Kisan Diwas : रामपाल जाट बोले- किसानों की स्थिति दयनीय, सरकारें मानती हैं दूसरे नंबर का नागरिक
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि राजस्थान ही नहीं, पूरे देश के किसानों की स्थिति दयनीय है. खुद सुनिए क्या कहा...

Published : December 23, 2025 at 6:48 AM IST
जयपुर: किसान दिवस भारत में हर साल 23 दिसंबर को मनाया जाता है, जो देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के हितैषी के रूप में पहचाने जाने वाले चौधरी चरण सिंह की जयंती का प्रतीक है. यह दिन किसानों के महत्वपूर्ण योगदान को सम्मानित करने और उनके कल्याण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है.
राजस्थान की 80 फीसदी आबादी ग्रामीण में निवास करती और किसान है. ऐसे में इस दिन राजस्थान के किसानों की स्थिति पर किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने ईटीवी भारत से खास बात की और कहा कि राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के किसानों की दयनीय स्थिति है. सरकारें किसानों को दूसरे नंबर का नागरिक मानती हैं. जब तक किसानों को उनकी उपज का सही दाम कानूनी रूप से नहीं मिलेगा, तब तक अन्नदाता के आर्थिक उत्थान की बात करना बेईमानी है.
चौधरी चरण सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है किसान दिवस : किसान नेता रामपाल जाट ने बताया कि किसान दिवस हर साल 23 दिसंबर को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो स्वयं एक किसान नेता थे और उन्होंने किसानों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम किया. यह दिन देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा में किसानों के अमूल्य योगदान को सम्मान देने, कृषि जागरूकता बढ़ाने और किसानों की सामाजिक-आर्थिक भलाई सुनिश्चित करने के लिए मनाया जाता है.
उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह किसानों के चैंपियन माने जाते थे, जिन्होंने ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए नीतियां बनाईं और किसान ट्रस्ट की स्थापना की. यह दिन किसानों की कड़ी मेहनत, त्याग और देश के प्रति उनके योगदान को स्वीकार करता है. इस दिन किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं से अवगत कराने के लिए कार्यक्रम होते हैं. उन्होंने बताया कि यह दिन किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए जागरूकता बढ़ाने का अवसर देता है. इस दिन देशभर में वाद-विवाद, संगोष्ठियां, कृषि प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें किसानों के मुद्दों और कृषि क्षेत्र के विकास पर चर्चा होती है.
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राजस्थान में किसानों की स्थिति : रामपाल जाट ने कहा कि किसानों की स्थिति काफी कठिनाई पूर्ण है. राजस्थान की बात करें तो यहां सूखा और बंजर क्षेत्र है, जिससे यहां के किसानों को खेती के लिए उपयुक्त जल स्रोतों की भारी कमी का सामना करना पड़ता है. सिंचाई की सुविधाओं की कमी, साथ ही कम वर्षा और अत्यधिक गर्मी के कारण कृषि उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है. राजस्थान में गेहूं, जौ, बाजरा और दलहन की मुख्य फसलें हैं, लेकिन इनकी उत्पादकता अन्य राज्यों के मुकाबले कम रहती हैं.
इसके अलावा, राजस्थान में किसानों को ऋण की समस्या, फसल बीमा की कमी और बाजार मूल्य में गिरावट जैसी कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. किसान आत्महत्या और कर्ज के जाल में फंसने जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं. वहीं, राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू की है, जैसे कि 'मुख्यमंत्री कृषक सहायता योजना' और 'अन्नपूर्णा योजना', जो किसानों की मदद करने के लिए हैं, लेकिन इन योजनाओं का प्रभाव सीमित और असमान रूप से देखा जाता है. सरकारें किसानों को दूसरे नंबर का नागरिक मानती हैं. भाषणों में किसानों के नाम से नारे लगाए जाते हैं, लेकिन उनके लिए किसान प्राथमिकता में ही नहीं हैं.
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किसानों की मुख्य चुनौतियां:
समर्थन मूल्य पर खरीद की आवश्यकता- सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित दाम मिले. खासकर तब जब बाजार में मूल्य गिरने की स्थिति होती है. समर्थन मूल्य वह न्यूनतम मूल्य है, जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदने का वादा करती है.
