छुईखदान अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद नहीं मिला मुक्तांजलि वाहन, मालवाहक वाहन में शव ले जाने को मजबूर परिजन
मुक्तांजलि वाहन सेवा पर सवाल, CMHO बोले-उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी थी, समय के अभाव और सुविधा को देखते हुए निजी वाहन से निकले परिजन

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : May 30, 2026 at 3:10 PM IST
खैरागढ़ छुईखदान गंडई: जिले के छुईखदान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ ही मानवीय संवेदनाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं. पोस्टमॉर्टम के बाद शव को मुक्तांजलि वाहन भी नसीब नहीं हुआ. परिजन मालवाहक गाड़ी में शव ले जाने को मजबूर हुए.
क्या है मामला?
ग्राम भुरसूली निवासी जेलेब गोड (50 वर्ष) की छत से गिरने के कारण मौत हो गई. परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि शासन की मुक्तांजलि सेवा के तहत शव वाहन उपलब्ध होगा और वे अपने प्रियजन को सम्मानपूर्वक घर ले जा सकेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
घंटों इंतजार के बाद नहीं हुई व्यवस्था
परिजनों के अनुसार घंटों इंतजार के बावजूद अस्पताल प्रबंधन शव वाहन की व्यवस्था नहीं कर सका. आखिरकार दुख और बेबसी के बीच परिवार को एक मालवाहक वाहन का इंतजाम करना पड़ा और उसी में शव रखकर गांव ले जाना पड़ा. अस्पताल परिसर से निकली यह तस्वीर केवल एक शव की नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की तस्वीर बन गई.
बार-बार सामने आ रही शर्मनाक तस्वीरें
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह सिलसिला कब रुकेगा? जिले में यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले झूरानदी दोहरे हत्याकांड में मृत भाई-बहन के शवों को कबाड़ वाहन से गांव ले जाना पड़ा था. वहीं मोगरा के एक मासूम बच्चे की ट्रेन में मौत होने के बाद परिजन राजनांदगांव से बस में शव लेकर खैरागढ़ पहुंचे थे. हर घटना के बाद सवाल उठे, चर्चा हुई, लेकिन जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया.
मुक्तांजलि सेवा आखिर किसके लिए?
सरकार ने मुक्तांजलि सेवा इसलिए शुरू की थी ताकि किसी भी परिवार को अंतिम यात्रा के समय आर्थिक या व्यवस्थागत परेशानी का सामना न करना पड़े. लेकिन जब बार-बार शव वाहन उपलब्ध नहीं हो रहे हैं, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि यह सेवा कागजों में चल रही है या वास्तव में लोगों तक पहुंच रही है? अस्पताल में मौजूद लोगों ने भी प्रबंधन पर सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
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सीएमएचओ ने कहा- प्रक्रिया जारी थी
CMHO डॉ. आशीष शर्मा ने इस मामले में कहा कि पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शव को परिजनों के गृह ग्राम तक पहुंचाने के लिए मुक्तांजलि वाहन खैरागढ़ से भेजा जा रहा था. हालांकि वाहन के पहुंचने से पहले ही परिजनों ने समय के अभाव और अपनी सुविधा को देखते हुए निजी वाहन से शव को गांव ले जाने का निर्णय लिया.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुक्तांजलि सेवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी थी. समय के चलते परिजन ने निजी वाहन से निकले- CMHO डॉ. आशीष शर्मा
संवेदनशीलता या सिर्फ औपचारिकता?
एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और मानवीय सेवाओं के बेहतर संचालन के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर शोक में डूबे परिवारों को अपने प्रियजन का शव मालवाहक वाहनों में ढोना पड़ रहा है. यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है.

