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कौशांबी पटाखा गोदाम विस्फोट; एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत से कोहराम, पिता ने अंतिम संस्कार से किया इंकार

एक अन्य पीड़ित पिता दिव्यांग बेटे की तलाश में भटक रहा, कोई नहीं सुन रहा फरियाद

कौशांबी पटाखा गोदाम विस्फोट
कौशांबी पटाखा गोदाम विस्फोट में मजदूर लापता. (Photo Credit : ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 1, 2026 at 1:04 PM IST

3 Min Read
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कौशांबी : पिपरी थाना क्षेत्र स्थित महमूदपुर मनौरी गांव में हुए पटाखा विस्फोट कांड के मलबे से अब सिर्फ बारूद का धुआं नहीं, बल्कि अपनों को खो चुके बेबस परिवारों की चीखें गूंज रही हैं. गया प्रसाद के 4 बच्चों की इसमें मौत हो गई है. पिता ने मुआवजा न मिलने पर अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया है. हादसे के बाद एक ऐसा दुखद मामला सामने आया है. चरवा इलाके के पकसराई निवासी सरजू अपने दिव्यांग बेटे सुनील की तलाश में घटनास्थल और अधिकारियों के आसपास भटक रहे हैं. घटनास्थल पर बेटे की बाइक, चप्पलें मिलीं, लेकिन बेटे का कुछ पता नहीं चल रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों के पास बुजुर्ग सरजू के सवालों का कोई जवाब नहीं है.

विस्फोट ने एक परिवार के चार बच्चे छीन लिए. (Video Credit : ETV Bharat)

चरवा इलाके के पकसराई निवासी सरजू मौर्या का कहना है कि बेटा सुनील कुमार मौर्या पास ही स्थित एक बूंदी फैक्ट्री में काम करता था. सुनील पैरों से दिव्यांग था. जिस वक्त महमूदपुर मनौरी में पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ, उस वक्त सुनील वहीं मौजूद था. धमाके के बाद जब धूल का गुबार छंटा तो मौके पर सुनील की बाइक खड़ी मिली, चप्पलें मिलीं, लेकिन सुनील का कोई अता-पता नहीं था.

दिव्यांग बेटे की तलाश में भटक रहे सूरज मौर्या. (Video Credit : ETV Bharat)

सरजू अब बेटे की तलाश में अधिकारियों से फरियदा करते फिर रहे हैं."साहब, मेरा बेटा दिव्यांग था... जब धमाका हुआ तो वो भाग भी नहीं सकता था. उसकी गाड़ी यहीं खड़ी है". सरजू का कहना है कि पुलिसवाले कभी कहते हैं प्रयागराज एसआरएन जाओ, कभी कहते हैं कौशांबी पोस्टमार्टम हाउस में पता करो. हम कहां-कहां जाएं.

एक ही परिवार के 4 मासूमों की मौत से कोहराम, अंतिम संस्कार करने से इनकार

महमूदपुर मनौरी इलाके में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने एक पूरे परिवार की खुशियां उजाड़ दी हैं. धमाके की तीव्रता इतनी भयानक थी कि पास ही स्थित गया प्रसाद का मकान भरभराकर गिर गया, जिसके मलबे में दबकर उनके चार मासूम बच्चों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. चार मासूमों के शव गांव पहुंचने पर मातम पसरा हुआ है. वहीं उचित मुआवजे की मांग पर पीड़ित परिवार ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया.

मीरपुर गांव के रहने वाले गया प्रसाद साहू के चार बच्चों की पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में दर्दनाक मौत हुई थी. पत्नी अनिता साहू अस्पातल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है. मरने वालों में बेटी जानवी समेत तीन बेटे आदित्य, रवि और अमित शामिल हैं. जब चारों मासूमों के शव उनके पैतृक गांव मीरपुर लाए गए तो इलाके में कोहराम मच गया. पीड़ित पिता ने साफ कह दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे बच्चों का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे.

एक फास्ट फूड की दुकान पर काम कर परिवार पालने वाले गया प्रसाद का हंसता-खेलता आशियाना एक पल में मलबे के ढेर में तब्दील हो गया. घटना से आक्रोशित पीड़ित पिता और ग्रामीणों ने शवों का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है. मौके पर तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासनिक अधिकारी परिजनों को समझाने में जुटे हैं.

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