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दिल्ली में देश का पहला 'रिविजन नी एंड हिप' कॉन्फ्रेंस, 850+ विशेषज्ञ होंगे शामिल, हर साल होती है 5 लाख सर्जरी

रिविजन आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस में शामिल हो रहे हैं 10 से ज्यादा देशों के रिविजन सर्जन,850 से ज्यादा देशी और विदेशी सर्ज.एडवांस्ड ट्रेनिंग पर दिया ज़ोर.

नी एंड हिप ​रिविज़न आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस 2025
नी एंड हिप ​रिविज़न आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस 2025 (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : December 6, 2025 at 11:52 AM IST

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नई दिल्ली: भारत में ​कॉम्प्लेक्स ​रिविज़न नी एंड हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी पर आधारित देश के एकमात्र विशेष वैज्ञानिक मंच सेकंड नी एंड हिप ​रिविज़न आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस का दिल्ली में आयोजन हो रहा है. 5 से 7 दिसंबर तक आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में भारत और विदेशों से 850 से अधिक ऑर्थोपेडिक सर्जन, अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और प्रमुख आर्थ्रोप्लास्टी विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं. कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. (प्रो.) अनिल अरोड़ा ने बताया कि इस वर्ष का संस्करण वैज्ञानिक स्तर को और ऊंचा उठाने तथा देश को बढ़ते हुए इम्प्लांट ऐजिंग और समय से पहले होने ​वाले इम्प्लांट फेलियर से निपटने के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

हिप या नी रिप्लेसमेंट की उम्र होती है 20 से 25 वर्ष : डॉ. (प्रो.) अनिल अरोड़ा ने बताया कि किसी भी हिप या नी रिप्लेसमेंट की एक उम्र होती है. यह उम्र आमतौर पर 20 से 25 वर्ष है जिसके बाद ​रिविज़न नी या हिप रिप्लेसमेंट की ज़रूरत पड़ती है, जिसे हम ‘​रिविज़न आर्थ्रोप्लास्टी’ कहते हैं. यह एक बेहद कॉम्प्लेक्स और स्किल-इंटेंसिव प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में 10 से ज्यादा देशों के नी और हिप रिप्लेसमेंट सर्जन भाग ले रहे हैं. इनमें श्रीलंका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, मालदीव, मॉरिशस, नेपाल, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका सहित और भी कई देशों के सर्जन शामिल हैं.

हिप या नी रिप्लेसमेंट की उम्र होती है 20 से 25 वर्ष -सर्जन (ETV Bharat)
मेक इन इंडिया मुहिम से सस्ते हुए हैं इंप्लांट्स: डॉ विजय कुमार : कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन एवं एम्स ऑर्थोपेडिक विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार ने बताया कि अब इंप्लांट्स का चलन काफी बढ़ गया है. लोग जागरूक भी हो रहे हैं इसकी वजह से रोबोटिक नी और हिप रिप्लेसमेंट की संख्या बढ़ रही है. इसकी नई तकनीक में रोबोटिक तकनीक भी शामिल है.

रोबोटिक तकनीक से रिप्लेसमेंट हो जाता है आसान : रोबोटिक तकनीक से बिल्कुल सटीक और बहुत कम चीरफाड़ में ही हिप और नी रिप्लेसमेंट हो जाता है. उन्होंने बताया कि मेक इन इंडिया इंप्लांट्स की मैन्युफैक्चरिंग होने से अब ये सस्ते और सरकार द्वारा निर्धारित रेट पर भी मिलने शुरू हो गए हैं. सरकार ने पीपीआई योजना के तहत सभी इंप्लांट्स के रेट फिक्स कर दिए हैं उससे ज्यादा रेट पर कोई भी कंपनी इंप्लांट्स नहीं बेच सकती.

