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इस दिन मनाई जाएगी आमलकी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की सबसे सरल विधि

शास्त्रों में बताया गया है कि जब सृष्टि की रचना हुई थी, तब भगवान विष्णु के आंसुओं से आंवले का पेड़ पैदा हुआ था.

आमलकी एकादशी
आमलकी एकादशी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 17, 2026 at 7:45 PM IST

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शिमला: हिंदू पंचाग साल भर में कई एकादशियां आती हैं, लेकिन आमलकी एकादशी (जिसे हम प्यार से आंवला एकादशी भी कहते हैं) का अपना एक अलग ही महत्व है. यह साल में सिर्फ एक बार आती है और अपने साथ ढेर सारी खुशियां और पुण्य लेकर आती है. इसे फाल्गुन शुक्ल एकादशी भी कहते हैं. इस दिन रंगभरी एकादशी मनाई जाती है. यह दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी है. साल 2026 में यह पावन दिन 27 फरवरी, शुक्रवार को पड़ रहा है.

'आमलकी' का मतलब होता है आंवला. शास्त्रों में बताया गया है कि जब सृष्टि की रचना हुई थी, तब भगवान विष्णु के आंसुओं से आंवले का पेड़ पैदा हुआ था. इसीलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है, क्योंकि माना जाता है कि उस पेड़ के हर हिस्से में देवी-देवताओं का वास है. इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे पूजा, भोजन आदि करने से सेहत लाभ प्राप्त होता है. विष्णु कृपा से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.

कब है शुभ मुहूर्त?

पुजारी परमस्वरूप शर्मा के अनुसार एकादशी तिथि 27 फरवरी 2026 को सुबह 12:33 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 27 फरवरी 2026 को रात 10:32 मिनट पर होगा, जबकि व्रत (पारण) खोलने का समय 28 फरवरी की सुबह 6:47 से 9:06 मिनट तक रहेगा. इस बार की आमलकी एकादशी पर 4 शुभ योग बन रहे हैं. आमलकी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान् योग और सौभाग्य योग बनेंगे. ऐसे संयोग में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है.

शिव और विष्णु भक्त उड़ाते हैं गुलाल

पुजारी परमस्वरूप शर्मा बताते है कि 'इस दिन की एक और बड़ी खासियत है. वाराणसी (काशी) में इसे 'रंगभरी एकादशी' कहते हैं. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव, माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी लाए थे, इसलिए इस दिन विष्णु भक्त और शिव भक्त दोनों मिलकर गुलाल उड़ाते हैं और खुशियां मनाते हैं. इस व्रत को करने के 3 बड़े फायदे पुराने पापों से मुक्ति मिलती है. घर में सुख-शांति और पैसा (समृद्धि) आता है. मानसिक तनाव दूर होता है और मन शांत रहता है.'

पूजा कैसे करें?

अगर आप पहली बार व्रत रख रहे हैं या घर पर सरल पूजा करना चाहते हैं, तो ये तरीका अपनाएं:

  • सुबह की शुरुआत: सुबह जल्दी नहाकर साफ (हो सके तो पीले) कपड़े पहनें.
  • संकल्प: भगवान के सामने हाथ जोड़कर कहें कि "हे प्रभु, मैं आज आपका व्रत पूरी श्रद्धा से करूंगा/करूंगी.
  • विष्णु जी की पूजा: भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें पीले फूल, चंदन और आंवला जरूर चढ़ाएं.
  • पेड़ की पूजा: अगर पास में आंवले का पेड़ है, तो वहां जाकर धूप-दीप जलाएं और पेड़ की 7 बार परिक्रमा (चक्कर) काटें.
  • कथा और आरती: एकादशी की कहानी सुनें और अंत में आरती करें.
  • दान का महत्व: इस दिन गरीबों को अन्न या आंवले का दान करना बहुत शुभ होता है.

पंडित मुक्ति चक्रवर्ती जी की खास सलाह

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य मुक्ति चक्रवर्ती जी कहते हैं कि 'ये दिन केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि 'सेल्फ-केयर' का दिन है. आंवला सेहत के लिए अमृत है और आध्यात्मिक रूप से विष्णु की शक्ति. इस दिन आंवले के नीचे बैठने या उसकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) खत्म होती है. 27 फरवरी 2026 को बनने वाले दुर्लभ योग दरिद्रता को दूर करने वाले हैं.'

इन चीजों का रखें ध्यान

एकादशी के दिन चावल न खाएं. इस दिन चावल से बने भोजन की मनाही होती है. आंवला साथ रखें. इस दिन आंवले का फल खाना, दान करना और उससे पूजा करना बहुत जरूरी है. मन को शांत रखें. गुस्सा और किसी की बुराई न करें.

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