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JNU में छात्रों के मार्च को लेकर पुलिस कार्रवाई पर मचा घमासान, शिक्षक संघ ने की कड़ी निंदा

छात्रसंघ के नेतृत्व में यह मार्च निकाला गया था. हालांकि छात्रों ने मार्च रोकने और बल प्रयोग किए जाने का आरोप लगाया है.

जेएनयू छात्रों का मार्च व प्रदर्शन
जेएनयू छात्रों का मार्च व प्रदर्शन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : February 26, 2026 at 8:06 PM IST

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Updated : February 26, 2026 at 8:37 PM IST

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नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में गुरुवार को छात्र राजनीति एक बार फिर उबाल पर दिखी. छात्रसंघ के नेतृत्व में रोहित एक्ट के साथ यूजीसी के नियम लागू करने, जातिवादी बयान पर जेएनयू वीसी को माफी मांगने व इस्तीफा देने और सरकारी संस्थानों के लिए फंडिंग मजबूत करने को लेकर मार्च निकाला गया. वहीं वहीं दूसरी तरफ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन ने जेएनयू परिसर में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है.

इस दौरान कैंपस के बाहर और मुख्य गेट पर तनाव की स्थिति बन गई. छात्रों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस और आरएएफ ने बेरकेडिंग और मेन गेट पर ताला लगाकर मार्च रोका, बल प्रयोग किया और कई छात्रों को हिरासत में लिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से इस संबंध में अभी तक आधिकारिक बयान नहीं आया है.

छात्रों के मार्च निकालने को लेकर घमासान (ETV Bharat)

रोहित एक्ट और यूजीसी नियमों को लेकर मार्च: जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के नेतृत्व में यह मार्च साबरमती टी-प्वाइंट से शुरू हुआ. छात्र शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालकर यूजीसी की इक्विटी गाइडलाइंस को 'रोहित एक्ट' की तर्ज पर लागू करने की मांग कर रहे थे. छात्र नेताओं ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून की जरूरत है. जेएनयूएसयू की संयुक्त सचिव दानिश अली ने कहा कि मार्च के दौरान केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों, विश्वविद्यालयों में फंड कटौती और छात्रसंघ पदाधिकारियों के निलंबन जैसे मुद्दों को भी उठाया जाना था.

वीसी के इस्तीफे की मांग तेज: दानिश अली ने कहा कि मार्च के दौरान कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलीपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई. छात्रसंघ का आरोप है कि कुलपति की ओर से हाल ही में एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान से छात्र समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं. कुलपति को अपने बयान पर सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए. साथ ही आरोप लगाया कि प्रशासन छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है और असहमति को अनुशासनात्मक कार्रवाई के जरिए कुचला जा रहा है.

मुख्य गेट पर टकराव, लाठीचार्ज का आरोप: दानिश अली ने कहा कि जब मार्च मुख्य गेट की ओर बढ़ा तब भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया. मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया और बैरिकेडिंग कर छात्रों को आगे बढ़ने से रोका गया. छात्र जब आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे तभी दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई छात्रों को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया. छात्र नेताओं का आरोप है कि मौके पर कुछ लोग सिविल ड्रेस में मौजूद थे, जिन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया.

लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा: वहीं अध्यक्ष आदिती मिश्रा ने केंद्र सरकार पर शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने और असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया. साथ ही कहा कि शिक्षा को बेचने की कोशिश की जा रही है और जो भी इसका विरोध करता है, उसे रोका जाता है. हम अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे और दोबारा मार्च निकालेंगे और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा.

स्थिति फिलहाल शांत, लेकिन तनाव बरकरार: विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति सामान्य है, हालांकि छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव बना हुआ है. छात्र संगठन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों को बहस और असहमति की जगह माना जाता है, लेकिन इससे यह संदेश जा रहा है कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है. कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

शिक्षक संघ ने जारी किया स्टेटमेंट: वहीं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया और कई छात्रों सहित छात्रसंघ पदाधिकारियों को हिरासत में लिया. शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरजीत मजूमदार ने संगठन की ओर से स्टेटमेंट जारी कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई छात्र घायल हुए, जिनमें महिला छात्राएं भी शामिल हैं. महिला छात्रों के साथ कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए व्यवहार किया गया. उन्होंने हिरासत में लिए गए कुछ छात्रों को कैंपस से दूर अज्ञात स्थानों पर ले जाने की भी बात कही. शिक्षक संघ ने कहा कि छात्र शिक्षा मंत्रालय तक अपनी मांगें रखने के लिए मार्च कर रहे थे, जिसे रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया. साथ ही आरोप लगाया कि कार्रवाई छात्रों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास है.

प्रशासन और मंत्रालय पर सवाल: शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. बयान में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों के लिए प्रशासन की नीतियां जिम्मेदार हैं और मंत्रालय की चुप्पी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है. साथ ही उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी छात्रों की रिहाई और बल प्रयोग में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. शिक्षकों से अपील की गई है कि वह इस मुद्दे पर सतर्क रहें और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाएं.

जेएनयू ने जारी किया स्टेटमेंट: उधर, जेएनयू की तरफ से स्टेटमेंट जारी किया गया कि जेएनयूएसयू के प्रदर्शनकारी यूजीसी के नियमों को लागू करने की मांग कर रहे हैं. यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का उल्लंघन है, जिसने इन नियमों पर रोक लगा दी थी. जेएनयू के कुलपति या रजिस्ट्रार को इन नियमों पर कोई अधिकार नहीं हैजेएनयूएसयू ने आज तक अपने निष्कासन के मूल मुद्दे, यानी परिसर के अंदर सार्वजनिक संपत्ति पर तोड़फोड़ और हिंसा के मामले को सुलझाने से इनकार कर दिया है. जेएनयूएसयू ने आज तक अपने निष्कासन के इस मूल मुद्दे को सुलझाने से इनकार कर दिया है. जांच के बाद दोषी छात्रों को दोषी पाया गया और उन्हें निष्कासित कर दिया गया. जेएनयू एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, इसलिए यह सरकार, संसद और भारतीय करदाताओं के प्रति जवाबदेह है. यह निंदनीय है कि सार्वजनिक संपत्ति पर हिंसा और तोड़फोड़ के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए एक महिला ओबीसी कुलपति पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया जा रहा है.

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Last Updated : February 26, 2026 at 8:37 PM IST