10 से ज्यादा देशों के रिविजन सर्जन हो रहे शामिल
10 से ज्यादा देशों के रिविजन सर्जन हो रहे शामिल (ETV Bharat)
नी और हिप रिप्लेसमेंट के बाद क्या न करें : डॉ प्रोफेसर अनिल अरोड़ा ने बताया कि अगर किसी का नी और हिप रिप्लेसमेंट या कोई भी ज्वाइंट रिप्लेसमेंट हो जाए तो उन लोगों को कभी भी पैरों को मोड़कर जमीन पर नीचे नहीं बैठना चाहिए. इससे ज्वाइंट में दर्द शुरू हो सकता है और रिप्लेसमेंट बिगड़ सकता है. साथ ही नी और हिप रिप्लेसमेंट वाले लोगों को बहुत ज्यादा एक्सरसाइज भी नहीं करनी चाहिए इससे उनके इंप्लांट्स घिसते हैं, जिससे उनकी परेशानी बढ़ सकती है. अगर अपने नी और हिप या अन्य ज्वाइंट का रिप्लेसमेंट के बाद विशेष ख्याल रखें तो वह लंबे समय तक खराब नहीं होंगे. साथ ही उन्हें जल्दी बदलवाने की भी जरूरत नहीं होगी. भारत में हर साल पांच लाख होते हैं प्राइमरी नी और हिप रिप्लेसमेंट : डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 5 लाख प्राइमरी नी और हिप रिप्लेसमेंट होते हैं. और अब देश में अब ऐसा दौर शुरू हो गया है जहां पहले लगाए गए हज़ारों इम्प्लांट ढीले पड़ने, घिसने या फेल होने लगे हैं. उन्होंने बताया कि भारत में नी और हिप रिप्लेसमेंट की शुरूआत 1987 में हो गई थी.

रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस में बड़ी चुनौती : रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी कॉन्फ्रेंस (आरएसी) 2025 ने इसी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती और ​रिविज़न स्पेशलिस्ट सर्जनों की बढ़ती ज़रूरत पर मज़बूत रोशनी डाली है. उन्होंने आगे कहा कि भारत ऐसे समय में प्रवेश कर चुका है, जहां प्रशिक्षित ​रिविज़न सर्जन विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं.

​रिविज़न जॉइंट रिप्लेसमेंट पर केंद्रित पहला कॉन्फ्रेंस : रिविज़न नी और हिप रिप्लेसमेंट प्राइमरी सर्जरी की तुलना में कहीं अधिक ​कॉम्प्लेक्स होता है और इसमें एडवांस्ड इम्प्लांट, हाई-प्रिसिशन इंस्ट्रुमेंटेशन, बोन लॉस मैनेजमेंट, इन्फेक्शन कंट्रोल, इंस्टेबिलिटी ट्रीटमेंट और पेरिप्रोस्थेटिक फ्रैक्चर्स जैसे मामलों का अनुभव आवश्यक होता है. अब तक भारत में कोई भी कॉन्फ्रेंस पूरी तरह ​रिविज़न जॉइंट रिप्लेसमेंट पर केंद्रित नहीं रही है और आरएसी इसी महत्वपूर्ण कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया है.

कॉन्फ्रेंस में इन विषयों पर होगी चर्चा : गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज उपलब्धियों के साथ डॉ. अरोड़ा ने इस बदलाव को ‘प्राइमरी से ​रिविज़न आर्थ्रोप्लास्टी की ओर बढ़ते विशाल ट्रांज़िशन’ के रूप में वर्णित किया और कहा कि इसके लिए तैयारी और एडवांस्ड ट्रेनिंग अनिवार्य है. आरएसी 2025 एक व्यापक और प्रभावशाली वैज्ञानिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगा, जिसमें ​कॉम्प्लेक्स ​रिविज़न प्रक्रियाओं के लिए स्टेपवाइज़ लर्निंग मॉडल, लाइव इन-बॉक्स सर्जरी, एडवांस्ड सर्जिकल वीडियो सेशन, केस-आधारित चर्चाएँ, कंट्रोवर्सी पैनल्स और प्रैक्टिकल डिसीज़न-मेकिंग शामिल हैं. इन्फेक्शन मैनेजमेंट, बोन लॉस रिकंस्ट्रक्शन, इम्प्लांट फिलॉसफी और स्टैंडर्डाइज्ड प्रोटोकॉल जैसे विषयों पर विस्तृत वैज्ञानिक विमर्श इसकी विशेषता होंगे.कॉन्फ्रेंस में इंडियन आर्थ्रोप्लास्टी असोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. राकेश राजपूत भी शामिल रहे.

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