बिहार में बंपर वोटिंग से किसकी जड़ें मजबूत हुई, महिलाओं का बढ़ा प्रतिशत किसे सत्ता तक पहुंचाएगा?
बिहार चुनाव 2025 में रिकॉर्ड 67 प्रतिशत वोटिंग के क्या रहे मुख्य फैक्टर? कैसे महिलाओं ने पुरुषों से 10% अधिक मतदान किया? पढ़ें पूरी खबर

Published : November 12, 2025 at 8:52 PM IST
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मतदान का रिकॉर्ड टूट गया है. इस बार कुल 67 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, जो अब तक के विधानसभा चुनाव के इतिहास में सर्वाधिक है.
टूट गए सारे रिकॉर्ड : 1951 में जब पहली बार बिहार में विधानसभा चुनाव हुआ था तब केवल 42.60% मतदान हुआ था. इसके बाद वर्ष 2000 में 62.57% मतदान दर्ज किया गया था, जो दो दशकों तक सबसे अधिक माना जाता रहा. लेकिन 2025 में यह आंकड़ा पार कर गया और बिहार ने लोकतंत्र के प्रति अपनी परिपक्वता का नया उदाहरण पेश किया है.
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— Chief Electoral Officer, Bihar (@CEOBihar) November 12, 2025
12.11.2025 pic.twitter.com/aE6FaM7qoj
2020 की तुलना में 9.6% अधिक मतदान : मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल के अनुसार 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार 9.6% अधिक मतदान दर्ज किया गया है. पिछले चुनाव में जहां कई क्षेत्रों में मतदान कम देखने को मिला था, वहीं इस बार लोगों में लोकतंत्र के प्रति अभूतपूर्व उत्साह दिखा. चाहे शहरी इलाकों की लंबी कतारें हों या सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की पहाड़ी ढलानें, हर जगह लोगों ने मतदान को पर्व की तरह मनाया.
महिलाओं ने रचा इतिहास, 71.6% मतदान : इस बार के चुनाव में महिलाओं ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, 2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार की महिलाओं ने 71.6% मतदान किया है, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत इससे लगभग 10% कम रहा.

''2010 से लगातार चार विधानसभा चुनावों में महिलाएं पुरुषों से अधिक मतदान कर रही हैं. पहले जहां महिलाएं 50 प्रतिशत तक ही वोट डालती थीं, वहीं अब 70% से ऊपर का आंकड़ा पार कर चुकी हैं. यह न सिर्फ बिहार के सामाजिक परिवर्तन का संकेत है बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.''- विनोद सिंह गुंजियाल, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार
'चुनाव आयोग के कई कार्यक्रम का रहा असर' : राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने कहा कि रिकॉर्ड मतदान के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण मतदाताओं की जागरूकता है. आयोग ने इस बार गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया, जिसमें डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए. साथ ही ग्रामीण इलाकों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए ताकि लोग मतदान के महत्व को समझें.

''इस बार बड़ी संख्या में फर्स्ट टाइम वोटरों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए. यही युवा वर्ग लोकतंत्र में नई ऊर्जा लेकर आया है. बिहार के मतदाताओं ने साबित कर दिया कि लोकतंत्र की जड़ें यहां बेहद मजबूत हैं.''- विनोद सिंह गुंजियाल, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार
राजनीतिक दलों ने जताई खुशी : राजनीतिक दलों ने इस रिकॉर्ड वोटिंग को जनता की जागरूकता और लोकतंत्र की मजबूती से जोड़ा है. राजद से लेकर भाजपा तक सभी पार्टियों ने मतदाताओं के बढ़ते उत्साह को स्वागतयोग्य बताया है. राजद जहां इसे 'बदलाव की लहर' मान रही है, वहीं भाजपा इसे 'विकास पर भरोसा' बता रही है.
'बदलाव के लिए निकलीं महिलाएं' : राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बिहार में इस बार रिकॉर्ड वोटिंग और महिलाओं की लंबी कतारें इस बात का प्रमाण है कि जनता बदलाव चाहती है. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा रहा और लगभग 72 लाख से अधिक युवा मतदाताओं ने इसी मुद्दे पर मतदान किया.
''तेजस्वी यादव के 'हर घर नौकरी' वाले वादे ने युवाओं और महिलाओं दोनों को आकर्षित किया. पहली बार वोट देने वाले युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. नौकरी, शिक्षा और उद्योग के मुद्दे पर युवाओं ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.''- एजाज अहमद, प्रवक्ता, राष्ट्रीय जनता दल

