेज टू में भी भूमि अवाप्ति के चलते देरी से शुरू हो पाया है, लेकिन अब यह कार्य काफी तेज गति से चल रहा है. संवेदक को भी पूरी जमीन काम के लिए मिल गई है और यह निर्माण कार्य जून 2026 तक पूरा हो जाएगा. ऐसे में यहां से जुलाई अगस्त से यातायात निकल पाएगा. वहीं, दोनों फेज वन और फेज टू का काम हो जाने के बाद कोटा का रिंग रोड भी पूरा हो जाएगा. रिंग रोड बन जाने के बाद बारां की तरफ से आने वाले वाहन सीधे जयपुर जा सकेंगे. उन्हें केवल 27 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी, वर्तमान में कोटा बायपास होकर 45 किलोमीटर की दूरी तय करके हैंगिंग ब्रिज के जरिए जा रहे हैं. नॉर्दर्न बाइपास का फेज वन 14.2 किलोमीटर का है, जबकि फेज 2 का निर्माण 12.90 किलोमीटर का है.

मंडी विस्तार के बाद शुरू होगा काम : भामाशाह कृषि उपज मंडी में किसानों को माल बेचने के लिए लंबी कारों का सीजन की शुरुआत में सामना करना पड़ता है. जब धान की फसल आती है तब हालात ऐसे होते हैं कि 4 से 5 दिनों में किसानों का नंबर आता है. लंबी कतार ट्रक की लग जाती है. मंडी एक्सटेंशन होने से किसानों को राहत मिल सकती है. मंडी सेक्रेटरी मनोज कुमार मीणा का कहना है कि वन विभाग की जमीन को मंडी प्रशासन लेना चाहता है, साल 2016 से यह प्रक्रिया चल रही है और अब जनवरी के प्रथम सप्ताह में ही फारेस्ट क्लीयरेंस की मीटिंग होनी है. अब कार्य अंतिम चरण में है. इसके बाद मंडी एक्सटेंशन का कार्य होगा. कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी का कहना है कि मंडी एक्सटेंशन के बाद जहां वर्तमान में 6 करोड़ का व्यापार हो रहा है, यह बढ़कर 15 से 16 हजार करोड़ के बीच पहुंचने का उम्मीद है. इसका फायदा किसानों के साथ-साथ कोटा की अर्थव्यवस्था को होगा.