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यूपी के इकलौते कैंसर संस्थान का कायाकल्प: क्या बदल रहा है और मरीजों को क्या होगा लाभ?

कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. एमएलबी भट्ट ने कहा कि संस्थान में संविदा पर डॉक्टरों की होगी.

कैंसर संस्थान की बदलती तस्वीर
कैंसर संस्थान की बदलती तस्वीर (Photo credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 8:44 PM IST

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लखनऊ (अपर्णा शुक्ला) : कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान प्रदेश का एक मात्र संस्थान ऐसा है, जहां पर कैंसर से पीड़ित मरीजों का इलाज होता है. अब यहां पर और बेहतर सुविधा करने के लिए इस संस्थान का विस्तार किया जा रहा है. कई अन्य विभाग भी शुरू होने वाले हैं, इसको लेकर कवायद तेज हो चुकी है, वहीं कई पदों पर विशेषज्ञों की भर्ती भी की जाएगी. कैंसर संस्थान में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ-साथ नए विभाग भी खुलेंगे. इससे यहां त्वचा और रक्त कैंसर का इलाज भी हो सकेगा.

बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस और कैंसर संस्थान के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने दी जानकारी. (Video credit: ETV Bharat)



'संस्थान में होगी डॉक्टरों की भर्ती' : कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. एमएलबी भट्ट ने कहा कि संस्थान में त्वचा और रक्त कैंसर का इलाज भी हो सकेगा. संस्थान इसके लिए संविदा पर 74 डॉक्टरों की भर्ती करेगा. इसका विज्ञापन जारी किया गया है. 8 जनवरी से 20 फरवरी के बीच आवेदन किए जा सकेंगे. साक्षात्कार के आधार पर डॉक्टरों की भर्ती होगी. मार्च तक नियुक्ति होने की उम्मीद है.

उन्होंने बताया कि संस्थान की ओपीडी में इस समय प्रदेश भर से 400 से अधिक कैंसर के मरीज आ रहे हैं. 300 बेड पर मरीज भर्ती किए जा रहे हैं. इमरजेंसी में 25 बेड पर इलाज दिया जा रहा है. आने वाले दिनों में बेड की संख्या और बढ़ेगी. इसके लिए संविदा पर डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है. उन्होंने बताया कि इस समय संस्थान में 45 डॉक्टर हैं. नए डॉक्टर आने से इलाज में और आसानी होगी.

इन विभागों में होगी डॉक्टरों की तैनाती : उन्होंने कहा कि वर्तमान में बहुत सारे विभाग में विशेषज्ञों की तैनाती की जा रही है. वर्ष 2025 में सर्जिकल आंकोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, सर्जिकल गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी आंकोसर्जरी, यूरोलॉजी, आर्थोपेडिक्स आंकोसर्जरी, मेडिकल आंकोलॉजी, क्लीनिकल हिमैटोलॉजी, पीडियाट्रिक आंकोलॉजी, रेडियोथेरेपी, मेडिकल फिजिस्ट, ईएनटी, डेंटल, गायनी आंकोलॉजी, एनस्थीसिया, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, न्यूक्लीयर मेडिसिन, मेडिकल फिजिस्ट न्यूक्लीयर मेडिसन, पैथोलॉजी एंड कैंसर जेनेटिक्स, बायोकेमेस्ट्री, प्लास्टिक सर्जरी, रेडियो डायग्नोसिस, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, पैलेएटिव केयर, पब्लिक हेल्थ, फिजिकल मेडिकल एंड रिहैबिलिटेशन, जनरल मेडिसिन और त्वचा रोग विभाग में विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी.

कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान
कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान (Photo credit: ETV Bharat)

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम : स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि कैंसर से बचाव के लिए समय-समय पर हर स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित होता रहा है. इसके अलावा लखनऊ के बड़े मेडिकल संस्थान और जिला अस्पतालों के द्वारा भी कैंसर जागरूकता आयोजन होता है. इसके अलावा स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय स्तर पर भी स्वास्थ्य विभाग कार्यक्रम आयोजित करता है ताकि भावी पीढ़ी कैंसर के प्रति जागरूक हो सकें.

कैंसर संस्थान में बेड, डाॅक्टर और विभाग
कैंसर संस्थान में बेड, डाॅक्टर और विभाग (Photo credit: ETV Bharat)


सात नए विभाग और उनका महत्व

हेमेटो-ऑन्कोलॉजी (रक्त कैंसर) : अब ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के मरीजों को दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा. इसमें रक्त (खून), बोन मैरो और लसीका तंत्र से संबंधित कैंसर व अन्य रोग शामिल होते हैं. इसके इलाज के लिए सीबीसी (खून की जांच), बोन मैरो टेस्ट, बायोप्सी, इम्यूनोफेनोटाइपिंग, जेनेटिक टेस्ट संस्थान में हो सकेगा. वहीं, इलाज में कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, बोन मैरो व स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हो सकेगा.

