मां मैं गरीबी दूर करने जा रहा हूं.. कहकर कोलकाता गया था बेटा, लौटा शव; बिहार में चचेरे भाइयों की एक साथ उठी अर्थी!
कोलकाता तारातला हादसे में जान गंवाने वाले मुंगेर के तीन मजदूरों का शव पहुंचते ही पसरा मातम, परिजनों ने सरकार से मुआवजे की गुहार लगाई

Published : June 27, 2026 at 6:14 PM IST
मुंगेर: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला हादसे में अपनी जान गंवाने वाले बिहार के मुंगेर जिले के तीन गरीब मजदूरों का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा. शवों के गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में अचानक गहरा सन्नाटा पसर गया और परिजनों का करुण विलाप सुनकर वहां मौजूद हर एक ग्रामीण की आंखें नम हो गईं.
चचेरे भाइयों की मौत: इस दर्दनाक हादसे का शिकार हुए लोगों में जिला के धरहरा प्रखंड स्थित लगमा गांव निवासी पप्पू राम का 18 वर्षीय पुत्र शिरचन कुमार शामिल है. इसके साथ ही लगमा गांव के ही राजेंद्र राम का 18 वर्षीय पुत्र प्रेम कुमार और मानगढ़ गांव निवासी जवाहर राम का 40 वर्षीय पुत्र नवीन राम भी इस जानलेवा हादसे का शिकार हो गया. हादसे में जान गंवाने वाले शिरचन कुमार और प्रेम कुमार आपस में चचेरे भाई थे, जिनकी एक साथ हुई अचानक मौत से पूरा गांव स्तब्ध है.

पिता और परिजन घायल: इस हादसे में जहां प्रेम कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं उनके पिता राजेंद्र राम और परिवार के कुछ अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए. राजेंद्र राम अपने चार पुत्रों मन्नू कुमार, सोहित कुमार, माणिचन और प्रेम कुमार के साथ वहां कंस्ट्रक्शन के काम में लगे थे. हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए पिता राजेंद्र राम और अन्य सभी सदस्यों का इलाज फिलहाल कोलकाता के ही एक अस्पताल में चल रहा है.
भविष्य का सपना टूटा: अपने परिवार के बेहतर और खुशहाल भविष्य का सपना लेकर ये सभी मेहनतकश मजदूर अपने घर से दूर कोलकाता कमाने के लिए निकले थे. शुक्रवार के दिन जैसे ही एंबुलेंस के जरिए तीनों मजदूरों के शव उनके पैतृक गांव पहुंचे, परिवार के लोग बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े. इस हादसे ने सभी को कभी न भरने वाला जख्म दिया है. किसी मां का जवान बेटा चला गया, तो किसी पत्नी का सुहाग हमेशा के लिए उजड़ गया.
मां का करुण क्रंदन: शिरचन कुमार की मां बेबी देवी अपने इकलौते बेटे की मौत की खबर सुनते ही पूरी तरह से बदहवास और अचेत हो गईं. वह बार-बार अपने कलेजे के टुकड़े का नाम लेकर विलाप कर रही थीं और मां की चीत्कार सुन वहां मौजूद लोगों का कलेजा कांप उठा. बेबी देवी ने रोते हुए कहा कि मेरा बेटा कोलकाता पैसे कमाने गया था, लेकिन आज वह लकड़ी पर लेटकर वापस लौटा है.
लाचार पिता का दर्द: हादसे का शिकार हुए दूसरे मृतक प्रेम कुमार की मां नीरा देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया. परिजन महिलाओं को ढांढस बंधाते दिखे. शिरचन कुमार के लाचार पिता अपनी गरीबी के कारण पहले से ही ओडिशा में मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. बेटे की मौत की अत्यंत दुखद खबर मिलते ही वह अपना सारा काम-काज छोड़कर तुरंत अपने गांव के लिए रवाना हुए और बेटे का शव देखकर फूट-फूटकर फफक पड़े.
"मेरा बेटा घर की गरीबी को दूर करने के लिए परदेस गया था. कहता था कि मां इस बार पैसे लेकर आऊंगा और अपने घर की हालत पूरी तरह सुधार दूंगा, लेकिन आज मेरा बेटा एक बेजान शव बनकर घर लौटा है, अब इस बुढ़ापे में हमारा सहारा आखिर कौन बनेगा?" - नीरा देवी, मृतक की मां
पत्नी का छलका दर्द: वहीं नवीन राम की पत्नी अपने पति के बेजान शव से बुरी तरह लिपटकर लगातार रोए जा रही थी और अपनी किस्मत को कोस रही थी. उन्होंने रोते हुए कहा कि वह हमेशा मुझसे कहते थे कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएंगे और उन्हें एक बेहतर जीवन देंगे. उसने अत्यंत दुखी मन से कहा कि अब मेरे इन छोटे-छोटे मासूम बच्चों का भविष्य आगे कौन देखेगा, कौन इन्हें संभालेगा और हम अनाथ लोगों का आगे का जीवन आखिर कैसे व्यतीत होगा?
"अब मेरे छोटे-छोटे मासूम बच्चों का भविष्य आगे कौन देखेगा, कौन इन्हें संभालेगा और हम अनाथ लोगों का आगे का जीवन आखिर कैसे व्यतीत होगा?"- मृतक की पत्नी
मुआवजे की सख्त गुहार: इस हादसे के बाद मृतकों के परिजनों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से तुरंत आर्थिक सहायता मुहैया कराने की गुहार लगाई है. पीड़ित परिजनों ने बताया कि उनका पूरा परिवार दैनिक मजदूरी पर ही निर्भर था और अब उनके घरों में आगे कमाकर खिलाने वाला कोई भी सदस्य जीवित नहीं बचा है. एक पीड़ित परिजन ने सरकार से पुरजोर मांग करते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार पीड़ित परिवारों को उचित और पर्याप्त मुआवजा राशि प्रदान करे.
गंगा घाट पर विदाई: ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को पुनर्वास के लिए सरकारी नौकरी दी जाए और इसके साथ ही हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए सभी मजदूरों का बेहतर इलाज कराया जाए. ग्रामीणों ने कहा कि घायलों का समुचित इलाज और पीड़ित परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद मिलना ही मृतकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. इस दुखद अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और रिश्तेदार शामिल हुए और स्थानीय गंगा घाट पर मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया.
सुरक्षा मानकों पर सवाल: ग्रामीणों और परिजनों ने बिहार सरकार तथा पश्चिम बंगाल सरकार से मृतकों के आश्रितों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है. ग्रामीणों का कहना है कि रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले गरीब मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और निर्माण कार्य करा रही निजी कंपनियों की जिम्मेदारी है. अगर निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाता, तो आज इन तीन गरीब परिवारों के चिराग नहीं बुझते.
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