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खजुराहो में मंच पर उतरा चक्रव्यूह, अभिमन्यु युद्ध ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध, भरतनाट्यम का जलवा

कथक, पुरुलिया छऊ और भरतनाट्यम की प्रस्तुतियों ने खजुराहो डांस फेस्टिवल में मचाई धूम, अभिमन्यु युद्ध की प्रस्तुति ने सबको चौंका दिया.

KHAJURAHO BHARATNATYAM PERFORMANCE
अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 22, 2026 at 3:36 PM IST

3 Min Read
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खजुराहो: अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह के दूसरे दिन कंदरिया महादेव और जगदम्बा माता मंदिरों पर परंपरा, सौंदर्य और सांस्कृतिक संवेदना का अद्भुत संगम देखने को मिला. जहां कथक, पुरुलिया छऊ और भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया. प्रस्तुति देखकर दर्शक भी हैरान रह गए.

अभिमन्यु युद्ध की प्रस्तुति देखते रहे गए दर्शक
खजुराहो नृत्य समारोह के दूसरे दिन उत्तर भारत के प्रचलित नृत्य कथक की रही. जिसने युवा नर्तक विश्वदीप, दिल्ली ने एकल नृत्य प्रस्तुति से जयपुर घराने की परंपराओं को मंच पर साकार कर किया. कलाकरों ने प्रस्तुति के माध्यम से परंपरा, सौंदर्य और सांस्कृतिक संवेदना का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया. दर्शकों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया. वहीं, प्रभात कुमार महतो एवं साथियों ने अभिमन्यु युद्ध का प्रसंग कर सबको चौंका दिया.

भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां ने खजुराहो डांस फेस्टिवल में मचाई धूम (ETV Bharat)

महाभारत युद्ध के 13वें दिन की लड़ाई में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु को चकव्यूह में नियम विरूद्ध मारा गया था. युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य के द्वारा रचित चक्रव्यूह को भेदकर अभिमन्यु ने जैसे ही अंदर प्रवेश किया वहां मौजूद सप्तरथी द्रोणाचार्य, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थमा, शकुनि, दंर्योधन, दुशासन के द्वारा घेर कर पीछे से युद्ध के नियम विरूद्ध मारा दिया गया. यह घटना महाभारत के सबसे दुखद एवं भावनात्मक दृश्यों में से एक थी. इस प्रस्तुति को कलाकारों द्वारा बहुत ही शानदार तरीके के प्रस्तुत किया.

Kandariya Mahadev Temple Khajuraho
पुरुलिया छऊ डांस ने जीता दर्शकों का मन (ETV Bharat)

विदेशी नृत्यांगना ने दी भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति
वहीं, दूसरे दिन विदेशी नृत्यांगना अक्मारल काइनाजरोवा, कजाकिस्तान ने भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति दी. उन्होंने 1993 से 1998 तक कलाक्षेत्र इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स चेन्नई से भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम में पत्रोपाधी ली है. उन्होंने अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ अलारिपु के साथ किया. चतुरस जाति एक ताल में निबद्ध इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने अपने गुरुओं के प्रति आदर दिखाया. अगली प्रस्तुति कालिदास रचित कुमार संभवम की श्रृंगार रस थी. इसके बाद पारंपरिक तिल्लाना एवं अंत में मंगलम के साथ प्रस्तुति का समापन हुआ.

KHAJURAHO DANCE FESTIVAL
कंदरिया महादेव में दिखा सौंदर्य और सांस्कृतिक का संगम (ETV Bharat)

आज होगा ओडिसी नृत्य
वहीं, कार्यक्रम प्रभारी प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया, ''52वें खजुराहो नृत्य समारोह के तीसरे दिन 22 फरवरी को शाम 6:30 बजे संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी थोकचोम इबेमुबि देवी, मणिपुर का मणिपुरी नृत्य, पद्मश्री दुर्गाचरण रनवीर, ओडिशा का ओडिसी नृत्य एवं सत्रीया केन्द्र समूह, असम का सत्रीया नृत्य प्रस्तुत होगा.