'तेजस्वी के मॉडल ने किया महिलाओं को प्रभावित' : एजाज अहमद ने कहा कि तेजस्वी यादव ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए जो मॉडल पेश किया, उसने बिहार की महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि महिलाएं न केवल घर की जिम्मेदारियां निभा रही हैं बल्कि अपनी सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए भी मतदान केंद्र पहुंची. तेजस्वी यादव द्वारा महिला सुरक्षा और रोजगार के लिए की गई घोषणाओं का असर इस चुनाव में साफ देखा गया.
'नीतीश कुमार के सशक्तिकरण मॉडल का असर' : इधर, भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सुमित शशांक ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का महिला सशक्तिकरण मॉडल है. उन्होंने कहा कि 2010 से नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए जो योजनाएं चलाईं, जैसे साइकिल योजना, पोशाक योजना, छात्रवृत्ति और नौकरी में आरक्षण, उससे महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं.

''एनडीए सरकार में महिलाएं सुरक्षित महसूस कर रही हैं और इसी भरोसे के चलते वे बड़ी संख्या में मतदान केंद्र तक पहुंची. सरकार ने शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में जो कार्य किए, उसका परिणाम है कि महिलाएं लोकतंत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं. महिलाएं नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कर रही हैं और इसी विश्वास के साथ उन्होंने एनडीए के पक्ष में मतदान किया है.''- सुमित शशांक, प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी
'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं की भागीदारी' : भाजपा प्रवक्ता ने आगे कहा कि एनडीए सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं और हर तबके को शिक्षा से जोड़ा है. इसके परिणामस्वरूप समाज में जागरूकता बढ़ी है और लोग लोकतंत्र के महत्व को समझने लगे हैं. पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भी सरकार ने प्रेरित किया है. यही कारण है कि इस बार युवा वर्ग बड़ी संख्या में वोटिंग के लिए घर से निकला.

तीन प्रमुख कारण : वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार ने मतदान प्रतिशत बढ़ने के तीन प्रमुख कारण गिनाए. पहला कारण उन्होंने बताया कि चुनाव छठ के बाद आयोजित हुआ, जिससे बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाता जो छठ मनाने आए थे, वे यहीं रुक गए और मतदान में हिस्सा लिया. कुछ लोग लौटे लेकिन 50 फीसदी से अधिक मतदान के लिए रुक गए.
SIR ने भी निभाई भूमिका : संतोष कुमार ने दूसरा कारण 'SIR' (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया को बताया. इसके तहत मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए और जिनका नाम एक से अधिक जगहों पर था, उसे एक स्थान पर सीमित किया गया. इससे मतदान सूची अधिक सटीक हुई और वास्तविक मतदाता ही मतदान केंद्र पहुंचे.

'महिलाओं का मतदान बना सबसे बड़ा फैक्टर' : तीसरा और सबसे अहम कारण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रही. संतोष कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार के शासन में बीते दो दशकों में महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में कई योजनाएं चलाई गईं.
छात्रवृत्ति, आरक्षण, उद्योग के लिए सहायता राशि और हाल ही में महिलाओं को सीधे बैंक खाते में 10000 रुपए की आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध कराई. सरकारी नौकरियों में 33 फ़ीसदी और पंचायती राज में 50 फ़ीसदी महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया. इन सभी कारणों से महिलाएं पहले से अधिक आत्मनिर्भर और जागरूक हुई हैं.
''इस बार यह भी देखने को मिला कि महिलाएं, पुरुषों से अलग अपने विचार से मतदान कर रही हैं. अब वे किसी के कहने पर नहीं बल्कि अपने निर्णय से वोट डाल रही हैं. महिलाओं में यह राजनीतिक चेतना लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय खोल रही है. बड़ी संख्या में महिलाएं वर्कफोर्स में हैं और कोई निर्णय लेने के लिए पुरुषों पर निर्भरता काफी हद तक कम हुई है. युवा वोटर नौकरी और रोजगार के मुद्दे के साथ मतदान केंद्र गए क्योंकि सभी राजनीतिक दलों ने इसे अपना मुद्दा बनाया था. यही सब फैक्टर रहे जिसके कारण मतदान प्रतिशत बढ़ा है.''- संतोष कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
243 सीटों पर हुई बंपर वोटिंग : दरअसल, बिहार में दो चरण में वोटिंग हुई. 6 नवंबर को पहले फेज में 65.08 फीसदी मतदन हुआ था. दूसरे चरण में 11 नवंबर को 69.12 प्रतिशत मतदान हुआ था. दोनों चरणों को मिलाकर 67 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई. ऐसे में इस बंपर वोटिंग का किसको लाभ मिलेगा यह तो 14 नवंबर को ही पता चलेगा.
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