सेहत के लिए वरदान है मसालों का राजा, ब्लैक गोल्ड के तौर पर है इसकी पहचान
काली मिर्च के औषधीय गुणों के कारण हर घर में होता है इसका इस्तेमाल, बॉडी में मेटाबॉलिज्म को बढ़ाते हैं इसके कैटेलिस्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 11, 2026 at 6:22 PM IST
शहडोल: काली मिर्च का उपयोग लगभग हर घर में और किचन में होता है. इसलिए इसे मसालों का राजा भी कहा जाता है. ज्यादातर आयुर्वेद औषधी में भी इसका उपयोग होता है. घरेलू नुस्खे की बात आए, तो काली मिर्च का उपयोग तो जरूर होता है. डॉक्टर बताते हैं कि ठंड के सीजन में खानपान में इसका उपयोग किसी वरदान से कम नहीं है. इसीलिए काली मिर्च जो बड़ी आसानी से हर किसी के रसोई में मिल जाती है, ये किसी ब्लैक गोल्ड से कम नहीं है.
एक समय भारत में केवल काली मिर्च का होता था उपयोग
आयुर्वेद डॉक्टर, अंकित नामदेव बताते हैं कि "काली मिर्च को कई नामों से जाना जाता है. इसे गोल मिर्च भी कहा जाता है. संस्कृत में इसे मरीच भी कहते हैं. अंग्रेजी में इसे ब्लैक पीपर बोलते हैं. इसका वानस्पतिक नेम पाइपर नाइग्रस है. ये पाईपेरेसी परिवार का पौधा है. आयुर्वेद में मरीच नाम से इसका वर्णन किया गया है. एक समय था जब भोजन को तीखा करने के लिए भारत में सिर्फ काली मिर्च ही उपयोग की जाती थी. लेकिन जब भारत में लाल मिर्च आई, तब इसको स्पेसिफिकली काली मिर्च बोलने लग गए."
'मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है काली मिर्च'
अंकित नामदेव बताते हैं कि "काली मिर्च वो मसाला था जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में अट्रैक्ट किया था. उसके मेडिसिनल प्रॉपर्टीज के कारण ये मसाला विश्व विख्यात है. इसका रस गुण वीर्य विपाक होता है, जो कफ शामक होता है. इसमें पाईपरन नाम का सब्सटेंस पाया जाता है, जो कैटेलिस्ट होता है. ये कैटेलिस्ट बॉडी में मेटाबॉलिज्म को बढ़ा देता है. इसका उपयोग आयुर्वेद की ऑलमोस्ट 70 से 80 प्रतिशत मेडिसिन में किया जाता है"

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काली मिर्च का कैसे करें उपयोग
आयुर्वेद डॉक्टर बताते हैं कि "अगर इसका भोजन में उपयोग करना है, तो 1 ग्राम प्रतिदिन इसका उपयोग किया जा सकता है. सोंठ, काली मिर्च और पीपल का 1:1:1 अनुपात कॉम्बिनेशन का मेडिसिन वर्ल्ड फेमस है, जिसे त्रिकटु कहा जाता है. इसका उपयोग ज्यादातर लोग सर्दी जुकाम को ठीक करने में करते हैं. लोग इसको चाय में डालकर भी पीते हैं. जिससे सर्दी जुकाम और बदन दर्द दूर होता है.