डर्मा-ऑन्कोलॉजी (त्वचा कैंसर) : स्किन कैंसर के लिए अत्याधुनिक सर्जरी और थैरेपी संस्थान में होंगी. त्वचा कैंसर त्वचा की कोशिकाओं में होने वाला कैंसर है. यह अधिकतर धूप (सूरज की पराबैंगनी किरणें) के लंबे समय तक संपर्क में रहने से होता है. हालांकि भारत में त्वचा कैंसर के मरीज कम हैं. लेकिन, संस्थान में त्वचा कैंसर से बचाव के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं. त्वचा की जांच के लिए संस्थान में बायोप्सी, जरूरत पड़ने पर सीटी व एमआरआई जांच हो सकेगी. वहीं, इलाज में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनो व टार्गेटेड थेरेपी (विशेषकर मेलानोमा में) होगी.

सात नये विभाग खुलेंगे
सात नये विभाग खुलेंगे (Photo credit: ETV Bharat)

पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी : बच्चों में होने वाले कैंसर के लिए विशेष वार्ड तैयार किया जाएगा. इस विभाग में पीडियाट्रिक ऑकोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी, ताकि बच्चों में होने वाले कैंसर का इलाज हो सके. बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाया जाएगा, जहां पर कैंसर से पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जाएगा.

न्यूरो-ऑन्कोलॉजी : इस विभाग में ब्रेन ट्यूमर, रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर और नर्वस सिस्टम से जुड़े कैंसर का इलाज हो सकेगा. संस्थान में एमआरआई व सीटी स्कैन, बायोप्सी, न्यूरोलॉजिकल जांच हो सकेगी. वहीं, इलाज में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी व इम्यूनोथेरेपी, रिहैबिलिटेशन (फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी) हो सकेगी.

बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट : रक्त कैंसर के इलाज के लिए सबसे उन्नत तकनीक है. इस विभाग के शुरू होने से जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलेगा. बोनमैरो एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें रोगग्रस्त या खराब बोन मैरो की जगह स्वस्थ स्टेम सेल दिए जाते हैं, ताकि शरीर फिर से सामान्य रूप से खून की कोशिकाएं बना सके. वर्तमान में एसजीपीजीआई और केजीएमयू संस्थान में बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो रहा है.

कैंसर के बारे में
कैंसर के बारे में (Photo credit: ETV Bharat)

पैलिएटिव केयर विभाग : अंतिम चरण के मरीजों के दर्द निवारण और जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए विभाग खोला जा रहा है. बता दें कि यह विभाग बीमारी को ठीक करने के बजाय लक्षणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित होती है. कैंसर, अंतिम चरण की बीमारियों या गंभीर रोगों में दी जाती है. इलाज के किसी भी चरण में शुरू की जा सकती है. इस विभाग में मरीज के दर्द व अन्य लक्षणों (उल्टी, सांस की तकलीफ) का नियंत्रण, मानसिक व भावनात्मक सहारा, पोषण व नर्सिंग देखभाल, मरीज और परिवार को परामर्श, जीवन के अंतिम चरण में देखभाल होती है.

न्यूक्लियर मेडिसिन : कैंसर की सटीक स्टेज जानने के लिए 'पेट-स्कैन' जैसी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं. संस्थान में न्यूक्लियर मेडिसिन पर काफी काम किया गया है. अत्याधुनिक मशीन सीटी स्कैन व एमआरआई स्कैन मशीन स्थापित की गई है, जो प्रदेश के किसी अन्य मेडिकल संस्थानों में स्थापित नहीं है. इन मशीनों को मुख्य तौर पर कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए ही स्थापित किया गया है, इसलिए यह इतनी अत्याधुनिक है.

कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान
कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान (Photo credit: ETV Bharat)

जानिए क्या और क्यों होता है कैंसर?

बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस और कैंसर संस्थान के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि कैंसर कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण कैंसर होता है. सामान्य रूप से शरीर की कोशिकाएं तय समय पर बढ़ती-घटती और मरती हैं, लेकिन जब उनके डीएनए में उत्परिवर्तन (Mutation) हो जाती है, तो वे बिना नियंत्रण के बढ़ने लगती हैं. आसान भाषा में इसको कैंसर कहते हैं.

