AIIMS में किडनी ट्रांसप्लांट में नाम मात्र का खर्च, डॉ. अमलेश सेठ से जानिए कैसी हैं सुविधाएं, क्या है पूरा प्रॉसेस
एम्स यूरोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा किडनी ट्रांसप्लांट की शुरुआत के एक साल पूरे, डिपार्टमेंट के एचओडी अमलेश सेठ से ईटीवी भारत की विशेष बातचीत

Published : December 6, 2025 at 6:07 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की क्षमता पहले से 50 प्रतिशत ज्यादा बढ़ गई है. अब यहां पर यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में भी किडनी ट्रांसप्लांट हो रहे हैं, जिसकी शुरुआत पिछले साल हुई थी. उसका एक साल पूरा होने के उपलक्ष्य में एम्स ने जानकारी देते हुए बताया कि यूरोलॉजी डिपार्मेंट ने किडनी ट्रांसप्लांट की शुरुआत के एक साल के अंदर 21 किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं. बाकी अलग-अलग डिपार्टमेंट में किडनी ट्रांसप्लांट पहले से चल रहा था, जिनमें सर्जरी विभाग में प्रमुख रूप से पिछले 53 साल से किडनी ट्रांसप्लांट एम्स में हो रहा है.
एम्स यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख से खास बातचीत : एम्स यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रोफेसर अमलेश सेठ ने बताया कि पहले सिर्फ सर्जरी डिपार्टमेंट ही किडनी ट्रांसप्लांट करता था. नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में किडनी संबंधी समस्याएं देखी जाती थीं, लेकिन पिछले साल से हमने अपने यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया. हमारे यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के ऑपरेशन थिएटर की संख्या भी पिछले साल काफी बढ़ गई, इससे पूरे एम्स हॉस्पिटल की किडनी ट्रांसप्लांट की क्षमता में 50% से ज्यादा की वृद्धि हो गई है.
एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट में अब केवल 3 महीने की वेटिंग : डॉक्टर प्रोफेसर अमलेश सेठ ने बताया कि एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की 3 महीने की वेटिंग चल रही है, जो पहले बहुत ज्यादा होती थी. आगे और भी सुविधाओं का विस्तार होगा तो यह वेटिंग कम होने की संभावना है. उन्होंने बताया पूरे देश और दुनिया में किडनी मरीजों की संख्या बहुत अधिक है.
ट्रांसप्लांट में सबसे बड़ी समस्या परफेक्ट डोनर मैचिंग : ट्रांसप्लांट की डिमांड भी बहुत ज्यादा है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या परफेक्ट डोनर मैचिंग की आती है. परफेक्ट डोनर वही होता है जिसका ब्लड ग्रुप और टिशूज की मैचिंग रेसिपिएंट से हो जाए. डॉक्टर अमलेश सेठ ने बताया कि ट्रांसप्लांट के नियम वही हैं, जो अन्य ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए होते हैं.

डायलिसिस से ज्यादा बेहतर है किडनी ट्रांसप्लांट : किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर सरकार की गाइडलाइन एक ही है. ट्रांसप्लांट के बाद कम से कम 2 सप्ताह मरीज को अस्पताल में रखना होता है. इसके लिए हमारे पास यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में पांच बेड रिजर्व हैं. पूरे यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में किडनी मरीज के लिए 44 बेड हैं. उन्होंने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट से जो मरीज का डायलिसिस में बार-बार खर्च होता है वह किडनी ट्रांसप्लांट होने से बचता है और लाइफ भी बढ़ जाती है.

अब यूरोलॉजी डिपार्टमेंट कर रहा किडनी ट्रांसप्लांट :एम्स यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख ने बताया कि जब मरीज को किडनी में समस्या शुरू होती है तो उसका इलाज नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में होता है और जब वह ट्रांसप्लांट की स्थिति में पहुंच जाता है तो उसको यूरोलॉजी डिपार्टमेंट देखता है और फिर उसकी सारी जांच करके यूरोलॉजी डिपार्टमेंट ही उसके ट्रांसप्लांट की तैयारी करता है.
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