ETV Bharat / state

MMDR संशोधन पर सत्ता के गलियारे में उबाल, अब JMM बनाएगा ‘उलगुलान’ की रणनीति, गुरुवार को होगा फैसला

MMDR संशोधन पर सत्ता के गलियारे में उबाल है. मामले में आगे क्या करना है इसका फैसला JMM गुरुवार को होने वाली बैठक में करेगा.

MMDR amendment
सीएम हेमंत सोरेन (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 19, 2026 at 9:00 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

रांची: झारखंड के खनिज अधिकार और राजस्व को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव अब राजनीतिक आंदोलन की ओर बढ़ता दिख रहा है. संसद से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे राज्य के आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. अब सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM इस मुद्दे को लेकर संगठनात्मक स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है. पार्टी ने 20 अगस्त को रांची में केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक बुलाई है, जिसमें आंदोलन की रणनीति पर मंथन होगा.

20 अगस्त को बनेगा आंदोलन का रोडमैप

सरकार के बाद अब पार्टी ने मोर्चा संभाल लिया है. JMM के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 20 अगस्त को केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक होगी. इसमें केंद्रीय समिति के सदस्य और पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और जिला सचिव, पार्टी के सभी विधायक और JMM कोटे के मंत्री शामिल होंगे. इस बैठक को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी अब MMDR संशोधन के खिलाफ विरोध को सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय इसे संगठन और जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है. JMM ने कोल्हान में भी इस मुद्दे पर बड़े पैमाने पर अभियान की तैयारी शुरू कर दी है.

PM को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज करा चुके हैं CM

दरअसल, 13 अगस्त को MMDR संशोधन विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिल के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की थी. मुख्यमंत्री ने खास तौर पर उस प्रावधान पर आपत्ति जताई है, जिससे राज्यों की खनिज-युक्त भूमि और खनिज अधिकारों पर टैक्स, सेस या दूसरी लेवी लगाने की शक्ति छीन गयी है. उसी दिन उन्होंने पार्टी के सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी.

11 हजार करोड़ के राजस्व का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में Mineral Bearing Land Cess को लेकर भी चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि MBL CESS से झारखंड को वर्तमान वित्तीय वर्ष में करीब 11 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान था. मुख्यमंत्री का तर्क है कि अगर राज्य की यह वित्तीय शक्ति कमजोर होती है तो इसका सीधा असर विकास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं पर पड़ सकता है.

केंद्र को आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं सीएम

13 अगस्त को मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का संकेत दिया था. उन्होंने सवाल उठाया था कि झारखंड की जमीन और खनिज को लेकर फैसले दिल्ली से क्यों किए जाएं. मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हुई तो झारखंड चुप नहीं बैठेगा. सरकार की रणनीति अब दो स्तरों पर दिखाई दे रही है. एक तरफ संवैधानिक और कानूनी मोर्चे पर केंद्र से सवाल, तो दूसरी तरफ राजनीतिक और जन आंदोलन के जरिए दबाव बनाने की तैयारी.

17 अगस्त की बैठक के बाद विशेष सत्र का संकेत

इसके बाद 17 अगस्त को छात्रों के आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर हुई कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि MMDR संशोधन से राज्य के राजस्व और अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा था कि इस मुद्दे पर बहुत जल्द विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सदन में चर्चा की जाएगी. खास बात है कि एमएमडीआर एक्ट में संशोधन की वजह से सरकार नाराज है तो वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा के नेता इस संशोधन के पक्ष में दलीलें पेश कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें:

MMDR संशोधन बिल को लेकर मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, झारखंड के हित में की कानून बनाने की मांग

खनिज विधेयक पर जेएमएम के आंदोलन की घोषणा पर बिफरे नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, जानिए क्या कहा