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खजुराहो में विदेशियों ने सजाई कछियाई घोड़ी, पैठाई और मुखौटा नृत्य के साथ नए साल के स्वागत में डूबे, देखें तस्वीरें

खजुराहो में हो रहे पारंपरिक आयोजन, देशी पर्यटक के साथ विदेशी भी ले रहे मजे, नए साल के जश्न में डूबे लोग.

KHAJURAHO NEW YEAR EVENT
खजुराहो में विदेशियों ने सजाई कछियाई घोड़ी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : December 31, 2025 at 2:55 PM IST

3 Min Read
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छतरपुर: मध्य प्रदेश का खजुराहो ऐतिहासिक शहर है, जो अपने खास मंदिरों और अनेक पर्यटन स्थल के लिए जाना जाता है. इस ऐतिहासिक शहर में नए साल का जश्न भी जोर-शोर से मनाया जाता है. यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. वहीं इस बार भी नए साल के जश्न में चार चांद लगाने के लिए पर्यटक तैयार हैं. पर्यटकों को लुभाने के लिए आदिवर्त जनजातीय लोककला एवं राज्य संग्रहालय, कला, संस्कृति और परंपरा का आयोजन किया जा रहा है.

जिसमें मध्य प्रदेश की विभिन्न जनजातियों की लोककला, पारंपरिक वेशभूषा, शिल्पकला व जीवनशैली को दर्शाया जा रहा है, जो पर्यटकों और कला प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है.

CHHATARPUR NEW YEAR CELEBRATION
कछियाई नृत्य की हुई शानदार प्रस्तुति (ETV Bharat)

जनजातीय कलाकारों ने निकाली रैली

चंदेल नगरी खजुराहो में आदिवर्त जनजातीय लोककला एवं राज्य संग्रहालय में आयोजित तीसरी स्थापना वर्षगांठ समारोह के चौथे दिन सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर दिखाई दिया. मंगलवार सुबह से लेकर देर रात तक लोक कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं का संगम देखने को मिला. खजुराहो में लोक,कला संस्कृति को जन-जन तक बिखरने के लिए जनजतीय कलाकरों द्वारा कला यात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से निकली.

FOREIGN TOURIST ENJOY FOLK SONGS
सड़क पर जनजातियों लोककला का आयोजन (ETV Bharat)

कछियाई नृत्य की हुई शानदार प्रस्तुति

इस यात्रा ने लोगों को लोक संस्कृति से जोड़ने का काम किया. वहीं लोगों ने यात्रा पर फूलों की बारिश की और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया. देश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति दी. इस दौरान एक कछियाई नृत्य देखने मिला, जो कुशवाहा समाज ही करता है. इसमें 12-15 पुरुष होते हैं, वे गाना गाते हैं और महिलाएं डांस करती हैं.

KHAJURAHO NEW YEAR PERFORMANCE
सांस्कृति कार्यक्रमों की प्रस्तुति (ETV Bharat)

पैठाई घोड़ी ने बांध समा

इसके बाद डिंडोरी से आई अंजलि बैगा ने बैगा जनजाति का कृत्य घोड़ी पैठाई किया. बैगा समुदाय दशहरा के दिन से इस घोड़ी पैठाई की शुरुआत करते हैं, जो दिसंबर माह के अंत तक करते हैं. इस नृत्य में एक गांव के पुरुष दूसरे गांव की महिलाओं के साथ डांस करते हैं.

KHAJURAHO NEW YEAR EVENT
पैठाई घोड़ी का डांस (ETV Bharat)

संगी मुखौटा नृत्य रहा आकर्षित का केंद्र

वही खजुराहो आए महाराष्ट्र के छबीलदास ने अपने सजीव संगी मुखौटा नृत्य से दर्शकों को रोमांचित कर दिया. लोकराग की आखिरी प्रस्तुति राजस्थान के सुरम नाच ने कालबेलिया व भवाई नृत्य से दी. इस प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल लूट लिया ओर परिसर को झूमने पर मजबूर कर दिया. राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा का प्रतीक कालबेलिया नृत्य आज भी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है.

भारतीय संस्कृति से रूबरू हो रहे पर्यटक

वहीं महाराष्ट से आए कलाकार छबीलदास ने बताया "खजुराहो मंदिरों की नगरी है. यहां देश-विदेश से लोग आते हैं. ऐसे में यहां पर प्रस्तुति देना मेरे लिए शोभाग्य की बात है."

KHAJURAHO NEW YEAR EVENT
आदिवासी कलाकारों ने निकाली रैली (ETV Bharat)

वहीं आदिवर्त जनजातीय संग्रहालय खजुराहो के प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया "3 साल पूरे होने पर 5 दिवसीय आयोजन चल रहा है. आज अंतिम दिन है, नए साल का उत्साह भी पर्यटक में देखा जा रहा है. जनजतीय कला, संस्क्रति को देखने देशी विदेशी पर्यटक रोजाना आते हैं, आज ज्यादा भीड़ होने की संभावना है."