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कानपुर में करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गैंग का पर्दाफाश, 12500 सिम कार्ड के साथ 5 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने फर्जी सिम व ओटीपी के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किया है.

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एडिशनल डीसीपी के नेतृत्व में बनी एसआईटी, खंगाला जाएगा ठगों का देशव्यापी नेटवर्क. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 30, 2026 at 9:06 PM IST

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कानपुर: उत्तर प्रदेश की कानपुर कमिश्नरेट पुलिस और साइबर सेल ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार कई राज्यों से जुड़े हैं. इस शातिर गिरोह के सक्रिय सदस्य फर्जी सिम कार्ड और फर्जी OTP लोगों के मोबाइल पर भेजकर अब तक करोड़ों रुपये की डिजिटल ठगी कर चुके थे. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के NCRB पोर्टल पर इस गिरोह के खिलाफ देश भर से कई गंभीर शिकायतें पहले से दर्ज थीं.

इनमें से कुल चार शिकायतें अकेले कानपुर शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज कराई गई थीं, जिस पर पुलिस लगातार काम कर रही थी.

पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल. (Video Credit: ETV Bharat)

पांच शातिर जालसाज गिरफ्तार: कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जिन पांच मुख्य आरोपियों को अरेस्ट किया गया है, वे बेहद शातिर हैं. गिरफ्तार आरोपियों में रिषी शर्मा, उत्सव त्यागी और दुर्गेश कुमार उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं. इनके अलावा गिरोह के दो अन्य सदस्यों में अजय मित्तल नई दिल्ली का और सचिन हरियाणा का निवासी बताया जा रहा है. पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि कुछ दिनों पहले शहर के केशव अग्निहोत्री और दिव्यांश पांडेय ने पश्चिम जोन के साइबर सेल कार्यालय में शिकायत दी थी.

साढ़े बारह हजार SIM कार्ड बरामद: पीड़ितों ने खुद के साथ करीब 3.87 लाख रुपये की बड़ी साइबर ठगी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इस वीआईपी केस के बाद सर्विलांस टीम और पनकी थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर आरोपियों की तलाश शुरू की थी. पुलिस ने अथक प्रयास के बाद उक्त पांचों आरोपियों को पुख्ता डिजिटल साक्ष्यों के साथ दबोच लिया. जामा तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से भारी मात्रा में कुल 12.5 हजार अवैध सिम कार्ड बरामद हुए हैं, जिसे देखकर पुलिस टीम भी हैरान रह गई.

कानपुर में था कॉल सेंटर खोलने का प्लान: बरामद किए गए सिम कार्डों में से 659 सिम पूरी तरह से एक्टिवेटेड पाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए हो रहा था. पुलिस आयुक्त ने बताया कि ये शातिर आरोपी वर्तमान में पूरे देशभर के कई बड़े शहरों में अवैध कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे. पुलिस की गिरफ्त में आने से पहले उनकी योजना कानपुर के भीतर भी एक हाईटेक कॉल सेंटर खोलने की थी. वे अपने खास जानकारों और एजेंटों को ये फर्जी सिम बांटकर सीधे आम लोगों से निवेश के नाम पर ठगी कराते थे.

जांच के लिए SIT का गठन: मासूम लोगों के पास लुभावने इंवेस्टमेंट प्लान और ऑनलाइन सामान खरीदने के फर्जी मैसेज भेजे जाते थे. इसके एवज में जो भी फंसाई गई राशि होती थी, उसे ये आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए बैंक खातों में मंगा लेते थे. अवैध सिम कार्ड के अलावा आरोपियों के पास से कई महंगे लैपटॉप, दर्जनों स्मार्टफोन समेत अन्य कूटरचित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि इस बेहद संवेदनशील मामले में गहराई से जांच के लिए एक विशेष SIT टीम का गठन कर दिया गया है.

पांच राज्यों में फैला था नेटवर्क: इस नवगठित एसआईटी में एडिशनल डीसीपी स्तर के वरिष्ठ अफसर शामिल हैं, जो इन आरोपियों का पूरा अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय नेटवर्क खंगालेंगे. अभी तक की प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपियों ने गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड में अपना मजबूत नेटवर्क फैला रखा था. इन राज्यों में भी इस गिरोह ने अब तक सैकड़ों निर्दोष लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाकर करोड़ों रुपये ऐंठे हैं. पुलिस अब इनके बैंक खातों को फ्रीज कराने और मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है.

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