'प्रदेश सरकार ने दी बहुत बड़ी सौगात' : बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस और कैंसर संस्थान के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में वह डेढ़ साल मेडिकल सुपरिटेंडेंट के पद पर रहे. उन्होंने बताया कि इस बीच समझ में आया कि कैंसर रोगियों के लिये प्रदेश सरकार द्वारा एक बहुत बड़ी सौगात दी गई है. जिसमें लखनऊ और आस-पास के कई जिलों, पूर्वांचल और अब तो दूसरे स्टेट से भी मरीज इलाज कराने आ रहे हैं. दिन पर दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है.

'कैंसर संस्थान में खास एमआरआई मशीन' : उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा वहां पर नई मशीनें जो कैंसर से रिलेटेड हैं उनको वहां सुसज्जित कर दिया गया है. कैंसर संस्थान में सबसे बढ़िया एमआरआई मशीन लगी हुई है. वहां पर सारे कैंसर रोग विशेषज्ञ जैसे की रेडिएशन आंकोलाॅजी, गायनी डिपार्टमेंट, इमरजेंसी मेडिसिन, डेंटल से रिलेटेड है. उन्होंने बताया कि दूसरी जो सबसे बड़ी ब्रांच है जिसमें सर्जिकल आंकोलाॅजी और न्यूरो सर्जरी के अच्छे डाॅक्टर कैंसर संस्थान में उपलब्ध हैं.

'100 एकड़ में कैंसर संस्थान बनाया गया' : उन्होंने बताया कि 100 एकड़ में कैंसर संस्थान बनाया गया है. भविष्य की सारी जरूरतों को देखते हुए उसे बनाया गया है. उन्होंने कहा कि हाल ही में कैंसर संस्थान में पेट मशीन स्थापित हुई है. पेट मशीन स्कैनर से बारीक से बारीक कैंसर की पकड़ होती है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से एक ऐसी सुविधा दी गई है, जिससे कि गरीब से गरीब मरीज का इलाज भी कैंसर संस्थान में हो सकता है और सबसे बड़ी बात मुख्यमंत्री राहत कोष से करोड़ों रुपये कैंसर संस्थान को दिया जा रहा है. आयुष्मान योजना का भी बहुत लाभ लोगों को मिल रहा है.

'तीमारदारों के लिये भोजन की भी सुविधा' : उन्होंने कहा कि इलाज के साथ-साथ, दवाइयां, रुकने की व्यवस्था दी जा रही है. मरीजों के तीमारदारों के लिये भोजन की भी सुविधा वहां पर दी जा रही है. करीब-करीब सभी विभाग हैं कैंसर से संबंधित उन सभी विभागों में ट्रीटमेंट किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कैंसर बीमारी केवल मरीज को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को परेशान करता है. कैंसर कहीं न कहीं परेशानी का सबब बनता है. जिस व्यक्ति को यह पता चल जाए कि कैंसर हो गया है, वह डिप्रेशन में चला जाता है कि पहले तो उसके अंदर यह जूझारू पन लाना होगा कि कैंसर से हम उसको ठीक करेंगे.

20 अक्टूबर 2020 को हुई संस्थान में ओपीडी की शुरुआत : लखनऊ कैंसर संस्थान की शुरुआत 20 अक्टूबर 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया गया था. निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ था, लेकिन संस्थान को पूरी तरह से शुरू होने में समय लगा. बाद में इसमें ओपीडी सेवा 2016 में शुरू हुई, जिसे फिर से 2020 में शुरू किया गया.

कैंसर होने के मुख्य कारण : चिकित्सक के मुताबिक, तंबाकू, धूम्रपान, (सिगरेट-बीड़ी), गुटखा, पान मसाला सेवन से फेफड़ों, मुंह, गले, मूत्राशय का कैंसर का खतरा होता है. इसके अलावा शराब के अधिक सेवन से लिवर, मुंह, गले और स्तन कैंसर का खतरा होता है. अस्वस्थ जीवनशैली जैसे जंक फूड, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी भी कारण बन सकती है. संक्रमण जैसे ह्यूमन पैपिलोमावायरस से सर्वाइकल कैंसर का खतरा होता है. हेपेटाइटिस बी और सी से लिवर कैंसर का खतरा होता है. हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया से पेट का कैंसर का खतरा अधिक होता है. जहरीली गैसें, कीटनाशक औद्योगिक रसायन भी मुख्य कारण में से एक है. सूरज की तेज यूवी किरणों से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ता है. हार्मोन असंतुलन से स्तन या प्रोस्टेट कैंसर होता है.



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