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21 साल तक गुलजार रहा यह हॉल्ट, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि थम गए ट्रेनों के पहिये

कटौना हॉल्ट पर सात जोड़ी लोकल ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर ग्रामीण पांच वर्षों से आंदोलनरत हैं, रेल चक्का जाम की चेतावनी दी.

कटौना हाल्ट पर ट्रेनों के ठहराव के लिए प्रदर्शन
कटौना हाल्ट पर ट्रेनों के ठहराव के लिए प्रदर्शन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 6, 2026 at 3:10 PM IST

4 Min Read
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जमुई: कटौना हॉल्ट पर कोविड काल में बंद किए गए सात जोड़ी लोकल ट्रेनों के ठहराव को बहाल कराने की मांग को लेकर आसपास के करीब 50 गांवों के लोग पिछले पांच वर्षों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं. ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल, आमरण अनशन और धरना दे रहे हैं. अब उन्होंने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर रेल चक्का जाम किया जाएगा.

50 गांवों के लोगों की जीवनरेखा है कटौना हॉल्ट : ग्रामीणों का कहना है कि कटौना हॉल्ट आसपास के लगभग 50 गांवों के लोगों के लिए सस्ता और सुलभ आवागमन का प्रमुख साधन रहा है. किसान, मजदूर, नौकरीपेशा लोग और छात्र छात्राएं इसी हॉल्ट से जमुई, किउल, झाझा और आगे तक लोकल ट्रेनों से सफर करते थे.

कटौना हॉल्ट पर लोकल ट्रेनों के ठहराव की मांग तेज (ETV Bharat)

कोविड के दौरान बंद हुआ ट्रेनों का ठहराव : स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1999 में कटौना हॉल्ट बनने के बाद लगातार 21 वर्षों तक यहां सात जोड़ी लोकल ट्रेनों का ठहराव होता रहा. कोविड 19 महामारी के दौरान रेलवे ने इन ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया, जिसे आज तक बहाल नहीं किया गया.

सात जोड़ी लोकल ट्रेनों के ठहराव की मांग : ग्रामीण जिन ट्रेनों के ठहराव की मांग कर रहे हैं, उनमें 03213/03214 झाझा पटना, 13029/13030 झाझा मोकामा, 03273/03274 देवघर पटना, 03573/03574 जसीडीह किउल, 03385/03386 झाझा गया, 13207/13208 जसीडीह पटना और 03571/03572 जसीडीह मोकामा शामिल हैं. इन सभी ट्रेनों का ठहराव कोविड से पहले कटौना हॉल्ट पर होता था.

50 गांवों के लोगों की जीवनरेखा है कटौना हॉल्ट
50 गांवों के लोगों की जीवनरेखा है कटौना हॉल्ट (ETV Bharat)

ट्रेन के ठहराव न होने से बढ़ा आर्थिक बोझ : ग्रामीणों का कहना है कि ट्रेनें बंद होने के बाद उन्हें ऑटो, टोटो और अन्य निजी वाहनों से यात्रा करनी पड़ रही है. पहले जहां प्रतिदिन 10 से 20 रुपये में यात्रा पूरी हो जाती थी, वहीं अब 100 रुपये या उससे अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जो गरीब परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ है.

17 महीने पहले मिली थी स्वीकृति : आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय निवासी चन्द्रचूड़ सिंह ने बताया कि 9 जनवरी 2025 को लोकल ट्रेनों के पुनः ठहराव की स्वीकृति मिल चुकी है. इसके बावजूद 17 महीने बीत जाने के बाद भी कटौना हॉल्ट पर ट्रेनों का ठहराव शुरू नहीं हो सका है.

ट्रेन के ठहराव के लिए आंदोलन
ट्रेन के ठहराव के लिए आंदोलन (ETV Bharat)

''तत्कालीन रेल राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह के प्रयास से वर्ष 1999 में कटौना हॉल्ट का निर्माण हुआ था. उसी समय करीब 35 एकड़ रेलवे भूमि पर आरपीएसएफ (RPSF) ट्रेनिंग सेंटर की भी योजना बनी और भूमि पूजन हुआ, लेकिन बाद में यह परियोजना अधूरी रह गई.''- चन्द्रचूड़ सिंह, आंदोलन के नेतृत्वकर्ता

युवाओं में बढ़ रहा आक्रोश : युवा छात्र केडी शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन मिला, लेकिन आज तक ट्रेनों का ठहराव शुरू नहीं हुआ. वहीं छात्र मल्लू तिवारी ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय केवल वादे किए जाते हैं, जबकि गरीबों की जरूरतों की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज होगा.

50 गांवों के लोगों की जीवनरेखा है कटौना हॉल्ट
कटौना हॉल्ट पर सात जोड़ी लोकल ट्रेनों के ठहराव की मांग (ETV Bharat)

आरपीएफ ने पहुंचकर संभाला मोर्चा : कटौना हॉल्ट पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के जुटने की सूचना मिलने पर झाझा आरपीएफ के इंस्पेक्टर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया, जिसके बाद फिलहाल रेल चक्का जाम का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया.

ग्रामीणों की मांग : ग्रामीणों की मांग है कि कटौना हॉल्ट पर कोविड से पहले की तरह सातों जोड़ी लोकल ट्रेनों का ठहराव तत्काल बहाल किया जाए, ताकि 50 गांवों के लोगों को फिर से सस्ती, सुरक्षित और सुलभ रेल सुविधा मिल सके.

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