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इजराइल का ये ड्रोन बना भारत के निगरानी तंत्र का अहम हिस्सा, इन खासियत से लबरेज है 'स्काई स्ट्राइक'

ऐरियल टारगेटिंग सिस्टम ‘स्काई स्ट्राइक’, भारतीय सेना की हवाई निगरानी और लक्ष्यभेदन क्षमता को नई ताकत साबित हो रहा है.

ऐरियल टारगेटिंग सिस्टम ‘स्काई स्ट्राइक’
ऐरियल टारगेटिंग सिस्टम ‘स्काई स्ट्राइक’ (फोटो ईटीवी भारत जयपुर)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 9, 2026 at 10:41 AM IST

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Updated : January 9, 2026 at 1:29 PM IST

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जयपुर : सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन में आयोजित “अपनी सेना को जानो” प्रदर्शनी में भारतीय सेना की आधुनिक सैन्य क्षमताओं की प्रभावशाली झलक देखने को मिल रही है. इसी कड़ी में भारतीय सेना के अत्याधुनिक ऐरियल टारगेटिंग सिस्टम ‘स्काई स्ट्राइक’ को भी प्रदर्शित किया गया, जिसने दर्शकों और रक्षा विशेषज्ञों का विशेष ध्यान आकर्षित किया. इसे भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काम में लिया गया था. यह मानव रहित हवाई प्रणाली आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है और दुश्मन के लक्ष्यों की पहचान कर सटीक हमला करने में सक्षम है.

स्काई स्ट्राइक सिस्टम को निगरानी, लक्ष्य भेदन और रणनीतिक अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी खासियत यह है कि यह कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है. प्रदर्शनी में दी गई जानकारी के अनुसार यह सिस्टम कम समय में तैनात किया जा सकता है और सटीक ऑपरेशन अंजाम देने में सक्षम है, जिससे यह आधुनिक युद्ध परिदृश्य में भारतीय सेना के लिए एक अहम हथियार साबित हो रहा है.

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इन खासियत से लबरेज है 'स्काई स्ट्राइक' : तकनीकी रूप से स्काई स्ट्राइक एक अत्याधुनिक ड्रोन प्लेटफॉर्म है. इसकी लंबाई करीब 2.3 मीटर और विंगस्पैन 3.2 मीटर है. यह ड्रोन अधिकतम 15,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है, जबकि इसकी अधिकतम टेकऑफ ऊंचाई 13,150 फीट बताई गई है. एंड्योरेंस की बात करें तो 5 किलोग्राम वर्जन में यह करीब 2 घंटे और 10 किलोग्राम वर्जन में लगभग 1 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम है. यह सिस्टम अत्यधिक तापमान में भी काम कर सकता है, जिसमें अधिकतम +60 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम उड़ान तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक शामिल है.

Sky Strike की प्रमुख खासियतें :-

  • UAV की लंबाई: 2.3 मीटर
  • विंगस्पैन: 3.2 मीटर
  • अधिकतम उड़ान ऊंचाई: 15,000 फीट
  • अधिकतम टेक ऑफ ऊंचाई: 13,150 फीट
  • एंड्योरेंस - 5 किलोग्राम वर्जन: 2 घंटे
  • 10 किलोग्राम वर्जन: 1 घंटा

कोर ऑफ आर्टिलरी के विवेक सिंह अनुसार स्काई स्ट्राइक को भारतीय सेना के एयर डिफेंस नेटवर्क के साथ इंटीग्रेट किया गया है. इससे यह एयर डिफेंस गन, मिसाइल सिस्टम और अन्य हथियार प्रणालियों को सटीक लक्ष्य निर्देश दे सकता है. यह सिस्टम ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और अन्य हवाई खतरों की रियल टाइम पहचान और ट्रैकिंग में बेहद कारगर है. सीमावर्ती इलाकों, संवेदनशील ठिकानों और युद्ध क्षेत्रों में हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

स्काई स्ट्राइक बना भारत के निगरानी तंत्र का अहम हिस्सा
स्काई स्ट्राइक बना भारत के निगरानी तंत्र का अहम हिस्सा (फोटो ईटीवी भारत जयपुर)

इजराइल और भारत ने साथ बनाया : स्काई स्ट्राइक ड्रोन को बेंगलुरु में अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज की ओर से इजराइल की एलबिट सिक्योरिटी सिस्टम्स के सहयोग से तैयार किया गया है. यह लूपिंग म्यूनिशन श्रेणी का ड्रोन है, जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर लंबे समय तक मंडराते हुए दुश्मन के ठिकानों की पहचान कर सटीक हमला करने में सक्षम होता है. इसमें 5 से 10 किलोग्राम तक का वारहेड लगाया जा सकता है और यह लगभग 100 किलोमीटर तक की रेंज में प्रभावी कार्रवाई कर सकता है. इसकी इलेक्ट्रिक प्रॉपल्शन तकनीक इसे कम आवाज़ और कम दृश्यता वाला बनाती है, जिससे यह गुप्त अभियानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है.

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महत्वपूर्ण बात यह है कि स्काई स्ट्राइक ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी किया गया. इस ऑपरेशन में आतंकवादी ठिकानों और दुश्मन संरचनाओं पर सटीक हवाई हमले करने में इन ड्रोन प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई. इससे भारतीय सेना की आधुनिक सैन्य रणनीति, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की झलक भी सामने आई है. इसके बाद माना गया कि ऐरियल टारगेटिंग सिस्टम स्काई स्ट्राइक भारतीय सेना की हवाई निगरानी और लक्ष्यभेदन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है. यह न केवल सैनिकों की सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि किसी भी ऑपरेशन की सफलता की संभावना को भी कई गुना बढ़ा देता है.

Last Updated : January 9, 2026 at 1:29 PM IST