जानें, बुंडू के सूर्य मंदिर की महिमा, क्यों सूर्य और हनुमान हैं आमने-सामने!
छठ पूजा के समय बुंडू के सूर्य मंदिर की महिमा और बढ़ जाती है. जानें, इस मंदिर की क्या है खासियत.

Published : October 25, 2025 at 5:03 PM IST
|Updated : October 25, 2025 at 5:45 PM IST
रांचीः लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान सूर्य मंदिर की महिमा और आस्था चरम पर होती है. रांची जिला के बुंडू प्रखंड में स्थित सूर्य मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यह आस्था, अध्यात्म और विज्ञान का अद्भुत संगम भी है. संस्कृति बिहार ट्रस्ट के प्रयास से यह मंदिर साल 1994 को तैयार हुआ और 10 जुलाई 1994 को इसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई थी.
यह मंदिर रथ के आकार में निर्मित है. रथ में सूर्य देव विराजमान हैं, जिन्हें सात घोड़े खींच रहे हैं. कहा जाता है कि ये सात घोड़े इंद्रधनुष के सात रंगों और सप्ताह के सात दिनों का प्रतीक हैं. रथ में 18 चक्के लगे हैं और इसके सारथी भी हैं, जो सूर्य देव के दिव्य रथ को गति देते हैं.
आमने-सामने गुरु और शिष्य
मंदिर का सबसे विशेष और आकर्षक दृश्य है— मुख्य द्वार के ठीक सामने हनुमान जी की प्रतिमा, जो सूर्य देव के आमने-सामने स्थापित है. यह प्रतिमा गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध की प्रतीक मानी जाती है. मान्यता है कि जब हनुमान जी ने सूर्य देव से ज्ञान की प्रार्थना की तो सूर्य देव ने कहा— “मैं तो सदैव गतिशील रहता हूं, स्थिर होकर तुम्हें शिक्षा नहीं दे सकता”. तब हनुमान जी ने उत्तर दिया— “तो मैं आपके सम्मुख चलता रहूंगा”. इसी प्रसंग की स्मृति में यहां हनुमान जी की प्रतिमा सूर्य देव के सामने स्थापित की गई है, जो दोनों के बीच के ज्ञान और श्रद्धा के अद्भुत संवाद को जीवंत करती है.
मंदिर निर्माण के पीछे का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण
सूर्य मंदिर के निर्माण के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जाते हैं— आध्यात्मिक और वैज्ञानिक.
आध्यात्मिक कारण: ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीराम के कुलदेवता सूर्य देव हैं. वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण इसी स्थान पर ठहरे थे. प्रातःकाल उन्होंने यहां अपने कुलदेवता सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया और फिर विश्राम किया. इसलिए यह स्थान पवित्र और पूजनीय माना जाता है.
वैज्ञानिक कारण: सूर्य देव को कुष्ठ निवारण के देवता भी कहा गया है. एक समय पंचपरगना क्षेत्र में कुष्ठ रोग व्यापक था. संस्कृति बिहार ट्रस्ट ने 1986 से इस रोग के उन्मूलन के लिए कार्य शुरू किया. संस्था का मानना था कि केवल औषधि से नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म की शक्ति से भी रोग का निवारण संभव है.
इसी सोच के साथ सूर्य देव का यह भव्य मंदिर बनवाया गया ताकि दवा और दुआ— दोनों के संयुक्त प्रभाव से रोगमुक्ति संभव हो सके. आज यह क्षेत्र लगभग कुष्ठ मुक्त हो चुका है.
सूर्य सरोवर में आस्था का महापर्व छठ
मंदिर परिसर के पीछे स्थित सूर्य सरोवर छठ महापर्व का प्रमुख केंद्र है. लगातार 30 वर्षों से संस्कृति बिहार ट्रस्ट और सूर्य मंदिर प्रबंधक समिति छठ व्रतियों की सुविधा के लिए निस्वार्थ भाव से काम कर रही है. हर साल बुंडू ही नहीं, बल्कि झारखंड के कई जिलों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं.
इस वर्ष भी छठ महापर्व की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, साफ-सुथरे घाट, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, आवागमन के रास्तों का सुधार, रात्रि विश्राम और छठ व्रतियों के साथ आने वाले सहयोगियों के लिये उत्तम भोजन की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. संयोजक प्रमोद कुमार और मुख्य पुजारी सत्यनारायण पाठक स्वयं सुबह से शाम तक स्थल पर रहकर निगरानी करते हैं, ताकि किसी भी व्रती को असुविधा न हो.
प्रशासन द्वारा तालाब की व्यवस्था का निरीक्षण
छठ पूजा को लेकर बुंडू के एसडीएम किस्टो कुमार बेसरा ने सूर्य मंदिर के पास मौजूद तालाब की व्यवस्था का निरीक्षण किया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि छठव्रतियों किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी. पिछले साल की तुलना में इस साल की व्यवस्था बेहतर रहेगी। अर्घ्य के दिन गोताखोर की भी व्यवस्था रहेगी.
सामाजिक कार्यकर्ता अरुण जैन ने बताया कि सूर्य मंदिर स्थित घाट पर पूजा करने वाले व्रतियों के लिए मुकम्मल व्यवस्था की गई है. सभी का स्थान फिक्स रहता है, सभी व्रतियों को एक नंबर दिया जाता है। साथ ही दुग्ध की भी व्यवस्था रहती है. जो छठ व्रती रात को सूर्य मंदिर कैंपस में रुकते हैं, उनके ठहरने से लेकर भोजन की सारी व्यवस्था की जाती है. उन्होंने बताया कि हर साल करीब 1500 से 2000 परिवार सूर्य मंदिर कैंपस में रात को रुकते हैं.
लोक आस्था और सेवा का प्रतीक स्थल
तीन दशक से यहां छठ महापर्व बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न हो रहा है. आज बुंडू सूर्य मंदिर पूरे झारखंड में लोक आस्था, सेवा और वैज्ञानिक सोच का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है. यहां हर वर्ष न सिर्फ श्रद्धालु, बल्कि विश्वास और अनुशासन भी एक साथ सिर झुकाते हैं. बुंडू का सूर्य मंदिर हमें यह संदेश देता है कि जहां आस्था और विज्ञान एक हो जाएं, वहां हर रोग, हर अंधकार मिट जाता है.
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