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कानपुर की अनूठी परंपरा; होली पर आठ दिनों तक बंद रहता है थोक बाजार

होली के दिन से गंगा मेला तक हटिया, नयागंज, एक्सप्रेस रोड, मूलगंज समेत सभी प्रमुख बाजार बंद रहते हैं.

कानपुर में होली का उल्लास.
कानपुर में होली का उल्लास. (Photo Credit : ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : March 4, 2026 at 8:19 AM IST

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कानपुर : अंग्रेजों के दौर से शुरू हुई होली और गंगा मेला की परंपरा कानपुर के लोग आज भी निभा रहे हैं. कानपुर में आठ दिनों तक होली मनाने की अनोखी परंपरा है. इस दौरान कानपुर सेंट्रल स्टेशन से कलेक्टरगंज, मूलगंज, नयागंज, हटिया, बर्तन बाजार समेत तमाम बड़े थोक बाजार बंद रहते हैं. यह परंपरा कब-कैसे और क्यों पड़ी ईटीवी भारत की रिपोर्ट से जानें....

कानपुर में होली की अनूठी परंपरा. देखें पूरी खबर (Video Credit : ETV Bharat)

दरअसल, कानपुर के व्यापारी होली से ठीक एक दिन पहले से लेकर गंगा मेला तक (सातवें दिन) अपनी दुकानें बंद रखते हैं. यह रवायत व्यापारी अंग्रेजी शासन काल के समय से निभा रहे हैं. होलिका दहन के बाद से रंग खेलने की शुरुआत होती है और यहां रोजाना किसी न किसी बहाने से लोग एक दूसरे पर डालते हैं. साथ ही अपनी खुशियां साझा करते हैं. कई व्यापारी अपने परिवार के साथ शहर से बाहर घूमने भी चले जाते हैं. यह सिलसिला गंगा मेला तक चलता है. इसके अगले दिन से सभी बाजार आम दिनों की तरह खुल जाते हैं. इसके पीछे काफी दिलचस्प कहानी है.


फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल के मुताबिक अंग्रेजों को जवाब देने के साथ ही कानपुर शहर में पिछले कई साल से व्यापारी एक उत्सव के रूप में सात से आठ दिनों तक होली पर अपनी दुकानें बंद रखते हैं. इस दौरान वे घूमते-फिरते हैं. अपनी नींद पूरी करते हैं. परिवार के साथ समय बिताते हैं. थोक बाजार होने के चलते दूसरे शहरों से जो कारोबारी आते हैं, वह भी होली से लेकर गंगा मेला तक नहीं आते. हालांकि, गंगा मेला के बाद से दुकानें खुल जाती हैं.

भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा का कहना है कि देश में केवल कानपुर एक ऐसा शहर है जहां गंगा मेला पर्व का आयोजन होता है. गंगा मेला का अपना रोचक इतिहास है. अंग्रेजों ने जब यहां के युवकों को रंग खेलने पर जेल में बंद किया तो उससे कानपुर की जनता बहुत नाराज हुई. सभी ने अपना काम बंद कर दिया था. हालांकि, एक हफ्ते में जब युवकों की रिहाई के आदेश हुए तो फिर से सभी ने खूब रंग खेला, लेकिन दुकानें बंद रहीं. तब से चला यह सिलसिला परंपरा के तौर पर स्थापित हो गया. कानपुर में होली पर सात से आठ दिनों तक बंदी का माहौल रहता है.

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