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कोटा मेडिकल कॉलेज: प्रसूताओं की हालत स्थिर, खतरा टला नहीं, प्राचार्य बोले- कारण अब भी सामने नहीं

कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में एक प्रसूता की मौत के मामले में डेथ ऑडिट कमेटी बना दी गई है.

Kota Medical College
नए मेडिकल कॉलेज का आईसीयू (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : May 6, 2026 at 3:44 PM IST

5 Min Read
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कोटा: कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की एक साथ तबीयत खराब हो गई, जिसमें से एक की मौत हो गई है, जबकि पांच की हालत स्थिर बनी हुई है. उन्हें किडनी की गंभीर समस्या है. अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इनकी एक साथ तबीयत कैसे खराब हुई. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. निलेश जैन ने बताया कि सभी पांचों प्रसूताओं की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. सभी में तीन एक जैसी समस्याएं देखी गई हैं – प्लेटलेट्स और ब्लड प्रेशर कम होना तथा यूरिन पास होना बंद हो जाना. एक महिला में ब्लीडिंग भी शुरू हो गई थी. प्राचार्य ने कहा कि यह निश्चित रूप से किसी न किसी कारण से हुआ है, लेकिन अभी तक कारण नहीं पता चला है. इन्हें दी गई दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे. वार्ड को फ्यूमिगेशन के लिए बंद कर दिया गया है. पांच सदस्यीय उपचार टीम और चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है. कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही कुछ पता चल सकेगा. वहीं, विधायक संदीप शर्मा अस्पताल पहुंचे और लिफ्ट में अटक गए. इधर, परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है.

डॉ. जैन ने बताया कि 12 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, जिसमें से 6 महिलाओं की तबीयत खराब हुई है और 6 महिलाओं को कुछ नहीं हुआ, जबकि फ्लूड, इंजेक्शन, एंटीबायोटिक या अन्य दवा सभी को एक जैसी ही दी गई थी. ऐसे में सब कुछ सीज कर दिया है. इन सबके नमूनों की कमेटी के निर्देश पर जांच होगी. इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में इंफेक्शन का खतरा भी हो सकता है. सावधानी बरतने के लिए 6 मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है. वार्ड को फ्यूमिगेशन के लिए बंद कर दिया गया है. एक-एक मरीज की ठीक से केयर की जा रही है.

यह बोले डॉक्टर व विधायक. (ETV Bharat Kota)

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इलाज व जांच के लिए बनाई समिति: प्रिंसिपल डॉ. जैन का कहना था कि पांच सदस्यीय डॉक्टरों की टीम मरीजों के इलाज की मॉनिटरिंग के लिए बना दी गई है. पूरी तरह से इलाज में जुटे हैं. इस मामले में अभी प्रसूताओं की स्थिति स्थिर बनी हुई है. यह नहीं कहा जा सकता कि वे पूरी तरह से खतरे से बाहर हैं. लगातार 36 से 72 घंटे मॉनिटरिंग के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा. पांचों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं.

करवाई जा रही है डेथ ऑडिट: डॉ. जैन के अनुसार घटनाक्रम सोमवार शाम को हुआ. प्रसूता की मौत के मामले में डेथ ऑडिट कमेटी भी बना दी गई है. अन्य पांचों को नेफ्रोलॉजी विभाग में शिफ्ट कर दिया गया है, ताकि किडनी के पहलू को पूरी तरह से देखा जा सके. नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विकास खंडेलिया के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है, जिसमें एक सर्जन, गाइनेकोलॉजिस्ट, फिजीशियन और एनेस्थीसिया के चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई है. वहीं चार सदस्यीय जांच समिति डॉ. सुरेश दुलारा की अध्यक्षता में बनाई गई है. इसमें डॉ. सौरभ चित्तौड़ा, डॉ. नेहरा सिहरा और नए अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक भी शामिल हैं. इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा.

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विधायक भी लिफ्ट में अटके: पूरे मामले की सूचना मिलने पर विधायक संदीप शर्मा अस्पताल में मरीजों से मिलने पहुंचे. उन्होंने कहा कि प्रसूताओं के उचित इलाज का निर्देश दिया है. इस घटनाक्रम का कारण जांच के बाद ही पता चलेगा. इस बीच, विधायक शर्मा जब वापस लौट रहे थे तो चौथी मंजिल से नीचे आते समय लिफ्ट में अटक गए. करीब 10 मिनट तक लिफ्ट में अटके रहे. उनके साथ प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन भी थे. बाद में टेक्नीशियन को बुलाकर उन्हें बाहर निकाला गया और वे सीढ़ियों से नीचे उतरे. जब उनसे यह पूछा गया तो उन्होंने हंसते हुए सवाल टाल दिया.

परिजन बोले— हमें नहीं दे रहे हैं पूरी जानकारी: बीमार पांच प्रसूताओं में से एक रागिनी के भाई विकास का कहना था कि यह घटनाक्रम अचानक हुआ. यूरिन पास होना बंद हो गया था. घटनाक्रम सोमवार का है, लेकिन ठीक से इलाज 24 घंटे बीत जाने के बाद भी नहीं हुआ. बाद में नेफ्रोलॉजी के आईसीयू में शिफ्ट किया गया. अस्पताल प्रशासन की ओर से पहले कोई जानकारी नहीं दी गई. ये लोग कभी किडनी तो कभी लीवर में खराबी की बात करते हैं. अब हार्ट का इंवॉल्वमेंट कह रहे हैं. ऐसा लगता है कि इलाज के मामले में लापरवाही रही है. मरीज के परिजनों का कहना था कि उनके नवजात शिशुओं की देखभाल नहीं हुई. जब तक ये मामला चला, उन्हें अस्पताल में इधर-उधर घुमाते रहे. अब उनको संभालने के लिए अस्पताल ने इंतजाम किए हैं. सभी नवजातों को एक ही कमरे में रखकर उपचार किया जा रहा है.