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हाईकोर्ट ने कहा- हाईस्कूल और इंटर की पाठयपुस्तकों का निर्धारण यूपी बोर्ड का अधिकार क्षेत्र

यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मैसर्स राजीव प्रकाशन की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 8:31 PM IST

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में यह टिप्पणी की है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद (बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन) प्रयागराज की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में आता है. यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मैसर्स राजीव प्रकाशन की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है.

याची ने सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने याचिका को इसी मुद्दे पर 2014 में दिए गए एक पुराने फैसले के आधार पर निस्तारित कर दिया. कोर्ट ने कहा कि उक्त निर्णय में कहा गया था कि विवादित आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अध्ययन के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना संबंधित प्राधिकारी की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में है.

यदि याची यूपी अधिनियम संख्या 7, 1979 या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो राज्य के अधिकारी उसमें परिकल्पित कार्रवाई का सहारा लेने के लिए हमेशा स्वतंत्र हैं. याची अधिनियम या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तो उन्हें ऐसी किताबें प्रकाशित करने या खुले बाजार में बेचने से नहीं रोका जा सकता जो परिषद की निर्धारित पाठ्यपुस्तकें नहीं हैं.

भले ही ऐसी पुस्तकें परिषद की पाठ्यपुस्तकों के स्तर की न हों या उनकी कीमत बहुत अधिक हो, याची को अपने विपणन प्रयासों के परिणाम स्वयं भुगतने होंगे. ​कोर्ट ने आगे कहा कि हमने 15 अप्रैल 2014 के निर्णय का अवलोकन किया है और हमारा मानना है कि याचिका में उठाया गया मुद्दा पूरी तरह से उसी निर्णय के अंतर्गत आता है. तदनुसार इस याचिका को उन्हीं शर्तों के साथ निस्तारित किया जाता है.

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