'पशु कहना भी गलत, वो भी ऐसा नहीं करते': 4 माह की मासूम से दुष्कर्म के दोषी को कोर्ट ने दी आसाराम जैसी सजा
न्यायाधीश डॉ. दत्त को यह फैसला लिखवाने में सात दिन का समय लगा. उन्होंने लिखा कि फैसला निर्णय लिखते समय उन्हें गहरी वेदना हुई.

Published : July 7, 2026 at 9:39 AM IST
|Updated : July 7, 2026 at 9:56 AM IST
जोधपुर : जिले के जिला विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने चार माह की मासूम से दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक कठोर कारावास और 1 लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है. ऐसी ही सजा आसाराम को तत्कालीन न्यायाधीश ने नाबालिग के साथ यौन शोषण के मामले में दी थी. यह मामला बहुत गंभीर था, जिसमें पीड़िता अबोध सिर्फ चार माह की है.
न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने पीड़िता के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य के लिए 15 लाख रुपए की प्रतिकर राशि एफडी के रूप में बालिग होने तक जमा कराने और मासिक ब्याज पीड़िता की माता को पालन-पोषण के लिए देने के आदेश भी पारित किए. यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राज्य सरकार की पीड़ित प्रतिकर योजना में दी जाएगी. न्यायाधीश डॉ. दत्त को यह फैसला लिखवाने में सात दिन का समय लगा. मामले में पीड़िता की ओर से पैरवी करने वाले विशिष्ट लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने बताया कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला था. फैसले में न्यायाधीश ने समाज को संदेश दिया है.
उन्होंने लिखा :
'क्या यही है तुम मर्दों की पहचान?
अरे शर्म करो तुम मर्द, समझो उस लड़की का दर्द
आओ दिखाओ अपनी मर्दानगी
क्या अब वह इज्जत से बन पाएगी किसी की बेटी, बहू या अर्धागिनी
अरे शर्म करो तुम मर्द ! समझो उस लड़की का दर्द.'
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विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि 21 वर्षीय आरोपी मूलतः बिहार का रहने वाला है. ग्रामीण क्षेत्र में वह पीड़िता के पिता के साथ फैक्ट्री में काम करता था. दोनों फैक्ट्री परिसर में पास रहते थे. गत वर्ष धुलंडी के दिन आरोपी कमरे पर आया था. तब बच्ची की मां कुछ देर के लिए बाहर गई. इसी दौरान आरोपी ने दुष्कर्म किया. घटना के बाद लोगों ने आरोपी को मौके से पकड़कर पुलिस के हवाले किया था. पुलिस ने अनुसंधान कर चार्जशीट पेश की. विचारण के दौरान राज्य सरकार ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने 23 मौखिक साक्ष्य, 49 दस्तावेजी साक्ष्य तथा 4 भौतिक वस्तुएं कोर्ट में पेश कर कठोर दंड की मांग की थी.
पशु कहना भी गलत, वो अमानवीय नहीं करते : सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिकित्सीय, वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को संदेह से परे दोषसिद्ध मानते हुए यह सजा सुनाई है. अपने 66 पेज के फैसले में न्यायाधीश ने लिखा है कि फैसला निर्णय लिखते समय उन्हें गहरी वेदना हुई. जिस देश में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, वहां इस प्रकार की घटना ने मन झकझोर दिया है. ऐसे अपराधी के लिए 'पशुवत' शब्द का प्रयोग भी उचित नहीं है, क्योंकि पशु भी अपने स्वाभाविक नियमों के विपरीत इस प्रकार का अमानवीय कृत्य नहीं करते.

