जांजगीर-चांपा में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कहरा समाज के बड़े फैसले, मृत्यु भोज, दहेज मुक्त और जूता छिपाई पर बनाए नियम
जांजगीर में कहरा समाज का सामाजिक सम्मेलन हुआ. जिसमें अध्यक्ष ने कहा कि समाज की एकता बनाए रखने के लिए कई फैसले लेने होंगे.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 1, 2026 at 8:38 PM IST
जांजगीर-चांपा: जिला मुख्यालय के ऑडिटोरियम में आज छत्तीसगढ़ कहरा समाज द्वारा सामाजिक सम्मेलन और शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में समाज के प्रतिनिधियों ने कई अहम सामाजिक फैसले लिए और एकजुटता का संदेश दिया. फैसलों में दहेज मुक्त विवाह, जूता छिपाई रस्म और अंतिम संस्कार से जुड़े विषय शामिल हैं.
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बड़े फैसले
सम्मेलन में समाज ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनमें मृत्यु के समय कफन के नाम पर अधिक कपड़ा देने की परंपरा खत्म करने का निर्णय लिया गया. कफन पर होने वाले अतिरिक्त खर्च की राशि पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद के रूप में देने का फैसला लिया गया. इसके साथ ही मृत्यु भोज को साधारण रखने और अधिक खर्चीले पकवानों पर रोक लगाई गई. समाज ने कहा कि इन फैसलों से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलेगी और समाज में एकरूपता आएगी.
समाज के अन्य फैसले
- दहेज मुक्त सामूहिक विवाह को बढ़ावा
- शादी में महंगे भोज पर प्रतिबंध
- जूता-छिपाई रस्म में केवल 500 रुपये सगुन देने का निर्णय
- बच्चों, खासकर बेटा-बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर

नए पदाधिकारियों ने ली शपथ
कार्यक्रम में प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण भी कराया गया. इसमें मुकेश कुमार ने अध्यक्ष और गेन्दलाल कटकवार ने उपाध्यक्ष पद की शपथ ली. इसके अलावा हरिहर आदित्य महासचिव और कमल जलतारे कोषाध्यक्ष बने. सचिव पद के लिए अशोक आदित्य और भरत कहरा ने सहसचिव की शपथ ली. नव-निर्वाचित पदाधिकारियों ने समाज की एकता बनाए रखने और कुरीतियों को खत्म करने की शपथ ली.
समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है. दहेज मुक्त समाज बनाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का हमने संकल्प लिया है- मुकेश कुमार, समाज अध्यक्ष
विधायक ब्यास कश्यप ने की 20 लाख की घोषणा
कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने समाज की एकता की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी समाज के विकास के लिए एकजुटता जरूरी है. उन्होंने जांजगीर में सामाजिक भवन निर्माण के लिए 20 लाख रुपये देने की घोषणा की और समाज के अधिकारों के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया.

मत्स्य व्यवसाय को लेकर आंदोलन की तैयारी
कहरा समाज ने अपने पारंपरिक व्यवसाय मत्स्य पालन में प्राथमिकता की मांग भी उठाई. समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि मत्स्य विभाग द्वारा गैर-मछुआरा समितियों को तालाबों का ठेका दिए जाने का विरोध किया जाएगा. इसके लिए मछुआ समाज के बैनर तले आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है.

