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मजदूरों ने सुक्खू सरकार पर लगाए ये आरोप, इस मामले पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

क्लेम सेटल न होने पर श्रमिकों में भारी गुस्सा है. इसे लेकर आज उन्होंने धर्मशाला में प्रदर्शन भी किया.

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते श्रमिक
सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते श्रमिक (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : April 17, 2026 at 2:19 PM IST

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कांगड़ा: धर्मशाला में शुक्रवार को जिला भर के श्रमिकों ने कचहरी अड्डा में प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना रोष प्रकट किया. कई तरह के क्लेम अटके होने के कारण श्रमिमकों ने अपना रोष प्रकट किया. प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने कहा कि क्लेम सेटल न होने पर उग्र आंदोलन से परहेज नहीं किया जाएगा.

वहीं श्रमिकों ने प्रदेश सरकार पर अनदेखी का आरोप भी लगाया. ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर के राज्य महासचिव रविंद्र सिंह के नेतृत्व में पहुंचे श्रमिकों ने कहा कि उनके क्लेम को लेकर तरह-तरह के आब्जेक्शन लगाए जा रहे हैं. निर्माण कामगार लाभार्थियों को 3 वर्ष से सहायता राशि प्राप्त नहीं हो रही है. कानूनी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं केवल दीवारों और बसों पर चिपकाई जा रही हैं. प्रदर्शन में पहुंचे श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कल्याण बोर्ड पिछले 3 सालों से क्रमिक ऑब्जेक्शन लगाता जा रहा है. छात्रवृत्ति, शादी विकलांगता, चिकित्सा मृत्यु पेंशन जो कि भारतीय कानून के अंतर्गत निर्माण मजदूर को दी जाती हैं वो सब योजनाएं बंद पड़ी हैं मजदूरों के आवेदन बोर्ड के कार्यालय में धूल चाट रहे हैं.

सरकार को बताया मजदूर विरोधी (ETV Bharat)

ज्ञापन भेजने के बाद भी नहीं कोई सुनवाई

राज्य महासचिव रविंद्र सिंह ने कहा कि 'श्रमिकों के क्लेम सेटल नहीं किए जा रहे हैं. दिसंबर 2025 में जो मृत्यु और छात्रवृत्ति के क्लेम पास किए थे, उनको आज तक बैंक खाते में सहायता राशि नहीं आई है. इसलिए अब मजदूरों का धैर्य टूट रहा है और वो उग्र आंदोलन के लिए उतारू हो गए हैं. विभिन्न माध्यमों से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. लापरवाह अधिकारियों पर नकेल कसने के बजाय सरकार श्रमिकों का शोषण कर रही है.'

मजदूर विरोधी है सरकार

रविंद्र सिंह ने कहा कि तीन साल से हिमाचल सरकार ने मजदूर विरोधी रवैया अपनाया है. मजदूरों की ओर से औपचारिकताओं को पूरा करने बाद भी ऑबजेक्शन लगाए जा रहे हैं. इस सरकार की नीयत में खोट है. ये मजदूरों का हक नहीं देना चाहती. तीन सालों से मजदूर लेबर दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, अधिकारी दफ्तरों में चक्कर कटवा रहे हैं. बोर्ड में 14 सौ करोड़ पड़ा है और बजट की कमी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में मजदूरों के क्लेम सेटल करने के आदेश दिए हैं. इसके बाद भी क्लेम सेटल नहीं हो रहे हैं.

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