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पति की शहादत के बाद पत्नी सेना में बनेंगी लेफ्टिनेंट, हिमाचल की वीर नारी ने देशभर में किया टॉप

कल्पना धीमान ने पति की शहादत के बाद SSC महिला नॉन-टेक्निकल परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया, जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी.

कल्पना धीमान
कल्पना धीमान (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 19, 2026 at 12:01 PM IST

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Updated : August 19, 2026 at 3:47 PM IST

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कांगड़ा: पति की शहादत के बाद जिंदगी जैसे थम-सी गई थी, लेकिन कल्पना धीमान ने टूटने के बजाय खुद को संभाला और उसी दर्द को अपनी ताकत बना लिया आंखों में पति की याद और दिल में उनके सपनों को लेकर कल्पना ने देशसेवा की राह पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया महज एक साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने एसएससी महिला नॉन-टेक्निकल-124 परीक्षा में वीर नारी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर अपने परिवार और पूरे फतेहपुर क्षेत्र का नाम रोशन किया.

जिला कांगड़ा की विधानसभा फतेहपुर की उपतहसील राजा का तालाब की निवासी कल्पना धीमान अपनी इस सफलता का श्रेय अपने दिवंगत पति मेजर अंकित धीमान की प्रेरणा और अपने ससुर जनवेद कुमार के मजबूत साथ को देती हैं पति की शहादत के बाद जब जीवन का सबसे कठिन दौर सामने था, तब ससुर ने बेटी की तरह उनका साथ दिया और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया.

एक साल में बदल दी जिंदगी की दिशा

पति की शहादत के बाद कल्पना ने खुद को संभाला और एसएससी की तैयारी शुरू की, लेकिन रास्ता आसान नहीं था, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट था कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने महज एक साल में परीक्षा में वीर नारी श्रेणी में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया कल्पना इससे पहले आर्मी स्कूल में शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं अब सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह देशसेवा की नई जिम्मेदारी संभालेंगी. उनका सैन्य प्रशिक्षण अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी है.

पति की यादों को बनाया अपनी ताकत

मेजर अंकित धीमान अप्रैल 2025 में कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात रहते हुए देशसेवा के दौरान एक ऑपरेशन में वीरगति को प्राप्त हुए थे उनकी शहादत ने परिवार को गहरा आघात दिया, लेकिन कल्पना ने उस दर्द के आगे खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया पति की यादों को अपने भीतर संजोए कल्पना ने उनके पदचिह्नों पर चलने का फैसला किया वह बताती हैं कि मेजर अंकित हमेशा उन्हें अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने और अपने विजन के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करते थे. आज वही सीख उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बन गई है.

जिस राह पर पति चले, उसी राह पर बढ़ीं कल्पना

पति ने वर्दी पहनकर देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया अब कल्पना भी उसी वर्दी को पहनकर देशसेवा की नई पारी शुरू करने जा रही हैं यह केवल एक नौकरी या उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके लिए पति के अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने जैसा संकल्प है. कल्पना धीमान की कहानी उस हौसले की कहानी है, जहां शहादत का दर्द कमजोरी नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा बन गया पति की यादों को दिल में रखकर उन्होंने खुद को संभाला, मेहनत की और एक साल में देशभर में पहला स्थान हासिल किया उनकी यह उपलब्धि परिवार के लिए गर्व और पूरे क्षेत्र के लिए भावुक कर देने वाला गौरव का क्षण है.

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Last Updated : August 19, 2026 at 3:47 PM IST