कानूनी रूप से समर्थन मूल्य पर खरीद- जब तक यह व्यवस्था कानूनी रूप से लागू नहीं होती, तब तक किसानों के लिए कोई स्थिति अच्छी नहीं हो सकती. बाजार में कानूनी रूप से समर्थन मूल्य से अधिक पर खरीद का प्रावधान तय हो.
उत्पादन लागत में वृद्धि- बीज, उर्वरक, कीटनाशक और कृषि यंत्रों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है. इसके साथ ही, खेती में काम आने वाले मजदूरी और परिवहन खर्चों में भी लगातार इजाफा हो रहा है. इससे किसानों का उत्पादन खर्च बढ़ गया है, जबकि फसलों की कीमतें स्थिर या घट रही हैं, जो उन्हें आर्थिक संकट में डाल रही हैं.
ऋण और कर्ज के जाल में फंसना- कई किसान उधारी पर खेती करते हैं और यदि फसल नुकसान हो जाती है, तो वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं. किसानों को कर्ज छूट नहीं चाहिए, कर्ज मुक्त करना होगा. कर्ज के दबाव के कारण, कई किसान आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाते हैं.
कृषि योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होना- राजस्थान में कई सरकार किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा करती रही हैं, लेकिन इन योजनाओं का प्रभाव और कार्यान्वयन बहुत सीमित रहा है. किसानों को इन योजनाओं का फायदा नहीं मिल पाता, क्योंकि कई बार योजनाओं की जानकारी और सही प्रक्रिया किसानों तक नहीं पहुंच पाती.
मांग और आपूर्ति में असंतुलन- राजस्थान के किसानों को अक्सर अपनी फसलों के लिए उचित मूल्य नहीं मिल पाता. मार्केटिंग चैनल्स की कमी, उचित मूल्य निर्धारण और फसल के बाद उचित भंडारण की सुविधा न होने से किसानों को अपनी उपज को सस्ते दामों में बेचना पड़ता है.
पानी की कमी और सूखा- राजस्थान का अधिकांश हिस्सा रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी है, जहां पानी की भारी कमी है. राज्य में सिंचाई के लिए जल स्रोतों की कमी और नदियों की सूखती धारा, किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है. फसल उत्पादन के लिए जल संकट सबसे बड़ी समस्या बन चुका है.
किसान के मिले उचित दाम, कानूनी रूप से समर्थन मूल्य पर खरीद हो : रामपाल जाट का कहना है कि राजस्थान में किसानों को अक्सर अपनी उपज के लिए उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जो उनके लिए एक बड़ी समस्या बन गई है. किसान अपनी मेहनत से उत्पादन तो करते हैं, लेकिन कई बार खराब बाजार व्यवस्था, बिचौलियों की दखलंदाजी और अन्य कारणों से उन्हें अपनी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पाता. उन्होंने कहा कि किसानों को हमेशा समर्थन मूल्य (Minimum Support Price - MSP) पर उनकी फसल का कानूनी रूप से खरीद होना चाहिए, ताकि वे अपनी मेहनत का सही मुआवजा पा सकें.
समर्थन मूल्य पर खरीद की आवश्यकता : रामपाल जाट का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित दाम मिले, खासकर तब जब बाजार में मूल्य गिरने की स्थिति होती है. समर्थन मूल्य वह न्यूनतम मूल्य है, जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदने का वादा करती है. हालांकि, यह समर्थन मूल्य बहुत बार किसानों तक नहीं पहुंच पाता और बिचौलिये इस अंतर को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं.
रामपाल जाट ने यह भी कहा कि कानूनी रूप से समर्थन मूल्य पर खरीद होनी चाहिए, ताकि किसान न केवल अपने खर्चे निकाल सकें, बल्कि उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो. उन्होंने कहा कि जब तक यह व्यवस्था कानूनी रूप से लागू नहीं होती, तब तक किसानों के लिए कोई स्थिति नहीं हो सकती. सरकार समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने को कानूनी रूप से सुनिश्चित कर दे तो किसानों को यह डर नहीं रहेगा कि उनकी उपज बाजार में कम कीमत पर बिक जाएगी.

