तड़ित चालक लगे लेकिन नहीं कर रहे काम, आकाशीय बिजली से नहीं इसके कंपन से हुई साइबेरियन पक्षियों की मौत
कोरबा में 6 साइबेरियन पक्षियों की मौत हुई. वन विभाग इसकी वजह आकाशीय बिजली के कंपन को मान रहा. पेश है राजकुमार शाह की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 3, 2026 at 10:55 PM IST
कोरबा: छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी कोरबा जिला वैसे तो धूल प्रदूषण, कोयले और बिजली के उत्पादन के लिए जाना जाता है. लेकिन यहां प्राकृतिक खूबसूरती की भी कमी नहीं है. प्रत्येक वर्ष प्रवासी पक्षियों के आने के लिए भी कोरबा मशहूर है. कनकी, करतला और हरदीबाजार के आसपास भी एशियाई ओपन बिल्ड स्टॉक बर्ड्स या साईबेरियन पक्षी जिन्हें घोंघिला भी कहा जाता है, उनकी मौजूदगी रहती है. यह पक्षी अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय प्रजनन काल कोरबा में बिताते हैं. ये मानसून का संदेश लेकर आते हैं और फिर अक्टूबर के आसपास वापस उड़ जाते हैं.
कोरबा के रामपुर में हुई 6 प्रवासी पक्षियों की मौत
एक दिन पहले रामपुर में 6 प्रवासी पक्षियों की मौत हो गई थी. पहले यह जानकारी सामने आई की बिजली गिरने के कारण उनकी मौत हुई है. लेकिन प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दूर कहीं बिजली गिरी थी और इसके कंपन से पक्षियों की मौत हो गई है. वन विभाग ने आसपास तड़ित चालक भी लगा रखे हैं. लेकिन वह काम नहीं कर रहे हैं, इनकी सही समय पर जांच नहीं होती. बिना मॉनिटरिंग के तड़ित चालक केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं.
करतला रेंजर अक्ष पलक ऋषि ने बताया कि प्रवासी पक्षी पर्यावरण के लिए बेहद खास हैं. ये मानसून का संदेश लेकर आते हैं, किसानों के मित्र भी होते हैं. इसलिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है. सुरक्षा के लिए तड़ित चालक और ग्रीन नेट की व्यवस्था की जा रही है.

"पड़ोसी देश से भी आते हैं पक्षी"
रेंजर अक्ष पलक ऋषि ने बताया कि ये पक्षी श्रीलंका और एशियाई सबकॉन्टिनेंट से आते हैं. भारत में भी जो उत्तरी राज्य हैं, वहां से भी ये पक्षी माइग्रेट होकर कोरबा आते हैं. यह पर्यावरण के लिए जरूरी हैं, सबसे पहले तो यह मानसून के दूत माने जाते हैं. लोगों को भी इनसे खास लगाव रहता है. ये रिसाइकल का भी काम करता हैं, तालाब में जो घोंघे, मछलियां होते हैं. उनको खाकर यह पूरी तरह से रिसाइकलिंग का काम करते हैं. तो इसलिए ये पक्षी प्रकृति का बैलेंस बनाकर रखते हैं.

इन्हें किसान मित्र इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ये फसल को सुरक्षा प्रदान करते हैं. फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को खा जाते हैं. मिट्टी को भी उपजाऊ बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं- अक्ष पलक ऋषि, रेंजर, कोरबा
साइबेरियन पक्षियों की मौत का मुख्य कारण बिजली
आगे रेंजर ने बताया कि प्रवासी पक्षियों के मौत का मुख्य कारण तो फिलहाल बिजली ही है. तड़ित चालक की संख्या बढ़ाई जा रही है, जो खराब है, उसे ठीक कर लिया जाएगा. अब इनका शिकार भी नहीं हो रहा है. शिकार में भी काफी कमी आई है. जो लोकल लोग हैं, जो जनता वह उनको प्रोटेक्शन दे रहे हैं.

"पक्षी मित्र भी एक्टिव"
रेंजर अक्ष पलक ऋषि ने कहा कि फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद और भी जांच होगी. फिलहाल मौत का कारण बिजली ही समझ में आ रहा है. जिस इलाके में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी है, वहां पक्षी मित्र बनाए गए हैं. उन्हें भी एक्टिव किया गया है.

