एक साल बाद सदन में पहुंचे कवासी लखमा, पक्ष विपक्ष के विधायकों ने किया अभिवादन, नेताम बोले 'हम सबके हैं दादी'
पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने जमानत पर बाहर आने के बाद सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया.इस दौरान उन्होंने विधायकों से मुलाकात की.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 23, 2026 at 2:58 PM IST
रायपुर : छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में आरोपी कांग्रेस के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा जमानत मिलने के बाद पहली बार विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए.आपको बता दें कि कवासी लखमा सदन में एक साल बाद पहुंचे हैं. विधानसभा पहुंचने के बाद कवासी लखमा ने कांग्रेस और बीजेपी के विधायकों से मुलाकात की. इस दौरान सभी ने गले मिलकर कवासी लखमा का स्वागत किया.
शराब घोटाला मामले में जमानत पर हुए हैं रिहा
आपको बात दें शराब घोटाला मामले में जमानत पर जेल से बाहर आए कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कुछ शर्तों के साथ सत्र में शामिल होने की अनुमति दी है. जिसमें कवासी लखमा पर नो स्पीच का नियम लागू होगा.आईए बताते हैं कि कवासी लखमा को किन शर्तों के साथ सदन में उपस्थित रहने की अनुमति दी गई है.
सत्ता पक्ष के नेताओं से आत्मीय मुलाकात और गलबाँहें
सत्र के दौरान एक दुर्लभ दृश्य तब देखने को मिला जब कवासी लखमा दलगत राजनीति को किनारे रखकर भाजपा नेताओं से मिलने पहुंच गए. सदन की औपचारिक कार्यवाही के बीच लखमा सबसे पहले मंत्री रामविचार नेताम के पास गए और उनसे गले मिले. इसके बाद उन्होंने भाजपा के दिग्गज विधायक अजय चंद्राकर से भी गर्मजोशी के साथ मुलाकात की. सदन के भीतर पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच की यह आत्मीयता देख कांग्रेस के अन्य विधायक भी हैरान रह गए. यह दृश्य सदन में आपसी सौहार्द और व्यक्तिगत रिश्तों की गहराई को दर्शा रहा था.

रामविचार नेताम बोले 'कवासी लखमा हम सबके दादी'
सदन में कवासी लखमा के स्वागत को लेकर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बेहद आत्मीय बयान दिया. उन्होंने लखमा को 'दादी' (बस्तर में बड़ों के लिए सम्मानजनक संबोधन) कहकर संबोधित करते हुए कहा कि सदन में उनकी कमी लंबे समय से खल रही थी. नेताम ने स्पष्ट किया कि कवासी लखमा एक साल के लंबे अंतराल के बाद सदन लौटे हैं, जिसका वे व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से स्वागत करते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि लखमा का सम्मान पूरा सदन करता है और उनकी वापसी से लोकतांत्रिक चर्चाओं में जीवंतता आएगी.
- नो स्पीच भाषण ना देने की शर्त का कड़ाई से पालन करना होगा
- विधानसभा के अंदर और बाहर चल रही गुण दोष पर चर्चा नहीं करेंगे
- कवासी लखमा की उपस्थिति केवल बजट सत्र चलने तक रहेगी
- कवासी लखमा बजट सत्र के दौरान अपने हिस्से की चर्चा में भाग लें सकेंगे
इन शर्तों का कड़ाई से पालन करने के आधार पर विधानसभा में उपस्थित होने की अनुमति दी जा रही है. यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है तो सदन की गरिमा को देखते हुए तत्काल अनुमति को रद्द किया जा सकता है.
कानूनी प्रक्रिया और विधानसभा अध्यक्ष की विशेष अनुमति
कवासी लखमा की बजट सत्र में भागीदारी एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद संभव हो पाई है. लखमा की सदन में उपस्थिति को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंचा था, जहां अदालत ने अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर छोड़ दिया था. 6 फरवरी को लखमा ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बजट सत्र में शामिल होने का अनुरोध किया था. इसके बाद 7 फरवरी को महाधिवक्ता (Advocate General) से कानूनी राय ली गई. उनके अभिमत और विधानसभा अध्यक्ष के विवेकपूर्ण निर्णय के आधार पर कुछ शर्तों के साथ उन्हें सत्र में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गई.
एक साल बाद मिली जमानत
कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को शराब घोटाले में 25 जनवरी 2025 को ईडी ने गिरफ्तार किया था. इस दौरान वो साल भर तक जेल में रहे.कवासी लखमा ने इस दौरान जमानत को लेकर कई बार आवेदन दिया,लेकिन उनकी बेल पिटिशन रिजेक्ट हुई.जिसके कारण वो एक साल तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सके.इस बार सुप्रीम कोर्ट से कवासी लखमा को 3 फरवरी को जमानत मिली, जिसके बाद वो जेल से बाहर आए हैं.
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