जोधपुर पुलिस का पीपीपी मोड शुरू, पुलिस पब्लिक पार्टनरशिप के लिए हथाई पर पहुंचे कमिश्नर
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जोधपुर पुलिस को आमजन के साथ मजबूत रिश्ते बनाने के लिए पीपीडी मोड चलाने की घोषणा की थी.


Published : January 9, 2026 at 9:02 PM IST
जोधपुर: गत वर्ष की घोषणा के अनुरूप जोधपुर पुलिस ने जनता के साथ अपनी बॉन्डिंग मजबूत करने के लिए पीपीपी मोड शुरू कर दिया है. यह मोड पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का नहीं होकर पुलिस पब्लिक पार्टनरशिप है. इसका उद्देश्य शहर का हथाई कल्चर बढ़ाना है. इसके लिए शुक्रवार देर शाम को पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान खुद भीतरी शहर की हथाई पर पहुंचे. जहां उन्होंने काफी देर तक हथाई पर बैठे बुजुर्गों और युवाओं से बात की.
बुजुर्गों ने उन्हें बताया कि हथाई किस तरह से फायदेमंद और रिश्तों को जोड़ने की जगह है. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी दौर के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना जरूरी है. हथाई कल्चर हमें बहुत कुछ बता सकता है. यहां लोगों के गीले-शिकवे जुड़ते हैं. इससे अच्छा सिस्टम कुछ नहीं हो सकता. हम आमजन को पुलिस के साथ जोड़कर अपराध पर नियंत्रण करने का अभियान चला रहे हैं. यह काफी सफल रहेगा. यह आधुनिकता और विरासत का संगम है. याद रहे कि गत 25 दिसंबर को ही पुलिस कमिश्नर ने जोधपुर पुलिस को आमजन के साथ मजबूत रिश्ते बनाने के लिए पीपीडी मोड चलाने की घोषणा की थी.
पढ़ें: जोधपुर में अब पुलिस करेगी आमजन संग हथाई, संवाद रोकेगा टकराव और अपराध
कम्युनिटी पुलिसिंग का बड़ा उदाहरण बन सकती है हथाई: पुलिस का मानना है कि यह कल्चर कम्युनिटी पुलिसिंग का बड़ा उदाहरण बन सकता है. पुलिस चाहती है कि हथाई पुलिस और जनता की साथ-साथ हो, वह आपणी हथाई बने. जिसमें पुलिस भी आए. इससे दोनों तरफ से कम्युनिकेशन बना रहेगा तो किसी तरह का टकराव नहीं होगा. पूरे क्षेत्र की जानकारी आसानी से मिलती रहेगी. जोधपुर में हाल ही में हुई कुछ घटनाओं में पुलिस और जनता आमने-सामने हुई थी जिसके बाद यह फैसला लिया गया है.
पढ़ें: जोधपुर में कोर्ट परिसर में वकील और पुलिस अधिकारी के बीच विवाद, 'सॉरी' से सुलह हुई
बाहरी क्षेत्र हथाई से वंचित: भीतरी शहर की हथाई पर हर तरह की जानकारी होती है. अगर बीट कांस्टेबल लगातार इनके संपर्क में रहे, तो पूरे इलाके में कौन नया आया, कौन गया? सभी जानकारियां आसानी से मिल सकती हैं. पुलिस को अगर कोई संदेश देना हो, तो हथाई उसके प्रसार का महत्वपूर्व केंद्र हो सकती है. लेकिन जोधपुर में इनका दायरा सिर्फ भीतरी शहर तक ही है. शहर के बाहरी इलाकों में यह कल्चर नहीं के बराबर है. अपराधिक घटनाएं भी सर्वाधिक बाहरी इलाकों में होती है. ऐसे में पुलिस को बाहरी क्षेत्र के लिए अलग मेकैनिज्म तलाशना होगा.
हथाई पर हर मुद्दे पर होती है बात: जोधपुर के भीतरी शहर में गली-मोहल्लों में एक-एक बरामदे बने हुए हैं. जो मोहल्ले की हथाइयां हैं. यहां पर 24 में से 18 घंटे कोई न कोई बैठा हुए नजर आता है. मोहल्ले के बुजुर्ग, रिटायर्ड लोग अपना टाइम पास यहीं पर करते हैं. यहां पर मोहल्ले से लेकर दुनिया की राजनीतिक पर चर्चा होती है. शाम के बाद मोहल्ले के युवा यहां जुटते हैं, तो हथाइयां आधी रात के बाद भी गुलजार रहती हैं. इस दौरान उनके सामने से निकलने वाले हर व्यक्ति पर नजर होती है. कोई भी अपरिचित नजर आते ही, उसे रोककर पूछ लिया जाता है कि कौन हो, कहां से आए हो? यह चलन सैंकडों वर्ष पुराना है. जिससे भीतरी शहर में आपराधिक घटनाएं नियंत्रित रहती हैं.

