खैरागढ़ में SIR अभियान पर सवाल, रानी विभा सिंह का आरोप, राजा देवव्रत सिंह की तलाकशुदा पत्नी रिकॉर्ड में पत्नी के रूप में दर्ज
मतदाता सूची सुधार के नाम पर बड़ी लापरवाही का आरोप राजा देवव्रत सिंह की पत्नी रानी विभा सिंह ने लगाया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 31, 2025 at 9:07 PM IST
खैरागढ़: जिले में चल रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जिस अभियान का मकसद मतदाता सूची को साफ और सही बनाना था, उसी में अब भारी लापरवाही और संभावित रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप सामने आए हैं. मामला किसी और का नहीं बल्कि खैरागढ़ रियासत से जुड़े दिवंगत राजा देवव्रत सिंह, जो पूर्व विधायक और सांसद रह चुके हैं, से जुड़ा है.
दिवंगत राजा देवव्रत सिंह के रिकॉर्ड पर उठे सवाल: आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में उनकी वैवाहिक स्थिति को लेकर बड़ी चूक की गई है. रानी विभा सिंह ने आरोप लगाया है कि SIR टीम और संबंधित बीएलओ (Booth Level Officer) की लापरवाही के कारण आधिकारिक रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज की गई. जानकारी के मुताबिक, पद्मा देवी, जो दिवंगत देवव्रत सिंह की तलाकशुदा पत्नी रही हैं, उन्हें उदयपुर क्षेत्र के बीएलओ की ओर से अब भी उनकी पत्नी के रूप में दर्ज कर दिया गया.
गलती या रिकॉर्ड से छेड़छाड़?: रानी विभा सिंह का कहना है कि यह साधारण गलती नहीं, बल्कि रिकॉर्ड से गंभीर छेड़छाड़ का मामला लगता है. उन्होंने सवाल उठाया कि, क्या सरकारी दस्तावेजों में एक हिंदू पुरुष के नाम पर दो पत्नियां दर्ज की जा सकती हैं? अगर नहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

आम नागरिकों के दस्तावेज कितने सुरक्षित?: रानी विभा सिंह ने कहा कि जब एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि और राजपरिवार से जुड़े व्यक्ति के रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गलती हो सकती है, तो आम नागरिकों के दस्तावेजों की स्थिति का अंदाजा लगाना भी डराने वाला है.
रानी विभा सिंह ने रखी मांग
- पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए.
- दोषी SIR कर्मियों और बीएलओ पर कठोर कार्रवाई हो
- सभी गलत रिकॉर्ड को तुरंत सुधारा जाए
इतना गंभीर मामला सामने आने के बावजूद अब तक जिला प्रशासन या चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है. इससे आम लोगों के बीच नाराजगी और संदेह दोनों बढ़ रहे हैं. अब देखना यह है कि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन जवाबदेही तय कर लोकतंत्र में भरोसा बहाल करते हैं या नहीं.

