कानपुर में साइबर फ्रॉड का खुलासा: तोमर गैंग को बैंक खाते देने वाले सुमित और नवीन गिरफ्तार, 5 खातों से 14 करोड़ की ठगी
आरोपी तोमर गैंग को म्यूल बैंक खाते देते थे. इनमें स्टॉक मार्केट, ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगे गए 14 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : May 29, 2026 at 7:20 PM IST
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर क्राइम सेल और रावतपुर थाना पुलिस ने एक ऐसे बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है जो पूरे देश में सक्रिय था. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो शातिर साइबर अपराधियों को धर-दबोचा है, जो इस पूरे गैंग के मुख्य मददगार थे.
ये आरोपी भोले-भाले लोगों को WhatsApp ग्रुप में जोड़कर स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग, IPO और ऑनलाइन गेमिंग ऐप के नाम पर अरबों की ठगी करने वाले गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे.
14 करोड़ का संदिग्ध ट्रांजेक्शन: पुलिस द्वारा चिन्हित किए गए महज 5 बैंक खातों की शुरुआती जांच में ही करीब 14 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आया है. गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान सुमित कश्यप और नवीन श्रीवास्तव के रूप में हुई है. ये दोनों शातिर लंबे समय से रावतपुर थाना क्षेत्र में छिपकर इस काले कारोबार को अंजाम दे रहे थे. डीसीपी पश्चिम एसएम. कासिम आबिदी ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर लगातार साइबर फ्रॉड से संबंधित शिकायतें मिल रही थीं.
म्यूल बैंक खातों का हुआ खुलासा: कानपुर की साइबर टीम ने जब इन डिजिटल शिकायतों का गहन एनालिसिस किया, तो 5 विशेष संदिग्ध बैंक खातों का पता चला. इन चिन्हित 5 खातों के खिलाफ राष्ट्रीय पोर्टल पर पहले से ही कुल 13 गंभीर शिकायतें दर्ज थीं. जब पुलिस ने इन खातों के लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले, तो उसमें 14 करोड़ रुपये का भारी ट्रांजेक्शन देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. पुलिस जांच के अनुसार, पकड़े गए दोनों अभियुक्त खुद सीधे तौर पर लोगों से ठगी की बात नहीं करते थे, बल्कि वे इस पूरे सिंडिकेट की मुख्य रीढ़ थे.
दिल्ली के तोमर गैंग से कनेक्शन: ये लोग विभिन्न गरीब, मजदूर या सीधे-साधे व्यक्तियों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी तरीके से म्यूल अकाउंट्स खुलवाते थे. पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे इन एक्टिवेटेड खातों को दिल्ली में सक्रिय 'तोमर' नाम के एक मुख्य सरगना को ऊंचे दामों पर उपलब्ध कराते थे. तोमर का गिरोह देश भर के लोगों को घर बैठे ट्रेडिंग और गेमिंग के बहाने ठगता था और ठगी की पूरी रकम को तुरंत इन्हीं 5 खातों में ट्रांसफर करा देता था. डीसीपी पश्चिम ने बताया कि बैंकिंग सिक्योरिटी सिस्टम और पुलिस की नजरों से बचने के लिए आरोपी बेहद शातिराना तरीका अपनाते थे.
मनी ट्रेल काटने का शातिर तरीका: जैसे ही ठगी का शिकार हुए किसी व्यक्ति की रकम इन खातों में क्रेडिट होती थी, ये लोग तुरंत चेक और ATM के माध्यम से उसका कैश विड्रॉ कर लेते थे. तत्काल नकद रुपया निकाल लेने से पैसों की मनी ट्रेल पूरी तरह कट जाती थी, जिससे मुख्य अपराधियों की लोकेशन और पहचान तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता था. गिरफ्तार अभियुक्त सुमित कश्यप कोई नौसिखिया अपराधी नहीं है, बल्कि वह साइबर अपराध जगत का एक पुराना और शातिर खिलाड़ी है. उसको इससे पहले भी इसी तरह के संगठित साइबर फ्रॉड के मामले में गुरुग्राम (हरियाणा) पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था.
फॉरेंसिक जांच से कसेगी नकेल: क्राइम रिकॉर्ड के मुताबिक सुमित के खिलाफ पूर्व में भी कुल 4 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज पाए गए हैं. पुलिस ने पकड़े गए अभियुक्तों के पास से ठगी में इस्तेमाल होने वाले कई मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं. डीसीपी कासिम आबिदी ने बताया कि पुलिस टीम का प्राइमरी इन्वेस्टिगेशन और बैंक फॉरेंसिक ऑडिट अभी जारी है. पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन खातों में देश के किन-किन राज्यों से पैसा आया और उसे कहां ट्रांसफर किया गया.
कई और फर्जी खातों की आशंका: दोनों आरोपी पिछले एक लंबे समय से इस अवैध धंधे में सक्रिय हैं, इसलिए आशंका है कि इन्होंने तोमर गैंग को कई और फर्जी खाते भी बांटे होंगे. पुलिस बरामद किए गए मोबाइल्स को फॉरेंसिक टीम की मदद से खंगाल रही है, जिससे इस नेटवर्क के अन्य बैंक खातों और छिपकर काम कर रहे सदस्यों का बड़ा खुलासा होने की पूरी उम्मीद है. फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ ठोस डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर कड़ी विधिक कार्रवाई की है. इसके बाद दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया है और पुलिस अब इस गिरोह की आगे की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है.
यह भी पढ़ें- कानपुर में बुलडोजर एक्शन, 3 महीने में 1500 बीघा ज़मीन कब्जों से हुई खाली

