नए साल में कोटा नगर निगम का तोहफा: अब पट्टे के साथ ही मिलेगी भवन निर्माण व विक्रय स्वीकृति
इस संबंध में शहरी समस्या समाधान शिविरों में आई शिकायतों के बाद यह निर्णय किया गया.

Published : January 1, 2026 at 8:45 PM IST
कोटा: नए साल में नगर निगम ने आमजन को बड़ी राहत देते हुए अपनी व्यवस्था में बदलाव किया है. अब मकान का पट्टा लेने वाले लोगों को भवन निर्माण और विक्रय स्वीकृति भी साथ में ही दी जाएगी. आमजन को होने वाली परेशानी को देखते हुए नियमों को सरल बनाकर यह नई व्यवस्था लागू की गई है.
नगर निगम के कमिश्नर ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि संभागीय आयुक्त एवं नगर निगम प्रशासक अनिल कुमार अग्रवाल के निर्देशन में यह व्यवस्था लागू की गई है. इसके तहत नगर निगम में पट्टे के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को अब पट्टा, जी+1 की भवन निर्माण स्वीकृति और विक्रय स्वीकृति एक साथ जारी कर दी जाएगी. इसी तरह यदि कोई नाम हस्तांतरण के लिए आवेदन करता है, तो उसे भी विक्रय स्वीकृति साथ में ही जारी कर दी जाएगी. पहले आवेदक पहले पट्टे के लिए निगम में आता था, पट्टा जारी होने के बाद भवन निर्माण स्वीकृति के लिए और फिर भविष्य में आवश्यकता होने पर विक्रय स्वीकृति के लिए अलग-अलग चक्कर काटता था. नाम हस्तांतरण और विक्रय स्वीकृति के मामले में भी ऐसी ही प्रक्रिया अपनाई जाती थी.
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निगम में फाइल निस्तारण की समय सीमा तय: कमिश्नर मेहरा ने बताया कि निगम में होने वाले कार्यों के लिए समय सीमा भी निर्धारित कर दी गई है. निर्धारित समय सीमा में आवेदन का निस्तारण नहीं करने वाले या अनावश्यक चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि निगम में अब नाम हस्तांतरण 21 दिन, उपविभाजन-पुनर्गठन 30 दिन, विक्रय स्वीकृति, भवन निर्माण स्वीकृति, पुनर्ग्रहण शुल्क, ट्रेड लाइसेंस, फायर एनओसी व मोबाइल टावर एनओसी 15 दिन, भू-उपयोग परिवर्तन 60 दिन और सीवरेज कनेक्शन आवेदन 3 दिन में निस्तारित करना होगा. आवेदन के बाद लंबे समय तक कार्रवाई रिकॉर्ड रूम से मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं होने के कारण रुकी रहती थी. अब निगम में आवेदन करने के 3 कार्य दिवसों के भीतर रिकॉर्ड शाखा को संबंधित मूल पत्रावली अनुभाग के कर्मचारी को उपलब्ध करवानी होगी.
आवेदक कर रहे थे शिकायत: आयुक्त मेहरा ने बताया कि शहरी समस्या समाधान शिविरों में आए शिकायतों की समीक्षा के दौरान आमजन के बार-बार चक्कर काटने तथा विभिन्न कार्यों के समय पर पूरे नहीं होने की बात सामने आई थी. इसे देखते हुए अब निर्णय लिया गया है कि आवंटी के पक्ष में पट्टा जारी किए जाने पर पट्टा शुल्क के साथ भूतल व प्रथम तल की निर्माण स्वीकृति शुल्क और विक्रय स्वीकृति शुल्क भी जमा की जाएंगी. राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार नाम हस्तांतरण, उपविभाजन-पुनर्गठन, विक्रय स्वीकृति के प्रकरणों में मौके का स्थिति या उल्लंघन की जांच अपेक्षित नहीं होगी. ऐसे प्रकरणों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

