Special: अधर में लटका JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का भविष्य! जांच जल्द पूरी करने और पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग
JPSC-JSSC अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने जल्द जांच पूरी कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की. रिपोर्ट- भुवन किशोर झा

Published : August 29, 2026 at 3:21 PM IST
रांची: छात्रों के आंदोलन और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा प्रतियोगिता परीक्षाओं को रद्द किए जाने से जेपीएससी-जेएसएससी की करीब डेढ़ दर्जन प्रतियोगिता परीक्षाएं अधर में लटक गई हैं. एक ओर सरकार द्वारा इसकी सीआईडी से जांच कराई जा रही है, वहीं दूसरी ओर इन परीक्षाओं में बैठे विद्यार्थी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर कब जांच पूरी होगी और कब नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी.
हेमंत सरकार द्वारा रद्द की गई 22 नियुक्ति परीक्षाओं में अब तक जेपीएससी सिविल सेवा (11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा), फूड सेफ्टी ऑफिसर, सीडीपीओ भर्ती और सीजीएल नियुक्ति परीक्षा में प्रार्थियों को हाई कोर्ट से राहत मिल चुकी है. हालांकि, इनकी भी जांच जारी है, मगर शेष अन्य परीक्षाएं, जो जेपीएससी द्वारा या तो पीटी हो चुकी हैं या मुख्य परीक्षा होकर अटकी हुई हैं, इनका क्या होगा, यह अभी भी अधर में लटका हुआ है.
अपने भविष्य को लेकर छात्र चिंतित
जाहिर तौर पर इन परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर खासे चिंतित हैं. छात्र अमृत मुंडा कहते हैं कि सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द जांच पूरा कराकर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे, नहीं तो वे छात्र जो लंबे समय से सरकारी नौकरी के लिए दिन-रात मेहनत करते रहे हैं, उनका भविष्य चौपट हो जाएगा.
डीएसएमयू छात्र संघ के उपाध्यक्ष बादल भोक्ता कहते हैं कि छात्र आंदोलन के दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप ने इसे खासा प्रभावित किया है. इसके बावजूद सरकार ने कदम जरूर उठाए हैं, मगर जांच जल्द से जल्द पूरी हो ताकि छात्रों को इसका लाभ मिले.
झारखंड सरकार द्वारा रद्द किए गए प्रतियोगिता परीक्षाओं पर नजर दौड़ाएं तो इनके माध्यम से करीब 15 हजार विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी पाने का मौका मिलेगा.

झारखंड को बदनाम होने से बचाने की मांग
इधर, आदिवासी छात्र संघ ने राज्य सरकार से नियोजन नीति जल्द से जल्द बनाकर झारखंड को बदनाम होने से बचाने की मांग की है. छात्र संघ के केंद्रीय प्रवक्ता सुशील कुमार कहते हैं कि सीआईडी जांच जल्द से जल्द सरकार पूरा कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे. उन्होंने कहा कि जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल के मामलों में सरकार ने जो निर्णय लिए हैं, वे अधिकांशतः छात्रों की मांगों से जुड़े हुए हैं, जिनकी जांच चल रही है. ऐसे में सभी को इसमें सहयोग करना होगा, नहीं तो झारखंड पहले से बदनाम हो चुका है और हम लोग बहुत पीछे चले जाएंगे.
बहरहाल, छात्रों के आंदोलन और इस मामले में चल रही सीआईडी जांच के बाद जेपीएससी के चेयरमैन सहित सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है और आयोग विगत एक महीने से डिफंक्ट (निष्क्रिय) है. इस वजह से कोई नीतिगत फैसले नहीं लिए जा रहे हैं. इसी तरह जेएसएससी भी सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर इस कदर उलझा हुआ है कि निकट भविष्य में कोई भी परीक्षा आयोजित होना मुश्किल है.
यह भी पढ़ें:
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने पुलिस-प्रशासन पर उठाए सवाल, पूछा- हमारे केस पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं

